शाजापुर में 2 हजार कृष्णमृगों का होगा रेस्क्यू, CM मोहन यादव ने हेलीकॉप्टर से लिया जायजा
शाजापुर में CM मोहन यादव ने कृष्णमृग और नीलगाय रेस्क्यू अभियान का जायजा लिया। 31 अक्टूबर तक 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में पहुंचाने का लक्ष्य है।

शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने और वन्यजीवों को सुरक्षित ठिकाना देने के लिए कृष्णमृग और नीलगाय रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान के दूसरे चरण का निरीक्षण किया। उन्होंने रंथभंवर पहुंचकर हेलीकॉप्टर से अभियान की प्रगति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस अभियान के तहत 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
अब तक 1,236 से ज्यादा कृष्णमृग और नीलगाय रेस्क्यू
मुख्यमंत्री ने बताया कि शाजापुर जिले में अब तक 1,236 से अधिक कृष्णमृगों और नीलगायों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। इन्हें श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट सहित तय वन क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।
वन्यजीवों को सुरक्षित ले जाने के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। परिवहन के दौरान पशु चिकित्सक, जरूरी उपकरण और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि जानवरों की सेहत पर नजर रखी जा सके।
किसानों की फसल बचाने के लिए शुरू हुआ अभियान
शाजापुर में कृष्णमृग और नीलगायों के कारण किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की समस्या को देखते हुए पिछले साल यह पहल शुरू की गई थी। इसका मकसद वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाए बिना ऐसे क्षेत्रों में भेजना है, जहां उनके रहने के लिए अनुकूल वातावरण हो।
रेस्क्यू के लिए दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम की मदद ली जा रही है। वन विभाग बोमा पद्धति से जानवरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ता है। इसमें खास रास्तों और घेरों की मदद से वन्यजीवों को एक जगह लाया जाता है और फिर सावधानी से ट्रकों के जरिए दूसरे क्षेत्र में पहुंचाया जाता है।
CM ने अधिकारियों से ली जानकारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन विभाग और प्रशासन के अधिकारियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान से बोमा पद्धति के जरिए किए जा रहे रेस्क्यू कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जानवरों को चोट से बचाने और उनके तनाव को कम रखने पर ध्यान देने की बात कही।
दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास
CM मोहन यादव ने इस अभियान को दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इससे वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने अभियान में जुटे वन विभाग और प्रशासन की टीम के प्रयासों की सराहना की।
31 अक्टूबर तक चलेगा रेस्क्यू अभियान
यह अभियान 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा गया है। निरीक्षण के दौरान शाजापुर विधायक अरुण भीमावद, कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी और वन विभाग सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


