सीहोर से 5 हजार आदिवासियों का भोपाल की ओर पैदल कूच, 12 परिवारों के मकान तोड़ने से आक्रोश; CM को दिखाएंगे जमीन के दस्तावेज
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मकान तोड़े जाने और फसलें नष्ट होने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनके क्षेत्र में जुल्म की इंतहा हुई है। उन्होंने बच्चों की चीखें और महिलाओं की कराह सुनने की बात कही थी।
MP News: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव से 5 हजार से ज्यादा आदिवासी भोपाल की ओर पैदल मार्च कर रहे हैं। गुरुवार रात तक जत्थे के कोनाझिर में रुकेंगे। आंदोलनकारी 17 अक्टूबर को राजधानी पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अपनी मांगें रखेंगे। वे जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाकर अपने कब्जे और खेती के अधिकार का पक्ष रखेंगे।
5 दिनों तक धरना देने के बाद भोपाल के लिए कूच
कोसमी में पांच दिन तक धरना देने के बाद आदिवासी परिवारों ने भोपाल कूच करने का फैसला लिया। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि जमीन का पट्टा दिया जाए, टूटे मकानों और फसलों के नुकसान का मुआवजा मिले और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कदम उठाए जाएं।
12 परिवारों के मकान तोड़ने के बाद बढ़ा विवाद
11 अक्टूबर को वन विभाग और वन विकास निगम की कार्रवाई में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए थे। फसलों को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगे। परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं।
वन विकास निगम और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3.37 लाख से अधिक सागौन के पौधे लगाए गए थे। रिपोर्ट में आरोप है कि 78,700 पौधे काटे गए और आरक्षित वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट 426 में 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया गया। जांच में पुरानी गूगल अर्थ तस्वीरों और ड्रोन फुटेज का भी हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 तक जमीन खाली थी, जबकि 2022 से वहां झोपड़ियां और खेती दिखाई देने लगीं।
शिवराज की नाराजगी, दिग्विजय ने उठाई जांच की मांग
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मकान तोड़े जाने और फसलें नष्ट होने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनके क्षेत्र में जुल्म की इंतहा हुई है। उन्होंने बच्चों की चीखें और महिलाओं की कराह सुनने की बात कही थी। इस मामले में मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 2004 से अब तक बुधनी के आदिवासी क्षेत्रों में वन भूमि पर कब्जे के मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान की आदिवासी क्षेत्रों में पदयात्राओं के बाद जंगल कटने और लोगों को कब्जे दिलाए जाने के आरोप भी लगाए।
बातचीत से नहीं निकला समाधान
14 अक्टूबर को संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. और एसपी सोनाक्षी सक्सेना सहित अधिकारी कोसमी पहुंचे थे। प्रभावित परिवारों से बातचीत हुई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों ने निरीक्षण और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही थी।
आंदोलन से जुड़े लोगों के मुताबिक, खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के लोग मार्च में शामिल हैं। इनमें महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी हैं। अब सबकी नजर 17 अक्टूबर को भोपाल में होने वाले प्रदर्शन और मुख्यमंत्री के सामने रखी जाने वाली मांगों पर है।
