नीमच के कलाकार का फिर कमाल! चावल के दाने से भी छोटी गणेश की मूर्ति; 6 MM लंबाई और 70 मिलीग्राम वजन
इतने छोटे आकार में किसी आकृति को तैयार करना सामान्य मूर्ति बनाने से काफी अलग होता है। यही वजह है कि माइक्रो आर्ट में कलाकार की नजर, धैर्य और उपकरणों पर कंट्रोल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
MP News: मध्य प्रदेश के नीमच जिले के एक कलाकार ने अपनी बारीक कारीगरी से एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है। जावद निवासी माइक्रो आर्टिस्ट राजेश सोनी ने चांदी पर भगवान गणेश के अष्टविनायक स्वरूप को बेहद छोटे आकार में तैयार किया है। इस कलाकृति की लंबाई सिर्फ 6 मिलीमीटर है और इसका वजन करीब 70 मिलीग्राम बताया गया है। आकार इतना छोटा है कि यह चावल के एक दाने से भी छोटी नजर आती है।
भगवान गणेश के 8 स्वरूपों को दर्शाया
राजेश सोनी की इस कलाकृति की खासियत सिर्फ इसका छोटा आकार नहीं है, बल्कि इसमें भगवान गणेश के आठ अलग-अलग स्वरूपों को शामिल किया गया है। अष्टविनायक परंपरा में मयूरेश्वर, सिद्धिविनायक, बल्लालेश्वर, वरदविनायक, चिंतामणि, गिरिजात्मज, विघ्नेश्वर और महागणपति के स्वरूपों की मान्यता है। कलाकार ने इन्हीं आठ रूपों को बेहद सूक्ष्म स्तर पर चांदी में आकार दिया है।
सूक्ष्म हिस्सों को जोड़कर किया गया तैयार
रिपोर्टों के मुताबिक यह माइक्रो आर्ट इतनी छोटी है कि इसे भगवान गणेश को अर्पित की जाने वाली दुर्वा पर भी रखा जा सकता है। कलाकार ने इसे धार्मिक प्रतीकों से सजाने के लिए हल्दी, कुंकुम और चावल का इस्तेमाल भी किया है। इस वजह से यह कलाकृति सिर्फ माइक्रो आर्ट का उदाहरण नहीं रह जाती, बल्कि धार्मिक आस्था और पारंपरिक शिल्प का भी संयोजन दिखाई देती है।
कलाकृति को तैयार करने में बेहद सूक्ष्म हिस्सों को जोड़ने का काम किया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके कुछ हिस्से करीब 2 मिलीमीटर तक छोटे हैं। इतनी बारीक संरचना को तैयार करने के लिए कलाकार को बेहद सावधानी और सटीकता के साथ काम करना पड़ा।
दुनिया का सबसे छोटा ताजमहल और विश्वकप बना चुके हैं राजेश
राजेश सोनी माइक्रो आर्ट के क्षेत्र में पहले भी कई प्रयोग कर चुके हैं। उनकी बनाई छोटी कलाकृतियों में सोने से तैयार अफीम की डोडी, ताजमहल और क्रिकेट विश्व कप ट्रॉफी जैसी कृतियों का भी उल्लेख मिलता है। उनके इन कामों को रिकॉर्ड स्तर पर पहचान मिल चुकी है।
उनकी नई अष्टविनायक कलाकृति ऐसे समय पर सामने आई है, जब देशभर में गणेश उत्सव को लेकर धार्मिक गतिविधियां चल रही हैं। ऐसे में भगवान गणेश के आठ स्वरूपों को इतनी छोटी चांदी की कलाकृति में ढालना लोगों के लिए खास आकर्षण का विषय बन गया है।
ऐसी कलाकारी के लिए इंस्ट्रूमेंट पर कंट्रोल बहुत जरूरी
इतने छोटे आकार में किसी आकृति को तैयार करना सामान्य मूर्ति बनाने से काफी अलग होता है। इसमें हाथ की मामूली हलचल भी पूरी संरचना को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि माइक्रो आर्ट में कलाकार की नजर, धैर्य और उपकरणों पर कंट्रोल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
नीमच के राजेश सोनी की यह नई रचना इसी सूक्ष्म कला का उदाहरण है। 6 मिलीमीटर की इस छोटी सी चांदी की कलाकृति में अष्टविनायक के आठ स्वरूपों को समेटना उनके लंबे अनुभव और बारीक कारीगरी को दर्शाता है। अब उनकी यह नई रचना भी माइक्रो आर्ट के क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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