बेटे की मौत के बाद पिता कोमा में गए, 4 साल बाद कोर्ट ने 2.25 करोड़ का मुआवजा दिलाया; सड़क हादसे में हुई थी मौत
करीब 4 साल चली सुनवाई के बाद इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 28 सितंबर को दोनों मामलों में कुल 1.76 करोड़ रुपये का मूल मुआवजा तय किया। इस पर 9 सितंबर 2022 से भुगतान की तारीख तक 6% सालाना ब्याज भी देना होगा।
MP News: देवास जिले के चापड़ा-अमरपुरा के पास 4 साल पहले हुए सड़क हादसे ने गर्ग परिवार की जिंदगी बदल दी। हादसे में परिवार के इकलौते बेटे पीयूष गर्ग की मौत हो गई, जबकि उनके पिता सुरेश चंद्र गर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। लंबे समय तक कोमा में रहने के बाद उनकी मानसिक स्थिति ऐसी हो गई कि अब वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। जिसके बाद कोर्ट पीड़ित परिवार को ब्जाज समेत कुल 2.25 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया।
पिता बेटे के साथ कार में इंदौर आ रहे थे
मामला 13 मार्च 2022 है। पीयूष और उनके पिता कार से इंदौर आ रहे थे। चापड़ा-अमरपुरा के पास तेज रफ्तार डंपर ने उनकी कार को टक्कर मार दी। हादसे में पीयूष को गंभीर चोटें आईं। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सुरेश चंद्र को भी सिर समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उन्हें इलाज के लिए इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वे अलग-अलग अवधि में लंबे समय तक अस्पताल में रहे। इस दौरान वे कोमा में रहे। हादसे के बाद सुरेश चंद्र की कार्यक्षमता पर गंभीर असर पड़ा। कोर्ट में पेश रिकॉर्ड के अनुसार, कोमा से बाहर आने के बाद वे अपनी सुध-बुध खो बैठे और अब उन्हें दिनभर देखभाल की जरूरत रहती है।
कोर्ट ने 1.76 करोड़ का मुआवजा तय किया
करीब 4 साल चली सुनवाई के बाद इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 28 सितंबर को दोनों मामलों में कुल 1.76 करोड़ रुपये का मूल मुआवजा तय किया। इस पर 9 सितंबर 2022 से भुगतान की तारीख तक 6% सालाना ब्याज भी देना होगा। ब्याज सहित यह राशि करीब 2.25 करोड़ रुपये हो जाती है।
सुरेश चंद्र के मामले में कोर्ट ने 95.51 लाख रुपये का मुआवजा तय किया है। इसमें स्थायी आय में कमी के 58.87 लाख, मेडिकल खर्च के 11.63 लाख, भविष्य की आय के लिए 8.83 लाख, शुरुआती अटेंडेंट खर्च के 1.68 लाख और बाद की अवधि के अटेंडेंट खर्च के 12.48 लाख रुपये शामिल हैं। इसके अलावा दर्द, पौष्टिक आहार और परिवहन आदि के लिए भी राशि तय की गई है।
बेटे के परिवार को 80.71 लाख रुपये
पीयूष हादसे के समय युवा थे और व्यवसाय करते थे। कोर्ट ने उनकी आय तय करने के बाद भविष्य की आय को ध्यान में रखते हुए 40% फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट भी जोड़ा। उनके आश्रित परिवार के लिए 80.71 लाख रुपये मुआवजा तय किया गया है।
पीयूष के परिवार में पत्नी कनुप्रिया, 10 साल का बेटा मान्य, 5 साल की बेटी भूमिक और मां मधु (58) हैं। पीयूष परिवार के इकलौते बेटे थे। उनकी मौत के बाद परिवार ने मुआवजे के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बीमा कंपनी की आपत्ति भी खारिज
मामले में बीमा कंपनी ने डंपर के फिटनेस प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति उठाई थी। रिकॉर्ड के अनुसार हादसे की तारीख पर वाहन का वैध और प्रभावी फिटनेस प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था। हालांकि, कोर्ट ने बीमा पॉलिसी की शर्तों और संबंधित न्यायिक फैसलों का परीक्षण करने के बाद बीमा कंपनी को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त करने से इनकार कर दिया।
डंपर चालक की लापरवाही से हुआ हादसा
कोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिकॉर्ड समेत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि डंपर चालक ने वाहन तेज और लापरवाही से चलाते हुए कार को टक्कर मारी थी। वाहन चालक की ओर से इन साक्ष्यों का प्रभावी खंडन नहीं किया गया।
मामले में डंपर मालिक श्रीकांत मीणा, ड्राइवर सुभाषचंद्र जाट और बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस लिमिटेड के खिलाफ मुआवजे की मांग की गई थी।
‘हादसे के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया’
पीयूष की पत्नी कनुप्रिया ने बताया कि हादसे के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया। उनके पति नहीं रहे और ससुर की हालत ऐसी है कि उन्हें हर समय किसी न किसी की देखभाल की जरूरत रहती है। बच्चों पर भी हादसे का गहरा असर पड़ा है।
सुरेश चंद्र की ओर से उनकी बेटी सानिया मोदी ने मुआवजे के लिए अपील की थी। पीड़ित पक्ष के एडवोकेट गोविंद आर. मीणा के अनुसार, दोनों मामले एक ही हादसे से जुड़े थे, इसलिए कोर्ट में इनकी सुनवाई साथ हुई। कोर्ट ने मुआवजे की राशि एक महीने में भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।




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