MP ने EVM किराए पर देकर बचाए 11 करोड़, 5 राज्यों को 200 करोड़ की बचत
सिक्किम के 2026 के नगर निकाय चुनावों के लिए मध्य प्रदेश ने 400 ईवीएम सेट उपलब्ध कराए। चुनाव पूरे होने के बाद जून 2026 में ये मशीनें वापस मध्य प्रदेश भेज दी गईं।
MP News: मध्य प्रदेश ने अपनी ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को दूसरे राज्यों को किराए पर देकर न सिर्फ सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया, बल्कि खुद भी 11.22 करोड़ रुपये की कमाई की है। वहीं, मध्य प्रदेश से मशीनें लेने वाले पांच राज्यों को नई ईवीएम खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। इससे इन राज्यों को करीब 200 करोड़ रुपये की बचत हुई है। मध्य प्रदेश की इस पहल को चुनावों में संसाधनों के साझा इस्तेमाल का उदाहरण माना जा रहा है।
इन राज्यों ने बचाए 200 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश की इस नीति के तहत महाराष्ट्र, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ को ईवीएम उपलब्ध कराई गईं। अगस्त 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यवस्था से मध्य प्रदेश को 11.22 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि दूसरे राज्यों की कुल बचत करीब 200 करोड़ रुपये रही। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए मध्य प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित भी किया गया।
कैसे शुरू हुई EVM शेयरिंग की पहल?
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने पास उपलब्ध अतिरिक्त ईवीएम को दूसरे राज्यों के स्थानीय निकाय चुनावों में इस्तेमाल के लिए देने की नीति बनाई थी। 30 जुलाई 2025 को राज्य निर्वाचन आयुक्तों की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में इस नीति को प्रस्तुत किया गया। इसमें दूसरे राज्यों के चुनावों के लिए मशीनें साझा करने पर चर्चा हुई थी।
छत्तीसगढ़ को 3 हजार EVM किराए पर दी थी
इससे पहले मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ को 3 हजार ईवीएम उपलब्ध करा चुका था। इसके बाद महाराष्ट्र के साथ समझौता हुआ। महाराष्ट्र को 25 हजार कंट्रोल यूनिट और 75 हजार बैलेट यूनिट देने की व्यवस्था की गई थी। उस समय तय दर के अनुसार एक कंट्रोल यूनिट और तीन बैलेट यूनिट का कुल किराया 1,000 रुपये था। इसके अलावा 2.50 करोड़ रुपये की प्रतिभूति राशि भी ली जानी थी।
राजस्थान से सिक्किम तक पहुंचा मॉडल
मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच फरवरी 2026 में एक अतिरिक्त समझौता हुआ। इसके तहत राजस्थान को स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए 30 हजार कंट्रोल यूनिट और 60 हजार बैलेट यूनिट किराए पर देने की व्यवस्था की गई। इससे राजस्थान को बड़ी संख्या में नई मशीनें खरीदने की जरूरत कम हुई।
सिक्किम के साथ भी इस नीति के तहत समझौता हुआ। सिक्किम के 2026 के नगर निकाय चुनावों के लिए मध्य प्रदेश ने 400 ईवीएम सेट उपलब्ध कराए। चुनाव पूरे होने के बाद जून 2026 में ये मशीनें वापस मध्य प्रदेश भेज दी गईं।
चुनाव प्रक्रिया में भी तकनीक का इस्तेमाल
ईवीएम साझा करने के साथ मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग चुनावी प्रक्रिया को भी डिजिटल बना रहा है। इसके लिए IEMS के एडवांस वर्जन, पोलिंग स्टेशन सर्वे एप, पीठासीन अधिकारी एप, प्रेक्षा एप और ईवीएम रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
29 सितंबर 2026 के नगरीय निकाय और पंचायत उपचुनाव में इन तकनीकों का उपयोग किया गया। पोलिंग स्टेशन सर्वे एप से मतदान केंद्रों पर रैंप, पेयजल, शौचालय और रास्तों जैसी सुविधाओं की जानकारी जुटाई गई। वहीं, प्रेक्षा एप के जरिए चुनाव प्रेक्षकों की रिपोर्ट सीधे चुनाव प्रबंधन सिस्टम तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
रिकॉर्ड के लिए रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर तैयार
दूसरे राज्यों को ईवीएम देने के बाद मशीनों की उपलब्धता, वापसी और दोबारा इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी हो गया है। इसके लिए रेंडमाइजेशन सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इस तरह मध्य प्रदेश की पहल से एक तरफ आर्थिक लाभ हुआ है, तो दूसरी तरफ चुनाव प्रबंधन को तकनीक से जोड़ने का काम भी आगे बढ़ रहा है।
