पेड गरबा के खिलाफ हिंदू संगठनों का हल्ला बोल! उज्जैन में दुकान पर पोस्टर-बैनर फाड़े
हिंदू संगठनों का कहना है कि धार्मिक उत्सव को मनोरंजन और कमाई का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
MP News: उज्जैन में नवरात्रि के दौरान होने वाले पेड गरबा आयोजनों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर में टिकट लेकर गरबा खेलने की व्यवस्था का हिंदू संगठनों ने विरोध किया है। बुधवार रात कुछ कार्यकर्ता एक बेकरी पर पहुंचे, जहां गरबा आयोजन के एंट्री टिकट बेचे जा रहे थे। यहां कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए आयोजन के पोस्टर और बैनर फाड़ दिए। साथ ही चेतावनी दी कि शहर में इस तरह के आयोजन नहीं होने दिए जाएंगे।
'धार्मिक उत्सव मनोरंजन और कमाई का जरिया नहीं'
इस विरोध के बाद नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा कार्यक्रमों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ आयोजक गरबा कार्यक्रमों के लिए टिकट बेचकर आयोजन की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हिंदू संगठनों का कहना है कि धार्मिक उत्सव को मनोरंजन और कमाई का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
बेकरी पर पहुंचकर किया विरोध
उज्जैन में एक बेकरी पर गरबा कार्यक्रम के प्रवेश टिकट बेचे जा रहे थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी पहुंच गए। उन्होंने टिकट बिक्री और पेड गरबा के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान कार्यक्रम से जुड़े पोस्टर और बैनर भी फाड़ दिए गए।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शहर में इस तरह के व्यावसायिक गरबा आयोजन किए गए तो वे इसका विरोध करेंगे और कार्यक्रम रुकवाने के लिए कदम उठाएंगे। फिलहाल इस विरोध के बाद संबंधित आयोजकों की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।
पहले भी कलेक्टर को सौंपा था ज्ञापन
पेड गरबा का विरोध उज्जैन में पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले 11 सितंबर को धार्मिक सांस्कृतिक आयोजन मंच और हिंदू जागरण मंच ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। संगठनों ने मांग की थी कि देवी की प्रतिमा या घट-कलश स्थापित किए बिना व्यावसायिक गरबा कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जाए।
संगठनों का तर्क है कि नवरात्रि के दौरान होने वाला गरबा धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा है। ऐसे में इसे केवल टिकट बेचकर आयोजित होने वाले मनोरंजन कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि गरबा आयोजनों में धार्मिक परंपराओं का पालन होना चाहिए।
गरबा के व्यावसायीकरण पर भी सवाल
पेड गरबा को लेकर विरोध की एक बड़ी वजह इसका व्यावसायिक रूप है। टिकट, बड़े आयोजन स्थल और मनोरंजन के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं को लेकर धार्मिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि गरबा का मूल उद्देश्य देवी की आराधना और सामूहिक धार्मिक उत्सव है। इसलिए आयोजन में धार्मिक परंपराओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
गरबा को लेकर सियासत गरमाई
मध्य प्रदेश में इस साल गरबा आयोजनों को लेकर अलग-अलग मुद्दों पर बहस हो रही है। भाजपा ने गरबा में गैर-हिंदुओं की भागीदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि उज्जैन में विरोध का मुख्य मुद्दा टिकट लेकर गरबा खेलने और व्यावसायिक आयोजन का है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
उज्जैन में हिंदू संगठनों की चेतावनी के बाद अब यह देखना होगा कि गरबा आयोजक अपने कार्यक्रमों को लेकर क्या फैसला लेते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में किसी आयोजन पर आधिकारिक रोक लगाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
नवरात्रि के दौरान शहर में कई जगह गरबा और डांडिया के कार्यक्रम होते हैं। ऐसे में पेड गरबा को लेकर उठा विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।
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