MP के आदिवासी कलाकार की पेंटिंग 18 करोड़ में बिकी, कौन हैं चित्रकार जनगढ़ श्याम? 25 साल पहले हो गई थी मौत
1985 में 1,500 रुपये में खरीदी गई कलाकृति का 41 साल बाद 18 करोड़ रुपये तक पहुंचना जांगर की कला की बढ़ती अहमियत को दिखाता है। मौत के 25 साल बाद भी उनकी पेंटिंग्स लगातार चर्चा में हैं और अब उनकी कला की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है।
MP News: मध्य प्रदेश के मशहूर गोंड चित्रकार जांगर सिंह श्याम की कला ने एक बार फिर देशभर में ध्यान खींचा है। उनकी एक कलाकृति, जिसे 1985 में भोपाल में महज 1,500 रुपये में खरीदा गया था, अब करीब 41 साल बाद 18 करोड़ रुपये में नीलाम हुई है। जांगर सिंह श्याम का निधन करीब 25 साल पहले हो चुका है, लेकिन उनकी बनाई कलाकृतियों की मांग लगातार बढ़ रही है।
'जांगर कलम' के नाम से है पहचान
जांगर सिंह श्याम ने गोंड समाज की परंपराओं, लोककथाओं और प्रकृति को अपनी चित्रकारी में खास अंदाज में उतारा। उनकी पेंटिंग्स में पेड़, पक्षी, जानवर, देवी-देवता और आदिवासी जीवन के कई रंग दिखाई देते हैं। बारीक रेखाओं और छोटे-छोटे पैटर्न के इस्तेमाल से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी कला को बाद में 'जांगर कलम' के नाम से पहचान मिली। कला की दुनिया में इसे गोंड चित्रकला को पारंपरिक दायरे से बाहर निकालकर आधुनिक कैनवास तक पहुंचाने वाली खास शैली माना जाता है। दूसरे कला स्रोतों में भी जांगर की शैली और गोंड कला पर उनके प्रभाव का उल्लेख मिलता है।
पाटनगढ़ से निकलकर दुनिया में बनाई पहचान
जांगर सिंह श्याम का संबंध मध्य प्रदेश के मंडला इलाके के पाटनगढ़ से था। वह पर्धान गोंड समुदाय से आते थे। शुरुआती दौर में वह गांव की दीवारों पर पारंपरिक चित्र बनाते थे। 1980 के दशक की शुरुआत में मशहूर कलाकार जे. स्वामीनाथन की नजर उनकी कला पर पड़ी। इसके बाद उन्हें भोपाल के भारत भवन से जुड़ने का मौका मिला।
यहीं उनकी चित्रकारी को नया मंच मिला और उन्होंने पारंपरिक गोंड कला को कागज और कैनवास पर नए तरीके से पेश करना शुरू किया। आगे चलकर उनकी पेंटिंग्स देश के अलावा विदेशों तक पहुंचीं।
39 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया
जांगर सिंह श्याम का निधन 2001 में हुआ था। उनकी उम्र उस समय सिर्फ 39 साल थी। कम उम्र में दुनिया छोड़ने के बावजूद उनकी कला का प्रभाव लगातार बढ़ता गया।
हाल के वर्षों में उनकी पेंटिंग्स की नीलामी में कीमत तेजी से बढ़ी है। सितंबर 2026 में भी उनकी एक दूसरी कलाकृति नीलामी में रिकॉर्ड कीमत पर बिकी थी। इससे भारतीय कला बाजार में जांगर सिंह श्याम और गोंड कला की बढ़ती मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है।
1500 रुपये से 18 करोड़ तक का सफर
जांगर सिंह श्याम की कहानी सिर्फ एक पेंटिंग की बढ़ती कीमत की कहानी नहीं है। यह उस कलाकार की कहानी भी है, जिसने मध्य प्रदेश के एक छोटे से आदिवासी गांव की पारंपरिक चित्रकला को देश-दुनिया के कला बाजार तक पहुंचाया।
1985 में 1,500 रुपये में खरीदी गई कलाकृति का 41 साल बाद 18 करोड़ रुपये तक पहुंचना जांगर की कला की बढ़ती अहमियत को दिखाता है। उनकी मौत के 25 साल बाद भी उनकी पेंटिंग्स लगातार चर्चा में हैं और अब उनकी कला की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है। यह उपलब्धि मध्य प्रदेश के साथ-साथ गोंड और आदिवासी कला के लिए भी बड़ी पहचान मानी जा रही है।
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