उमा भारती को क्यों आई शिवराज के शासन की याद? खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर CM मोहन यादव को लिखा पत्र
उमा भारती ने कहा, 'हमारे प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिवराज जी की सरकार के समय पर कमलापति पार्क के आगे जब सड़क का चौड़ीकारण हुआ तो वहां मस्जिद को छुआ भी नहीं गया और पूरा प्लान बदल करके रोड़ बनाया गया, क्योंकि हम विकास और आस्था को साथ लेकर चलते हैं।'
MP News: उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने को लेकर हर तरफ चर्चा है। मंदिर को हटा दिया गया है, लेकिन प्रतिमा की शिफ्टिंग नहीं हो सकी है। जेसीबी लगाने के बाद भी भगवान की प्रतिमा को नहीं हटाया जा सका है। धर्म में आस्था रखने वाले इसे चमत्कार बता रहे हैं। हालांकि जिला प्रशासन की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि आईआईटी की टीम के रिसर्च के बाद ही मूर्ति की शिफ्टिंग की जाएगी। वहीं अब पूरे मामले पर मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने प्रतिक्रिया दी है।
'विकास के साथ आस्था जरूरी'
उमा भारती ने सीएम मोहन यादव को लिखे पत्र में कहा, 'आप स्वयं उज्जैयनी के ही हैं, उज्जैयनी शहर और उज्जैयनी के सभी धार्मिक स्थानों की गरिमा को आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। उज्जैयनी के खड़े हनुमान मंदिर का समाधान आप स्वयं भी सोच रहे होंगे।
हमारे प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिवराज जी की सरकार के समय पर कमलापति पार्क के आगे जब सड़क का चौड़ीकारण हुआ तो वहां मस्जिद को छुआ भी नहीं गया और पूरा प्लान बदल करके रोड़ बनाया गया, क्योंकि हम विकास और आस्था को साथ लेकर चलते हैं। यही समाधान उज्जैयनी के खड़े हनुमान मंदिर का हो सकता है।'
मंदिर का ढांचा हटा, प्रतिमा हिला भी नहीं सका प्रशासन
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसी क्रम में कंठाल चौराहा से छत्री चौक की ओर जाने वाले मार्ग के चौड़ीकरण की योजना में खड़े हनुमान मंदिर को हटाया जाना था।
प्रशासन की ओर से मंदिर के ढांचे को हटाने की कार्रवाई की गई, लेकिन जब प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश हुई तो मामला उलझ गया। रकई बार भारी मशीनों और अन्य तकनीकी साधनों से कोशिश की गई, लेकिन प्रतिमा को स्थानांतरित नहीं किया जा सका। अब प्रशासन ने जांच के बाद प्रतिमा को शिफ्ट करने की बात कही है।
IIT इंदौर की विशेषज्ञ टीम करेगी जांच
प्रतिमा को लेकर वैज्ञानिक पहलू भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक उज्जैन नगर निगम ने IIT इंदौर से मदद मांगी है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि प्रतिमा जमीन में कितनी गहराई तक है और उसे नुकसान पहुंचाए बिना शिफ्टिंग करना तकनीकी रूप से संभव है या नहीं।
संत समाज के विरोध के बाद प्रशासन ने कही जांच की बात
प्रतिमा हटाने को लेकर संत समाज और श्रद्धालुओं ने विरोध शुरू कर दिया। मंदिर में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग कर रहे हैं। संतों के विरोध के बीच जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्षों से बातचीत और सहमति के बाद ही आगे कोई फैसला लिया जाएगा।

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