80 हजार वाला कैंसर का इंजेक्शन 7 हजार में मिलेगा, SC की फटकार के बाद 543 दवाओं के दाम घटे
इन दवाओं में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी की कुछ दवाएं, बेवाकिजुमैब और डेनोसुमैब जैसी दवाएं भी शामिल हैं। सरकार के मुताबिक इस कदम से मरीजों के इलाज का खर्च कम करने और जरूरी दवाओं तक उनकी पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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Cancer Medicine Price Reduces: कैंसर के इलाज पर होने वाला भारी खर्च मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। इसी बीच केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं की कीमतें कम करने का फैसला किया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 543 ब्रांडों की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) की सूची जारी की है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। कुछ दवाओं की कीमत में 85 फीसदी से ज्यादा, जबकि चुनिंदा ब्रांडों में 90 फीसदी से भी अधिक की कमी हुई है।
इस फैसले से उन मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें लंबे समय तक महंगी दवाओं और इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। हालांकि, सभी कैंसर दवाओं के दाम एक समान नहीं घटाए गए हैं। कीमत में कमी दवा के ब्रांड, उसकी मात्रा और पैक के हिसाब से अलग-अलग है।
80 की जगह 7 हजार में मिलेगा इंजेक्शन
थियोटेपा के सैमटेपा ब्रांड के 100 मिलीग्राम इंजेक्शन की कीमत 80,071 रुपये से घटाकर 7,150 रुपये कर दी गई है। यानी एक वायल पर करीब 72,922 रुपये की कमी हुई है।
इसी तरह पाल्बोसिक्लिब के पाल्बोप्रो ब्रांड के 125 मिलीग्राम वाले 21 कैप्सूल के पैक की कीमत 40,421 रुपये से घटाकर 2,720 रुपये कर दी गई है। इस पैक पर मरीज को करीब 37,701 रुपये की बचत हो सकती है। बेवाकिजुमैब के कुछ इंजेक्शन भी पहले के मुकाबले काफी सस्ते हुए हैं। उदाहरण के तौर पर, बेवाकिजैब के 100 मिलीग्राम वाले एक वायल की कीमत 21,767 रुपये से घटाकर 5,930 रुपये कर दी गई है। वहीं, 400 मिलीग्राम वाले एक अन्य पैक की कीमत 65,205 रुपये से कम होकर 8,956 रुपये रह गई है।
सरकार ने क्यों घटाए दवाओं के दाम?
दवाओं की कीमतें कम करने के पीछे मुख्य उद्देश्य उनके वितरण और बिक्री के दौरान लिए जाने वाले ज्यादा ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करना है। सरकार ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने की व्यवस्था की है।
इन दवाओं में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी की कुछ दवाएं, बेवाकिजुमैब और डेनोसुमैब जैसी दवाएं भी शामिल हैं। सरकार के मुताबिक इस कदम से मरीजों के इलाज का खर्च कम करने और जरूरी दवाओं तक उनकी पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
9 नवंबर से मिलेंगी नई कीमतें
NPPA की ओर से जारी सूची में दवाओं के पुराने और नए अधिकतम खुदरा दाम दिए गए हैं। दवा कंपनियों, वितरकों, मेडिकल स्टोर और अस्पतालों को नई कीमतों के अनुसार व्यवस्था करनी होगी। अस्पतालों को भी संशोधित कीमतों का पालन करना होगा।
मरीज दवाओं की नई कीमतों की जानकारी NPPA की वेबसाइट और Pharma Sahi Daam ऐप पर देख सकते हैं। दवा खरीदते समय बिल पर दर्ज कीमत और पैक पर लिखी MRP की जांच करना भी जरूरी है। हालांकि, मरीजों को ध्यान रखना चाहिए कि यह बदलाव हर कैंसर दवा पर लागू नहीं है।
कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी राहत
कुछ दवाओं और ब्रांडों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए इलाज करा रहे मरीज अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेते रहें और केवल कीमत कम होने के कारण दवा या ब्रांड में खुद से बदलाव न करें।
कैंसर की कुछ महंगी दवाओं की कीमतों में बड़ी कमी मरीजों के लिए राहत भरा कदम है। इसका वास्तविक फायदा नई कीमतें लागू होने के बाद दवा की उपलब्धता और अस्पतालों व मेडिकल स्टोरों में नियमों के पालन पर निर्भर करेगा।
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