'मुझसे पंगा न लेना', सोने की खड़ाऊ पहनने के विवाद पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री बोले- अब हीरे की बनवाऊंगा
बाबा बागेश्वर ने सोशल मीडिया पर आलोचकों को अपने अंदाज में जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि अगर सोने की खड़ाऊं की बात की जाएगी तो अगली बार वह डायमंड की खड़ाऊं बुक करेंगे।
MP News: मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों अपनी खड़ाऊं को लेकर चर्चा में हैं। मामला तब शुरू हुआ, जब वे मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर आयोजित गणेश उत्सव में पहुंचे। इस दौरान उनके पैरों में सुनहरे रंग की खड़ाऊं नजर आई। तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि बाबा बागेश्वर सोने की खड़ाऊं पहनते हैं।
इस चर्चा के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने खुद सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी खड़ाऊं सोने की नहीं, बल्कि लकड़ी की है और उस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। उपलब्ध तस्वीरों और सामने आई जानकारी में भी खड़ाऊं लकड़ी की दिखाई देती है। इन खड़ाऊं के वास्तव में सोने से बने होने की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
'अब डायमंड की खड़ाऊं बनवाऊंगा'
छतरपुर में आयोजित दरबार के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने इस पूरे मामले पर फिर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आलोचकों और सोशल मीडिया पर चर्चा करने वालों को अपने अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि अगर सोने की खड़ाऊं की बात की जाएगी तो अगली बार वह डायमंड की खड़ाऊं बुक करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह माया-मोह छोड़ने वाले बाबा नहीं हैं।
मुकेश अंबानी के घर जाने के बाद चर्चा
सितंबर में गणेश चतुर्थी के मौके पर धीरेंद्र शास्त्री मुंबई स्थित मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया पहुंचे थे। वहां गणेश उत्सव के कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान उन्होंने मीडिया के सामने तस्वीरें भी खिंचवाईं। इसी दौरान उनकी खड़ाऊं कैमरों में नजर आईं और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई।
सुनहरे रंग की वजह से कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में इसे सोने की खड़ाऊं बताया गया। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या धीरेंद्र शास्त्री सच में सोने की खड़ाऊं पहनते हैं। बाद में उनके स्पष्टीकरण और सामने आई तस्वीरों से यह बात सामने आई कि खड़ाऊं लकड़ी की है और उसका रंग सुनहरा है।
सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे
धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि लोग खड़ाऊं के मुद्दे पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जबकि उनके अनुसार यह लकड़ी की है। उनका कहना था कि सिर्फ सुनहरे रंग की वजह से उसे सोने की बताना सही नहीं है।
इस पूरे मामले में फिलहाल चर्चा का केंद्र धीरेंद्र शास्त्री की खड़ाऊं और उनका बयान बना हुआ है। सोशल मीडिया पर तस्वीरों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर खड़ाऊं के सोने की होने की पुष्टि नहीं हुई है।
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