मानसून की विदाई से पहले फिर बदलेगा मौसम, भोपाल समेत कई शहरों में बारिश के आसार
मध्य प्रदेश में अब तक 33.1 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे का 88.7% है। मानसून की विदाई से पहले सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश का एक और दौर आने की संभावना है। जानिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन का मौसम।
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MP Weather : मध्य प्रदेश में मानसून का आखिरी दौर चल रहा है। प्रदेश में अब तक औसत 33.1 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य बारिश के कोटे का करीब 88.7 प्रतिशत है। मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 13 दिन बाकी हैं। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून की विदाई से पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में कुछ इलाकों में तेज बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।
फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में भारी या अति भारी बारिश का बड़ा अलर्ट नहीं है। हालांकि, स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। बुधवार को भोपाल, सीहोर समेत कई इलाकों में शाम और रात के समय बारिश हुई। झाबुआ के शाहपुरा में करीब 3 इंच और दतिया के सेंवढ़ा में करीब 4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई।
भोपाल में कैसा रहेगा मौसम?
राजधानी भोपाल में गुरुवार 17 सितंबर को तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री रहने का अनुमान है। भोपाल में बुधवार शाम को बारिश हुई। मौसम में नमी बनी हुई है और बादल छाए रहने के कारण आने वाले दिनों में भी स्थानीय स्तर पर बारिश हो सकती है। सितंबर महीने में भोपाल में औसतन करीब 7 इंच बारिश होती है। इस महीने आमतौर पर 8 से 10 दिन बारिश होती है।
भोपाल में पिछले कुछ वर्षों से सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश का ट्रेंड देखने को मिला है। राजधानी में 24 घंटे में सबसे ज्यादा 9.2 इंच बारिश 2 सितंबर 1947 को दर्ज की गई थी। वहीं, सितंबर महीने में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 1961 में बना था, जब पूरे महीने में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था।
इंदौर में सितंबर में बारिश का असर
इंदौर में भी सितंबर का महीना बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहता है। शहर में सितंबर महीने में करीब 8 दिन बारिश होना सामान्य माना जाता है, लेकिन इस बार बारिश के दिनों की संख्या ज्यादा रह सकती है। इंदौर में सितंबर महीने में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 1954 का है, जब पूरे महीने में करीब 30 इंच बारिश हुई थी। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच के करीब बारिश दर्ज की गई थी।
आने वाले दिनों में अगर स्थानीय मौसम प्रणालियां सक्रिय होती हैं तो इंदौर और आसपास के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
ग्वालियर में अगस्त में ही पूरा हुआ बारिश का कोटा
ग्वालियर में सितंबर महीने की सामान्य बारिश करीब 6 इंच है। इस बार अगस्त में ही शहर में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो चुका है। ऐसे में सितंबर में होने वाली बारिश सामान्य कोटे के मुकाबले अतिरिक्त बारिश मानी जाएगी। ग्वालियर में सितंबर महीने में सबसे ज्यादा करीब 25.5 इंच बारिश 1990 में हुई थी। वहीं, 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में करीब साढ़े 12 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
इस समय मानसून की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। स्थानीय सिस्टम बनने पर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।
जबलपुर में भी बारिश का दौर संभव
जबलपुर और आसपास के पूर्वी मध्य प्रदेश में भी मानसून का असर बना हुआ है। सितंबर महीने में जबलपुर में औसतन करीब 8.5 इंच बारिश होती है और करीब 10 दिन बारिश होना सामान्य है। जबलपुर में 20 सितंबर 1926 को 24 घंटे के भीतर करीब साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। वहीं, सितंबर महीने में सबसे ज्यादा करीब 32 इंच बारिश भी 1926 में ही दर्ज हुई थी।
इस बार प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश के आंकड़े पश्चिमी हिस्से की तुलना में अलग रहे हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बारिश से इन आंकड़ों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
उज्जैन में भी बदल सकता है मौसम
उज्जैन में सितंबर महीने की सामान्य बारिश करीब पौने 7 इंच है। पिछले दो वर्षों में यहां सितंबर के दौरान 12 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इस महीने औसतन करीब 7 दिन बारिश होती है। उज्जैन में सितंबर महीने में सबसे ज्यादा करीब 43 इंच बारिश 1961 में दर्ज की गई थी। वहीं, 27 सितंबर 1961 को 24 घंटे में करीब साढ़े 5 इंच पानी गिरा था।
आने वाले दिनों में अगर मानसून सिस्टम सक्रिय होता है तो उज्जैन और मालवा क्षेत्र के दूसरे जिलों में भी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
MP में अब तक 33.1 इंच बारिश
मध्य प्रदेश में 17 सितंबर तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच का करीब 88.7 प्रतिशत है। प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में बारिश सामान्य से करीब 3 से 25 प्रतिशत तक कम रही है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में बारिश सामान्य से कम रही है।
इन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।
हालांकि, प्रदेश का कुल बारिश आंकड़ा अभी सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम है। जून में कम बारिश इसका बड़ा कारण रहा। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में बारिश की स्थिति में सुधार आया, लेकिन जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
21 सितंबर के बाद बढ़ सकती है बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक 20 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश का बड़ा अलर्ट नहीं है। हालांकि, 21 सितंबर के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान चक्रवाती सिस्टम या लो प्रेशर एरिया की गतिविधि बनने पर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है।
अरब सागर में लो प्रेशर एरिया सक्रिय है और प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है। फिलहाल इन सिस्टम का मध्य प्रदेश पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं है, लेकिन स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ इलाकों में तेज बारिश हो सकती है।
मानसून की विदाई में करीब 13 दिन बाकी
मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। अब 30 सितंबर तक करीब 13 दिन का समय बचा है। इसके बाद मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू होगी।
हालांकि, हर साल मानसून पूरे प्रदेश से एक साथ विदा नहीं होता। कुछ जिलों से इसकी विदाई सितंबर के अंत में हो सकती है, जबकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में अक्टूबर के पहले सप्ताह तक भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
जून की कमी जुलाई-अगस्त ने संभाली, लेकिन आंकड़ा अभी भी कम
इस मानसून सीजन की शुरुआत में मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति कमजोर रही। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम पानी गिरा। इसके बाद जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई और आंकड़ों में सुधार आया।हालांकि, मानसून के दौरान दो बार ब्रेक की स्थिति भी बनी। कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। इसके बाद अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर में सक्रिय सिस्टम के कारण कई जिलों में अच्छी बारिश हुई। कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति भी बनी।
इसके बावजूद पूरे प्रदेश का बारिश आंकड़ा अभी सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम है। सितंबर के आखिरी दौर में होने वाली बारिश इस आंकड़े को और बेहतर कर सकती है।
आज और अगले कुछ दिनों में क्या?
भोपाल समेत प्रदेश के कई हिस्सों में फिलहाल उमस और बादलों की स्थिति बनी हुई है। राजधानी में अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री रहने का अनुमान है। अगले कुछ दिनों में तापमान में बहुत बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। हालांकि, स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण अलग-अलग जिलों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है।
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में मानसून अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगले कुछ दिन बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। खासकर 21 सितंबर के बाद बनने वाली मौसम प्रणालियां प्रदेश में मानसून के आखिरी दौर की तस्वीर तय कर सकती हैं।
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