'नक्सलवाद की तरह ड्रग्स रैकेट को भी खत्म करें', गृहमंत्री शाह के बाद मुख्य सचिव ने सभी विभागों को दिया निर्देश
सरकार ने नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को भी तेज करने पर जोर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया है। स्कूलों और कॉलेजों के साथ समाज के अन्य वर्गों को भी इस अभियान से जोड़ने की योजना है।
MP News: मध्य प्रदेश में अवैध नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए सरकार अगले तीन साल तक विशेष अभियान चलाएगी। लक्ष्य केवल ड्रग्स पकड़ना नहीं, बल्कि उसके पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने मंत्रालय में हुई राज्य स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की बैठक में सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने और अपनी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रदेश में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए अभियान चलाया गया, उसी तरह अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर भी कार्रवाई की जाए।
कॉलेजों में बनेंगी एंटी-ड्रग समितियां
सरकार ने नशे के खिलाफ अभियान में स्कूल-कॉलेजों और युवाओं को भी शामिल करने का फैसला किया है। शुरुआत में 500 से ज्यादा विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी-ड्रग समितियां बनाई जाएंगी। इनमें शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, पुलिस और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समितियों के जरिए विद्यार्थियों को नशे के नुकसान के बारे में जागरूक किया जाएगा। नशे के कारोबार से जुड़ी जानकारी देने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके अलावा नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 का प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोग नशीले पदार्थों से जुड़ी जानकारी साझा कर सकें।
18 अवैध ड्रग्स लैब ध्वस्त, 446 करोड़ की संपत्ति अटैच
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 और 2026 के दौरान मध्य प्रदेश में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर नशीले पदार्थ बनाने वाली 18 अवैध प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया है। ड्रग्स के अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में 446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई भी की गई है।
30 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, NDPS एक्ट के 2,986 मामलों में 4,091 आरोपियों से करीब 50,933 किलो मादक पदार्थ जब्त किए गए। वर्ष 2025 में 2,073 मामलों में 1,44,025 किलो और 2026 में 30 सितंबर तक 2,756 मामलों में 1,30,380 किलो मादक पदार्थों को नष्ट किया गया।
हर जिले में नशामुक्ति केंद्र बनाने की तैयारी
मुख्य सचिव ने उन जिलों में भी नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा, जहां अभी ऐसी सुविधा नहीं है। सामाजिक न्याय विभाग को 31 अक्टूबर तक संबंधित जिलों से प्रस्ताव लेने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में बताया गया कि फिलहाल सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र चल रहे हैं।
सरकार ने नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को भी तेज करने पर जोर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया है। स्कूलों और कॉलेजों के साथ समाज के अन्य वर्गों को भी इस अभियान से जोड़ने की योजना है।
पुलिस और विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
मुख्य सचिव ने नारकोटिक्स विंग, राज्य खुफिया ब्यूरो और स्थानीय पुलिस के बीच तालमेल मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कोडीन आधारित कफ सिरप और नशीले पदार्थ बनाने में काम आने वाले रसायनों की आपूर्ति पर निगरानी बढ़ाने को कहा गया।
अब सरकार की कोशिश है कि नशे के कारोबार से जुड़े सप्लायरों, आर्थिक मदद करने वालों और बड़े नेटवर्क तक पहुंचकर कार्रवाई की जाए। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभाग तय लक्ष्यों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरह से लागू करते हैं।
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