झीरम घाटी नक्सली हमले में 10 दोषियों को फांसी, कांग्रेस के सीनियर लीडर समेत 29 लोगों की हुई थी मौत
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाकर बैठे माओवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया था। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।
Jhiram Ghati Case Verdict: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी हत्याकांड में करीब 13 साल बाद अदालत ने फैसला सुना दिया है। जगदलपुर स्थित विशेष NIA अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए सभी 10 लोगों को मौत की सजा सुनाई है। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने इन सभी को दोषी करार दिया था। मामले में सुनवाई के दौरान कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे, लेकिन एक आरोपी की मृत्यु हो गई थी।
25 मई 2013 को हुआ था हमला
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाकर बैठे माओवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया था। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और पार्टी के अन्य नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। यह हमला राज्य की राजनीतिक व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर घटना माना गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक हमले में बड़ी संख्या में हथियारबंद माओवादी शामिल थे। काफिले को रोकने के लिए विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया और इसके बाद कई दिशाओं से फायरिंग की गई। जांच में हमले को सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया गया था।
एक दशक से ज्यादा चला मुकदमा
मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने की। अदालत में सुनवाई के दौरान 100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 101 गवाह पेश किए और जांच से जुड़े साक्ष्य रखे। सितंबर की शुरुआत में अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था और सजा के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की सुनवाई में 294 से ज्यादा तारीखें लगीं। ट्रायल के दौरान गिरफ्तार आरोपियों में से एक की मौत हो गई, जबकि चार्जशीट में नामजद कुछ अन्य आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं।
इन दोषियों को मिली सजा
अदालत ने प्रमिला मोडियाम, चैतू लेकाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी, आयता मरकाम, मड़कमि देवा, जोगा मड़कमी, बंजामी सना और महादेव नाग को मृत्युदंड दिया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। सभी दोषी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
आगे की कानूनी राह भी खुली
मामले में दोषी पाए जाने के बाद बचाव पक्ष ने फैसले को चुनौती देने की बात कही थी। 5 सितंबर के फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील ने कहा था कि आदेश की प्रति मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा और आगे हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। इसलिए NIA कोर्ट का यह फैसला अंतिम न्यायिक पड़ाव नहीं माना जाएगा और आगे उच्च अदालत में इसकी समीक्षा संभव है।
झीरम घाटी कांड में आया यह फैसला लंबे समय से चली आ रही न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। अब इस मामले में दोषियों की सजा के खिलाफ होने वाली संभावित अपील और उच्च न्यायालय में आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।
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