'मलाई चाटने के बाद ऐसा ही बोलते हैं', हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंती वाले बयान पर RSS-VHP भड़के
वहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख उमर अहमद इलियासी ने भी अंसारी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे बयानों से सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है।
VHP-RSS On Hamid Ansari Statement: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के दक्षिणपंती हिंदू सांप्रदायिकता वाले बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आरएसएस, वीएचपी और भाजपा ने हामिद अंसारी पर पलटवार किया है। वहीं कई मुस्लिम संगठनों ने भी अंसारी के बयान पर आपत्ति जताई है। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि कुछ लोगों के कट्टर होने से सभी को एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता है।
'जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करना बंद करिए'
विश्व हिंदू परिषद(VHP) ने हामिद अंसारी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, '10 साल मलाई चाटने के बाद फेयरवेल(उप राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने पर) के दौरान मुसलमानों को भड़काने के लिए इन्होंने किस तरह दिए, ये किसी से छिपा नहीं है। अभी भी जो काम कर रहे हैं, किसके लिए कर रहे हैं, ये कौन नहीं जानता है। देश को खतरा बहुसंख्यक हिंदू से नहीं बल्कि तथाकथित कट्टर मानसिकता है। जो अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का जहर बो रहे हैं। आप इस्लामिक कट्टरता को हथियार बनाकर बहुसंख्यक का दमन करने वालों को प्रश्रय दे रहे हैं. भारत की पहली मस्जिद हिंदू राजा ने बनवाई। सबसे ज्यादा मुस्लिम भारत में रहते हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा सुरक्षित मुस्लिम भारत में हैं, और कहीं नहीं हैं। अरे हामिद अंसारी जी आप जिस थाली में खाते हैं, उसमें छेद करना बंद करिए।'
भाजपा बोली- हिंदू बहुसंख्यक है, इसीलिए उपराष्ट्रपति बने
भाजपा ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता पर पलटवार किया है। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, 'अगर हिंदुस्तान में बहुसंख्यक हिंदू नहीं होते, तो हिंदुस्तान न पंथनिरपेक्ष होता और न सेकुलर होता। हिंदुस्तान पंथनिरपेक्ष और सेकुलर इसलिए है कि यहाँ का बहुसंख्यक हिंदू है, जिसकी संस्कार, जिसकी संस्कृति सहिष्णुता की है, सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः की है। जब बंटवारा हुआ, तो दो देश बने। एक देश हिंदुस्तान था, जिसका बहुसंख्यक हिंदू था। दूसरा पाकिस्तान था, जिसका बहुसंख्यक मुसलमान था। बहुसंख्यक हिंदू वाले देश ने पंथनिरपेक्षता का रास्ता, सेक्युलरिज्म का रास्ता चुना। बहुसंख्यक मुस्लिम राष्ट्र ने इस्लामिक राष्ट्र का झंडा फहराया। तो ये एक जमीन-आसमान का फर्क है। जो ये बात कह रहे हैं, अगर ये देश हिंदुस्तान जो है, बहुसंख्यक हिंदू राष्ट्र न होता, हिंदू आबादी वाला देश न होता, पंथनिरपेक्ष और सेकुलर देश न होता, तो कोई राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति नहीं बन सकता था, कोई मुस्लिम समाज का व्यक्ति! ये बात उनको भी समझनी चाहिए।'
मुस्लिम नेताओं ने भी जताई आपत्ति
इस विवाद में मुस्लिम संगठनों से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद राशिदी ने कहा कि किसी एक समुदाय के कुछ कट्टर लोगों के आधार पर पूरे समुदाय को एक नजर से देखना उचित नहीं है। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों के संदर्भ में ऐसी सामान्यीकरण वाली भाषा से बचने की बात कही।
वहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख उमर अहमद इलियासी ने भी अंसारी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे बयानों से सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है।
हामिद अंसारी ने क्या कहा था?
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी नई दिल्ली में एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर दे रहे थे। इस दौरान अंसारी ने दिवंगत संविधान विशेषज्ञ और लेखक एजी नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा एक पुराना कथन सामने रखा। अंसारी ने किताब का हवाला देते हुए कहा कि देश के लिए हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता खतरा है।

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