क्या है उज्जैन की शत्रु नाश साधना? विरोधियों से छुटकारा पाने के लिए करते हैं पूजा; फोटो पर ठोकते हैं कील
मंदिर का मूल नाम सती माता मंदिर बताया जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर मेलडी माता नाम भी प्रचलित है।
MP News: धार्मिक नगरी उज्जैन में एक ऐसा मंदिर चर्चा में है, जहां पेड़ों पर महिला-पुरुषों की तस्वीरें, कीलें लगी फोटो, सैंडल और कपड़ों से बने पुतले दिखाई देते हैं। स्थानीय मान्यताओं में इन चीजों को शत्रु नाश से जुड़े कर्मकांडों से जोड़कर देखा जाता है। भैरवगढ़ क्षेत्र में ओखलेश्वर रोड पर काल भैरव और विक्रांत भैरव मंदिर के आसपास स्थित इस स्थान को सती माता मंदिर के साथ-साथ मेलडी माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्र के दौरान तंत्र-मंत्र से जुड़ी मान्यताओं के चलते यहां लोगों की दिलचस्पी बढ़ जाती है।
पेड़ों पर तस्वीरें और पुतले क्यों टांगे जाते हैं?
मंदिर के आसपास लगे पेड़ों पर अलग-अलग तरह की वस्तुएं दिखाई देती हैं। इनमें महिला-पुरुषों की तस्वीरें, कपड़े, सैंडल, नींबू-मिर्च और कपड़ों से तैयार किए गए पुतले शामिल हैं। कुछ तस्वीरों पर कीलें भी लगी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर इन निशानियों को ऐसे पूजन से जोड़ा जाता है, जिसका उद्देश्य किसी विरोधी से छुटकारा पाना बताया जाता है।
पारिवारिक विवादों निपटाने के लिए करवाते हैं पूजा
स्थानीय तांत्रिक भय्यू महाराज के मुताबिक यहां आने वाले कुछ लोग पारिवारिक और निजी विवादों से परेशान रहते हैं। इनमें सास-बहू के झगड़े और शादी से जुड़े विवाद भी शामिल हैं। उनका दावा है कि कुछ लोग अपने विरोधियों से छुटकारा पाने की इच्छा लेकर यहां पूजा कराने आते हैं। महाराज ने गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित दूसरे राज्यों से भी लोगों के आने की बात कही है।
गुजरात की लोक मान्यता से जुड़ी हैं मेलडी माता
मेलडी माता की पूजा गुजरात की कई लोक परंपराओं में प्रचलित है। कुछ लोककथाओं में देवी के ऐसे स्वरूप का वर्णन मिलता है, जिसे बुरी शक्तियों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। कुछ परंपराओं में उन्हें ‘मां मसान मेलडी’ भी कहा जाता है और उनकी पूजा को श्मशान से जुड़ी मान्यताओं के साथ जोड़ा जाता है।
भैरव मंदिरों और श्मशान घाटों के पास है स्थान
उज्जैन का भैरवगढ़ क्षेत्र कई धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। आसपास काल भैरव और विक्रांत भैरव मंदिर सहित श्मशान घाट भी हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में भैरव उपासना और श्मशान से जुड़ी मान्यताओं का स्थान रहा है। इसी वजह से इस इलाके में तंत्र साधना को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं।
मंदिर का मूल नाम सती माता मंदिर बताया जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर मेलडी माता नाम भी प्रचलित है।
