बालाघाट में ₹400 करोड़ का विकास कार्य करेगी मोहन सरकार, करीब 1,500 कामों पर होगा खर्च
बालाघाट के किरनापुर, बिरसा, लांजी, बैहर और परसवाड़ा में करीब 1,500 विकास कार्यों पर 400 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर फोकस रहेगा।
Balaghat Development Plan: बालाघाट के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कुपोषण और बीमारियों से बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना बनाई है। बालाघाट जिले के पांच विकासखंडों किरनापुर, बिरसा, लांजी, बैहर और परसवाड़ा में करीब 1,500 विकास कार्यों पर एक साल में लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र, पुलिया, स्टॉप डैम और सामुदायिक भवन सहित कई निर्माण कार्य किए जाएंगे।
मुख्य सचिव कर रहे निगरानी
मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने योजना को सैद्धांतिक सहमति दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव इसकी निगरानी कर रहे हैं। वहीं, जनजातीय विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। योजना को जमीन पर उतारने के लिए 13 विभाग मिलकर काम करेंगे।
सड़क और सीसी रोड पर खर्च होंगे 269 करोड़
योजना में सबसे ज्यादा राशि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के जरिए खर्च होगी। पांचों ब्लॉक में 151 सड़क और सीसी रोड के काम किए जाएंगे, जिन पर 268.94 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके अलावा 69 पुलिया और कल्वर्ट के लिए 34.02 करोड़ तथा 60 स्टॉप डैम के लिए 35.97 करोड़ रुपए का प्रावधान है।
20 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों का होगा निर्माण
आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 20 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपस्वास्थ्य केंद्रों के भवन भी तैयार किए जाएंगे। स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सोलर पैनल लगाने की भी योजना है।
जिन गांवों में बच्चों की मौत, वहां विशेष ध्यान
जिले के डोंगरगांव, बोंदारी, कोंडेकसा, मछरदा, मातला और कोरका जैसे बैगा-गोंड बहुल गांवों में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। अब इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
PHE को पेयजल की जिम्मेदारी
पांचों विकासखंडों में पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को दी गई है। किरनापुर और लांजी में नल-जल योजना का काम पूरा हो चुका है। जिन गांवों में नल-जल योजना के निर्धारित मापदंड पूरे नहीं होते, वहां पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।



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