'मध्य प्रदेश में मत्स्य उत्पादन दोगुना करेंगे', CM मोहन यादव बोले- अगले 3 सालों में उत्पादन 10 लाख टन पहुंचाना लक्ष्य
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल भी मौजूद रहे।
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MP News: मध्य प्रदेश में मछली पालन को बढ़ावा देने और इससे जुड़े लोगों की कमाई बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने नई एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 लागू की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस नीति के जरिए प्रदेश में मछली उत्पादन को जल्द से जल्द दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार अगले तीन साल में मत्स्य उत्पादन को मौजूदा 4.45 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन तक पहुंचाना चाहती है। इसके लिए निवेश, आधुनिक तकनीक और निर्यात पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार में आयोजित नेशनल फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल भी मौजूद रहे।
एक लाख केज कल्चर बनाने की तैयारी
नई नीति के तहत प्रदेश में एक लाख केज कल्चर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। केज कल्चर में जलाशयों के भीतर जाल के विशेष ढांचे बनाकर मछलियां पाली जाती हैं। इससे उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। रायसेन जिले के बारना जलाशय में निजी निवेश और सरकारी-निजी भागीदारी (PPP) से तैयार 500 केज कल्चर की शुरुआत भी की गई।
सरकार का कहना है कि प्रदेश के बड़े जलाशयों और अमृत सरोवरों को मत्स्य पालन के लिए विकसित किया जाएगा। वन क्षेत्रों में भी जल संरचनाएं बनाने की योजना है, जिससे वन्य जीवों को पानी मिलेगा और मत्स्य पालन को भी बढ़ावा मिल सकेगा।
मछली से लेकर पैकेजिंग तक बढ़ेगा कारोबार
मुख्यमंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन को फूड प्रोसेसिंग और एमएसएमई उद्योग से जोड़ा जाएगा। इससे मछली उत्पादन के बाद उसकी सफाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, मार्केटिंग और निर्यात जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। निवेशकों को जमीन, तकनीकी मदद और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी योजना है।
सरकार ने मत्स्य उद्योग में हर साल करीब 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश बढ़ाने और 50 हजार रोजगार के अवसर तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इससे मछली पालकों, विक्रेताओं, परिवहनकर्ताओं और प्रसंस्करण से जुड़े लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सिंचाई और जल संरक्षण पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर 69 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। केन-बेतवा लिंक और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजनाओं से भी जल संसाधनों के विकास को गति मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है। वहीं, राज्य सरकार का मानना है कि मध्यप्रदेश के पास मौजूद नदियों और बड़े जलाशयों की मदद से प्रदेश को मत्स्य पालन और निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है। नई नीति का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ मछुआरों की आय और रोजगार के अवसरों में सुधार करना भी है।
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