'JCB से हनुमान प्रतिमा हटाने की खबरें भ्रामक', उज्जैन में प्रशासन का स्पष्टिकरण- IIT की टीम करेगी वैज्ञानिक जांच
सोशल मीडिया पर जेसीबी और क्रेन की मदद से प्रतिमा को हटाने के प्रयास की जो खबरें प्रसारित हो रही हैं, वे भ्रामक हैं। प्रशासन के मुताबिक अब तक प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।
MP News: उज्जैन में करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रशासन ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर जेसीबी और क्रेन की मदद से प्रतिमा को हटाने के प्रयास की जो खबरें प्रसारित हो रही हैं, वे भ्रामक हैं। प्रशासन के मुताबिक अब तक प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।
IIT इंदौर की टीम ने किया निरीक्षण
प्रतिमा की संरचनात्मक स्थिति और जमीन के अंदर उसकी गहराई का पता लगाने के लिए IIT इंदौर की विशेषज्ञ टीम ने मौके का निरीक्षण किया है। टीम ने आधुनिक उपकरणों की मदद से प्रतिमा और आसपास की जमीन की स्थिति का अध्ययन किया। अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई और प्रतिमा के संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सिंहस्थ 2028 के विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन उज्जैन की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं, संत समाज और विशेषज्ञों के साथ संवाद कर सभी की भावनाओं का सम्मान करते हुए सर्वसम्मत समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
सिंहस्थ 2028 को लेकर चल रहे विकास कार्य
दरअसल, सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण समेत कई विकास कार्य चल रहे हैं। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण की जद में प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर का भवन आ रहा था। मंदिर भवन को हटाया जा चुका है, लेकिन प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं में चिंता बनी हुई है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से प्रसारित हुआ कि प्रशासन ने जेसीबी और क्रेन की मदद से खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को निकालने का प्रयास किया। प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया है। प्रशासन का कहना है कि जब तक विशेषज्ञों की वैज्ञानिक और तकनीकी रिपोर्ट नहीं आती, तब तक प्रतिमा को हटाने के लिए कोई खुदाई या अन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी।
भगवान की प्रतिमा से लोगों की गहरी आस्था
खड़े हनुमान जी की प्रतिमा से उज्जैनवासियों की गहरी आस्था जुड़ी है। श्रद्धालु इन्हें ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ तक कहते हैं। कई साधु-संतों ने भी मंदिर पहुंचकर दर्शन किए और प्रतिमा को यथास्थान रखने का आग्रह प्रशासन से किया है।
भ्रामक जानकारी से बचने की अपील
इतिहासकार भगवती लाल राजपुरोहित के मुताबिक प्रतिमा और मंदिर की प्राचीनता को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच जरूरी है। प्रतिमा जमीन में कितनी गहराई तक है और उसकी वास्तविक संरचनात्मक स्थिति क्या है, इसका पता विशेषज्ञों की जांच के बाद ही चल सकेगा।
फिलहाल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक प्रतिमा के विस्थापन को लेकर कोई आगे की कार्रवाई नहीं होगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों से बचें और बिना पुष्टि के किसी भी जानकारी को आगे प्रसारित न करें।


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