100 रुपये के विवाद में दोस्त को घेरकर मार डाला, बड़वानी में जुआ खेलने के लिए मांगे थे पैसे, कोर्ट ने सुनाई 10-10 साल की सजा
अदालत का फैसला ऐसे मामलों में यह भी बताता है कि मामूली आर्थिक विवाद के दौरान हिंसा किस तरह गंभीर आपराधिक घटना का रूप ले सकती है। तीनों दोषियों को अब 10 साल की सजा भुगतनी होगी।
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MP News: बड़वानी जिले में एक केवल 100 रुपये के एक युवक ने दो साथियों के साथ मिलकर अपने ही दोस्त पीट-पीटकर हत्या कर दी। ताश खेलने के लिए उधार लिए गए पैसे वापस मांगने पर हुए झगड़े में एक व्यक्ति के साथ तीन युवकों ने मारपीट की थी। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की कुछ घंटे बाद ही मौत हो गई। मामले में 6 महीने बाद ही कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें 10-10 साल की सजा सुनाई और तीनों पर 25-25 हजार का जुर्माना लगाया
ताश खेलने के दौरान उधार लिए थे 100 रुपये
मामला बड़वानी के पाटी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के मुताबिक 29 मार्च 2026 को गंधावल रोड पर टंटनेश्वर महादेव मंदिर के पास एक खेत में फुलसिंग कुछ परिचितों के साथ ताश खेल रहा था। इसी दौरान वहां मौजूद मनीष सोलंकी ने उससे ताश खेलने के लिए 100 रुपये उधार लिए थे।
कुछ देर बाद फुलसिंग ने मनीष से अपने पैसे वापस मांगे। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि मनीष ने रकम लौटाने से इनकार किया और विवाद बढ़ने के बाद उसके दो साथी वीरेंद्र सोलंकी और रणछोड़ भी इसमें शामिल हो गए। तीनों ने फुलसिंग के साथ लात-घूंसों से मारपीट की।
बीच-बचाव के बाद घर पहुंचाया गया
मारपीट के दौरान मौके पर मौजूद किटाराम और लोकेश ने हस्तक्षेप किया और घायल फुलसिंग को वहां से निकालकर उसके घर पहुंचाया। शुरुआत में परिजनों को लगा कि चोटों के बाद वह आराम कर लेगा, लेकिन रात गुजरने के साथ उसकी हालत बिगड़ती गई।
सुबह करीब 4 बजे फुलसिंग ने सीने, पेट और चेहरे में तेज दर्द की शिकायत की। इसके बाद उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी पुलिस तक पहुंची और मामले में जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के बाद जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया।
तीनों दोषी करार, 10-10 साल की सजा
मामले की सुनवाई बड़वानी की विशेष अदालत में हुई। विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटीज एक्ट) लीलाधर सोलंकी ने मनीष सोलंकी (24), वीरेंद्र सोलंकी (20) और रणछोड़ (23) को दोषी माना। अदालत ने तीनों को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा प्रत्येक आरोपी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में प्रभावी पैरवी की गई।
100 रुपये के लिए कर दी हत्या
इस मामले में विवाद की शुरुआत महज 100 रुपये से हुई थी। ताश के खेल के दौरान उधार ली गई छोटी रकम वापस मांगने पर शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते हिंसा में बदल गई। मारपीट के बाद घायल व्यक्ति की मौत ने मामले को गंभीर अपराध में बदल दिया।
अदालत का फैसला ऐसे मामलों में यह भी बताता है कि मामूली आर्थिक विवाद के दौरान हिंसा किस तरह गंभीर आपराधिक घटना का रूप ले सकती है। तीनों दोषियों को अब 10 साल की सजा भुगतनी होगी।


