पांढुर्णा में कल विश्वप्रसिद्ध ‘गोटमार मेला’, जाम नदी के तट पर फिर होगा खूनी खेल!
पांढुर्णा में 11 सितंबर को जाम नदी के तट पर प्रसिद्ध और पारंपरिक गोटमार मेला खेला जाएगा।

Gotmar Mela 2026: मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में जाम नदी के तट पर कल एक बार फिर सदियों पुरानी और विश्वप्रसिद्ध ‘गोटमार मेले’ का खूनी खेल देखने को मिलेगा। परंपरा और आस्था के नाम पर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने होंगे और एक-दूसरे पर अंधाधुंध पत्थरों की बरसात करेंगे। सिर फोड़ती गोफन, लहूलुहान होते लोग और नदी किनारे बिखरे पत्थर—गोटमार मेले की सालों पुरानी पहचान बन चुके हैं।
70 साल में 14 लोगों की मौत
गोटमार मेले का इतिहास जितना पुराना है, इसके साथ जुड़ी घटनाएं उतनी ही गंभीर हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1955 से अब तक पत्थरबाजी के दौरान 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों की संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हुए हैं।
प्रशासन ने कई बार पत्थरों की जगह रबर बॉल से आयोजन कराने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय परंपरा और लोगों की भावनाओं के चलते ये प्रयास सफल नहीं हो सके।
प्रेम कहानी से जुड़ी है मेले की किवदंती
गोटमार मेले को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। सबसे लोकप्रिय किवदंती पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। कहा जाता है कि प्रेमी युगल को नदी पार करते समय दोनों गांवों के लोगों ने रोकने के लिए पत्थरबाजी की थी। इसी घटना की याद में गोटमार मेले की परंपरा शुरू हुई। हालांकि, बुजुर्गों का मानना है कि समय के साथ इसमें गोफन और शराब के इस्तेमाल से आक्रामकता और खतरा बहुत बढ़ गया है।
700 जवान संभालेंगे मोर्चा
इस बार भी प्रशासन ने शांति समिति की बैठकें कर लोगों से शांतिपूर्ण उत्सव मनाने की अपील की है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांढुर्णा और सावरगांव दोनों तरफ 700 पुलिस जवान मुस्तैद रहेंगे। भीड़ को संभालने और विवाद रोकने के लिए 10 सीसीटीवी कैमरे और 3 ड्रोन कैमरों से पूरे मेला क्षेत्र की हवाई निगरानी की जाएगी। कंट्रोल रूम से हर हलचल पर सीधी नजर रखी जाएगी।
गोटमार मेले के लिए जाम नदी का पानी रोका
मेले को सुरक्षित माहौल में कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने कमर कस ली है। बारिश थमने से नदी का जलस्तर सामान्य है, फिर भी डूबने या बहने जैसी हादसों को रोकने के लिए नगर पालिका ने संगम तट पर पानी के बहाव को नियंत्रित करने के विशेष इंतजाम किए हैं।
नदी किनारे फिर लगे पत्थरों के ढेर
प्रशासनिक दावों और तैयारियों के बीच ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मेले से दो दिन पहले से ही जाम नदी के दोनों किनारों पर ट्रैक्टरों के जरिए भारी मात्रा में पत्थर लाकर इकट्ठे किए गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी पांढुर्णा की जाम नदी में परंपरा के नाम पर खूनी खेल खेला जाएगा?
परंपरा बनाम सुरक्षा की चुनौती
पांढुर्णा का गोटमार मेला सिर्फ एक धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि परंपरा और सुरक्षा के बीच लंबे समय से चली आ रही बहस भी है। एक तरफ स्थानीय लोग इसे अपनी सदियों पुरानी परंपरा और आस्था से जोड़ते हैं, तो दूसरी तरफ हर साल इस मेले में सैकड़ों लोग घायल होते है। जिससे इस आयोजन के तरीके पर सवाल उठते रहे हैं।
अब देखना होगा कि 700 जवान, ड्रोन और CCTV की निगरानी के बीच इस बार गोटमार मेले का आयोजन कितना शांतिपूर्ण रहता है।

.jpg&w=3840&q=75)

