Mirabai Chanu : मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में दिलाया भारत को पहला गोल्ड, लगातार तीसरी बार बनीं चैंपियन
Mirabai Chanu : मीराबाई चानू ने इससे पहले 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था।
Mirabai Chanu : स्पोर्ट्स डेस्क। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का गोल्ड मेडल का खाता खुल गया है। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किग्रा कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने कुल 190 किग्रा वजन उठाया। इसमें स्नैच में 85 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 105 किग्रा शामिल रहा। दोनों लिफ्ट में उन्होंने गेम्स रिकॉर्ड बनाया। इस जीत के साथ मीराबाई ने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरा गोल्ड अपने नाम किया।
मीराबाई ने लगातार तीसरी बार जीता गोल्ड
मीराबाई चानू ने इससे पहले 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। 2014 के ग्लासगो गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। 2026 में गोल्ड जीतकर उन्होंने लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में खिताब जीतने का रिकॉर्ड बनाया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका चौथा मेडल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मीराबाई को उनकी जीत पर बधाई दी।
पहले प्रयास में चूक के बाद शानदार वापसी
मीराबाई स्नैच में अपने पहले प्रयास में 82 किग्रा वजन नहीं उठा सकीं। इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 82 किग्रा और तीसरे प्रयास में 85 किग्रा वजन सफलतापूर्वक उठाया। 85 किग्रा का यह प्रदर्शन गेम्स रिकॉर्ड रहा। क्लीन एंड जर्क में भी उनका पहला प्रयास सफल नहीं हुआ, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 105 किग्रा वजन उठा लिया। इसके साथ ही उनका कुल स्कोर 190 किग्रा हो गया और गोल्ड पक्का हो गया।
ऋषिकांत और राजा ने जीता सिल्वर
मीराबाई के गोल्ड के अलावा भारत ने पुरुषों की वेटलिफ्टिंग में दो सिल्वर मेडल भी जीते। ऋषिकांता सिंह चनंबम ने पुरुषों की 60 किग्रा कैटेगरी में कुल 264 किग्रा वजन उठाकर सिल्वर जीता। उन्होंने स्नैच में 121 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 143 किग्रा उठाया। वहीं राजा मुथुपांडी ने 65 किग्रा कैटेगरी में कुल 286 किग्रा वजन उठाकर सिल्वर जीता। उनका स्नैच 126 किग्रा और क्लीन एंड जर्क 160 किग्रा रहा।
राजा मुथुपांडी ने चोट के बाद की शानदार वापसी
राजा मुथुपांडी के लिए यह सिल्वर खास है। 2019 में कोहनी की चोट के बाद उनका करियर प्रभावित हुआ था। कोविड-19 महामारी के कारण वापसी में भी देरी हुई। बाद में 65 किग्रा कैटेगरी में लौटकर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई। 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने 299 किग्रा का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। अब ग्लासगो में 286 किग्रा उठाकर सिल्वर जीतना उनकी वापसी को खास बनाता है।
ऋषिकांत का दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स
ऋषिकांत सिंह के लिए यह दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स है। उन्होंने पुरुषों की 60 किग्रा कैटेगरी में 264 किग्रा के कुल वजन के साथ सिल्वर जीता। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में 55 किग्रा वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उनकी वेटलिफ्टिंग की शुरुआत मणिपुर में हुई थी और आगे उन्होंने भारतीय खेल संस्थानों तथा सेना से जुड़े खेल ढांचे में प्रशिक्षण लिया। ग्लासगो में सिल्वर जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान और मजबूत की है।
भारत के खाते में अब कई मेडल
ग्लासगो में भारत के लिए वेटलिफ्टिंग ने शानदार शुरुआत की है। मीराबाई के गोल्ड और ऋषिकांत व राजा के सिल्वर के अलावा पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इस तरह भारत के खाते में अब 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज सहित कुल 4 मेडल हैं। ताजा उपलब्ध जानकारी के मुताबिक भारत मेडल टैली में आठवें स्थान पर है, जबकि ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर है।
वेटलिफ्टिंग में मेडल कैसे तय होता है?
वेटलिफ्टिंग में दो मुख्य इवेंट होते हैं- स्नैच और क्लीन एंड जर्क। दोनों में खिलाड़ी को तीन-तीन प्रयास मिलते हैं। स्नैच में खिलाड़ी एक ही मूवमेंट में बारबेल को जमीन से उठाकर सिर के ऊपर ले जाता है। क्लीन एंड जर्क में पहले बारबेल को कंधों तक लाया जाता है और फिर दूसरे चरण में सिर के ऊपर उठाया जाता है। दोनों इवेंट में खिलाड़ी के सबसे अच्छे सफल प्रयास को जोड़ा जाता है। दोनों का कुल वजन सबसे ज्यादा होने पर खिलाड़ी विजेता बनता है।
2022 में भारत ने जीते थे 10 मेडल
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत के 15 वेटलिफ्टरों ने हिस्सा लिया था। भारतीय टीम ने इस खेल में कुल 10 मेडल जीते थे। इनमें 3 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज शामिल थे। 2026 में भी भारतीय वेटलिफ्टर्स से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। मीराबाई का गोल्ड और दो सिल्वर इस अभियान की मजबूत शुरुआत माने जा सकते हैं।
भारत ने 1934 में पहली बार लिया था हिस्सा
भारत ने पहली बार 1934 में इन खेलों में हिस्सा लिया था। उस समय प्रतियोगिता का नाम ब्रिटिश एम्पायर गेम्स था। भारत को शुरुआती सफलता रशीद अनवर ने कुश्ती में ब्रॉन्ज जीतकर दिलाई थी। 1958 में मिल्खा सिंह ने 400 मीटर दौड़ में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता। 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने पहली बार 100 से ज्यादा मेडल जीते थे। भारत ने 2010 में इन खेलों की मेजबानी भी की थी।
मीराबाई की जीत से भारत को बड़ी उम्मीद
मीराबाई चानू की जीत ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के अभियान को शानदार शुरुआत दी है। 190 किग्रा का कुल वजन उठाकर उन्होंने न सिर्फ गोल्ड जीता, बल्कि दोनों इवेंट में गेम्स रिकॉर्ड भी बनाए। उनके साथ ऋषिकांत और राजा के सिल्वर ने वेटलिफ्टिंग में भारत की स्थिति और मजबूत की है। अब भारतीय फैंस की नजर बाकी मुकाबलों पर है, जहां भारत के मेडल टैली को और बेहतर करने की उम्मीद है।