सागर में 10 करोड़ की सड़क बनाई, फिर पत्थर से सरिया ठोक डाली; सागर में वीडियो वायरल होने पर PWD ने दी सफाई
सड़क को बनाने में व्हाइट टॉपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें पुरानी सड़क के ऊपर सीमेंट कंक्रीट की परत तैयार की जाती है। इसका उद्देश्य सड़क को मजबूत बनाना और बार-बार मरम्मत की जरूरत कम करना है। परियोजना पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
MP News: मध्य प्रदेश के सागर में सड़क निर्माण से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। सिविल लाइन से मकरोनिया तक करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क पर एक व्यक्ति पत्थर की
मदद से लोहे का सरिया लगाता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सड़क निर्माण के तरीके और उसकी मजबूती को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी ने इसे तकनीकी प्रक्रिया से जुड़ा काम बताते हुए किसी गड़बड़ी से इनकार किया है।
व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनाई जा रही सड़क
सागर शहर में सिविल लाइन से मकरोनिया तक का रास्ता काफी व्यस्त माना जाता है। इस मार्ग से रोजाना 5 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। इसी कारण सड़क का टिकाऊ होना और निर्माण के दौरान तकनीकी नियमों का पालन करना जरूरी है। इस
सड़क को बनाने में व्हाइट टॉपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें पुरानी सड़क के ऊपर सीमेंट कंक्रीट की परत तैयार की जाती है। इसका उद्देश्य सड़क को मजबूत बनाना और बार-बार मरम्मत की जरूरत कम करना है। परियोजना पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
वीडियो में क्या दिखाई दिया?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति तैयार सड़क के हिस्से में पत्थर से लोहे का सरिया ठोकता नजर आ रहा है। इसी दृश्य के कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। लोगों के बीच यह चर्चा होने लगी कि क्या सड़क बनने के
बाद सरिया लगाया जाना सही प्रक्रिया है। हालांकि, केवल वीडियो देखकर निर्माण में गड़बड़ी होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए मौके की तकनीकी जांच, निर्माण के रिकॉर्ड और संबंधित इंजीनियरों की रिपोर्ट जरूरी होगी।
PWD अधिकारी ने दी सफाई
लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री साहित्य तिवारी के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहा सरिया टाइ बार है। इसका इस्तेमाल सड़क के दो हिस्सों को आपस में जोड़ने और उनके बीच संपर्क बनाए रखने के लिए किया जाता है।
अधिकारी ने कहा कि सड़क का निर्माण इंजीनियरों की निगरानी में निर्धारित मानकों के अनुसार कराया जा रहा है। उनके अनुसार, संभव है कि किसी स्थान पर सरिया बाहर रह गया हो और उसे सही जगह लगाने का काम किया जा रहा हो। विभाग ने निर्माण में किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।
विधायक ने भी निर्माण को बताया सही
नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने भी सड़क निर्माण में किसी तरह की अनियमितता होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सड़क को तय मानकों के मुताबिक बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, पहले इस मार्ग पर डामर की सड़क थी, जिसकी समय-समय
पर मरम्मत करनी पड़ती थी। नई तकनीक से बनी सड़क से मजबूती बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, सेवानिवृत्त इंजीनियर दिनकर तिवारी के अनुसार, टाइबार का इस्तेमाल सड़क के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के लिए किया जाता है। इन्हें निर्माण के दौरान सही तरीके से लगाना महत्वपूर्ण होता है। तैयार सड़क में बाद में सरिया लगाने की स्थिति में तकनीकी पहलुओं की जांच की जरूरत हो सकती है।
जांच से साफ होगी निर्माण की स्थिति
फिलहाल वायरल वीडियो के कारण सड़क निर्माण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि विभाग और स्थानीय विधायक ने काम को सही बताया है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए तकनीकी निरीक्षण महत्वपूर्ण होगा। सड़क
की मजबूती और लंबे समय तक उसके टिके रहने का पता निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, जोड़ बनाने के तरीके और निर्धारित मानकों के पालन से चलता है। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कोई अलग जांच कराता है या नहीं।



