बिना पेट्रोल के चलेंगी गाड़ियां! 100 परसेंट वाले इथेनॉल फ्यूल को मंजूरी; सरकार बोली- क्रूड ऑयल का इंपोर्ट कम होगा
इथेनॉल एक तरह का जैव ईंधन है, जिसे गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है। इसे पेट्रोल के साथ मिलाकर गाड़ियों में इस्तेमाल किया जाता है। दोनों फ्यूल में इथेनॉल की मात्रा के आधार पर उनका नाम तय होता है
E100 Flex Fuel Vehicles: सरकार ने देश में इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 23 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के जरिए सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में बदलाव किए हैं। 26 अक्टूबर को सामने आई इस व्यवस्था में E85 के साथ E100 फ्यूल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी शामिल किया गया है। इससे वाहन कंपनियों के लिए ऐसे वाहनों की जांच, प्रमाणन और निर्माण का नियामकीय रास्ता स्पष्ट होगा।
इस बदलाव का असर भविष्य में कार खरीदने वालों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब हर पेट्रोल कार में इथेनॉल वाला नया फ्यूल इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए गाड़ी का इंजन और फ्यूल सिस्टम उसी हिसाब से तैयार होना जरूरी है।
क्या आपकी मौजूदा पेट्रोल कार में E100 डल सकेगा?
इसका जवाब नहीं है। जब तक आपकी गाड़ी को इस फ्यूल के इस्तेमाल के लिए खास तौर पर तैयार और प्रमाणित नहीं किया गया हो। सामान्य पेट्रोल कारों और E20 के लिए बनी गाड़ियों के इंजन, फ्यूल पाइप, सील और दूसरे हिस्से ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल के अनुकूल जरूरी नहीं होते। ऐसे में E85 या E100 इस्तेमाल करने से इंजन के प्रदर्शन और फ्यूल सिस्टम में परेशानी आ सकती है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFV) अलग तकनीक पर काम करते हैं। इन्हें इथेनॉल और पेट्रोल के अलग-अलग मिश्रण के अनुसार चलने के लिए डिजाइन किया जाता है। इसलिए गाड़ी खरीदते समय केवल फ्यूल की कीमत नहीं, बल्कि कंपनी की ओर से बताई गई फ्यूल-कम्पैटिबिलिटी भी देखनी होगी।
सरकार ने क्यों बदले नियम?
भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर बनने वाले इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे किसानों और इथेनॉल बनाने वाले उद्योगों को भी फायदा मिलने की संभावना है।
सरकार का यह कदम वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की व्यापक योजना का हिस्सा है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां ऐसी गाड़ियां कब और कितनी संख्या में बाजार में उतारती हैं और उनके लिए इथेनॉल की उपलब्धता कैसी रहती है।
क्या है E85 और E100 फ्यूल?
इथेनॉल एक तरह का जैव ईंधन है, जिसे गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है। इसे पेट्रोल के साथ मिलाकर गाड़ियों में इस्तेमाल किया जाता है। दोनों फ्यूल में इथेनॉल की मात्रा के आधार पर उनका नाम तय होता है।
E20: इसमें 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है।
E85: इसमें लगभग 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है।
E100: इसमें लगभग 100% इथेनॉल होता है।
भारत में E20 पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा है। अब E85 और E100 के लिए नियमों में जगह मिलने से ज्यादा इथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देने की तैयारी है।
फ्लेक्स-फ्यूल कारों की शुरुआत
भारत में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम आगे बढ़ रहा है। मारुति सुजुकी ने Wagon R Flex Fuel मॉडल पेश किया है, जिसे E20 से E100 तक के इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलाने के लिए तैयार किया गया है। यह तकनीक दिखाती है कि भविष्य में एक ही वाहन अलग-अलग अनुपात वाले फ्यूल पर चल सकता है। हालांकि, किसी मॉडल की उपलब्धता और उसमें इस्तेमाल किए जा सकने वाले फ्यूल की जानकारी कंपनी के आधिकारिक विवरण से जांचनी चाहिए।
गाड़ी खरीदने वालों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
नए नियमों से E100 फ्यूल के इस्तेमाल की दिशा में रास्ता जरूर खुला है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पेट्रोल पंप पर सभी गाड़ियों के लिए नया विकल्प तुरंत उपलब्ध हो जाएगा। इसके लिए फ्यूल की सप्लाई, पेट्रोल पंपों पर जरूरी व्यवस्था और वाहन कंपनियों की तैयारी भी अहम होगी।
फिलहाल, मौजूदा कार मालिक अपनी गाड़ी में वही फ्यूल इस्तेमाल करें, जिसकी अनुमति वाहन निर्माता ने दी है। केवल कम कीमत के कारण E85 या E100 को सामान्य पेट्रोल कार में भरवाना सही नहीं होगा। कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला भारत में वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली गाड़ियों के विकास के लिए अहम है। आने वाले समय में फ्लेक्स-फ्यूल कारों के विकल्प बढ़ सकते हैं, लेकिन आम ग्राहकों को इसका सीधा फायदा कब मिलेगा, यह बाजार में नए मॉडल और फ्यूल नेटवर्क के विस्तार पर निर्भर करेगा
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