आज से 3 दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट, ग्वालियर-चंबल पर सबसे ज्यादा असर, जानिए अपने जिले का हाल
मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो गई थी। इसके बावजूद अक्टूबर में अलग-अलग मौसम प्रणालियों के कारण बारिश की संभावना बनी हुई है।
MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। अक्टूबर में कहीं तेज धूप निकल रही है, तो कहीं बारिश की स्थिति बन रही है। मौसम विभाग के पहले पूर्वानुमान में 15 से 17 अक्टूबर के बीच प्रदेश के कई जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई थी। मौसम विभाग के मुताबिक बारिश का सबसे ज्यादा असर ग्वालियर-चंबल में देखने को मिलेगा।
ग्वालियर-चंबल से लेकर रीवा-सागर तक मौसम पर नजर
पहले जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, नीमच और मंदसौर में बारिश की संभावना थी। इसके बाद 16 से 18 अक्टूबर के दौरान बारिश का दायरा बढ़ने का अनुमान जताया गया था। ग्वालियर-चंबल के अलावा सागर, रीवा और शहडोल संभाग के कुछ जिलों में भी मौसम बदलने के आसार बताए गए थे।
इस बदलाव की वजह उत्तरी भारत में पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण को बताया गया था। हालांकि, मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है। ऐसे में किसी जिले में बारिश होगी या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए मौसम विभाग का नवीनतम स्थानीय पूर्वानुमान देखना जरूरी है।
मानसून लौटने के बाद भी क्यों हो रही बारिश?
मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो गई थी। इसके बावजूद अक्टूबर में अलग-अलग मौसम प्रणालियों के कारण बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस महीने दिन में गर्मी, रात में ठंडक और कुछ इलाकों में बारिश का एक साथ दिखना असामान्य नहीं है। इस बार भी मौसम में इसी तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है।
इस साल सामान्य से 4% कम बारिश
मानसून के चार महीनों यानी जून से सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह करीब 35.8 इंच है। इसके मुकाबले प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह पूरे मानसून सीजन में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम पानी बरसा।
बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर भी देखने को मिला। पूर्वी हिस्से में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से लगभग 12 प्रतिशत कम पानी बरसा। कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही, जिससे पूरे प्रदेश का औसत सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सका।
जून में कम बारिश से बिगड़ा औसत
मानसून के शुरुआती महीने जून में कम बारिश होने का असर पूरे सीजन के आंकड़ों पर पड़ा। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश होने के बावजूद शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। यही वजह है कि प्रदेश में मानसून के दौरान कुल बारिश सामान्य से कम रही।
फिलहाल मौसम में बदलाव की संभावना को देखते हुए किसानों और आम लोगों को स्थानीय पूर्वानुमान पर ध्यान देना चाहिए। गरज-चमक या तेज हवा चलने पर खुले मैदान में रहने और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना बेहतर होगा।

