भोपाल मास्टर प्लान पर 5 हजार आपत्तियां, छंटनी के लिए 15 दिन; त्योहारों के बीच डेडलाइन की टेंशन!
मास्टर प्लान पर मिली आपत्तियों में करीब 60 प्रतिशत कैचमेंट क्षेत्र से जुड़ी हैं। किसानों ने जमीन के नियमों में भेदभाव होने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
Bhopal Master Plan: भोपाल में शहर के भविष्य की योजना यानी मास्टर प्लान-2047 को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। नगर और ग्राम निवेश विभाग की ओर से जारी ड्राफ्ट पर बड़ी संख्या में किसान, रहवासी और अन्य लोग सवाल उठा रहे हैं। विरोध की मुख्य वजह जमीन के उपयोग में प्रस्तावित बदलाव, बड़े तालाब के आसपास के क्षेत्र और आवासीय इलाकों में निर्माण से जुड़े नियम हैं। दूसरी ओर, आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मास्टर प्लान को लेकर पांच हजार से ज्यादा आपत्तियां मिलने की बात कही गई हैं।
बड़े तालाब के आसपास की जमीन पर सबसे ज्यादा आपत्ति
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया और भोजताल संरक्षण जोन से जुड़े प्रस्तावों का विरोध सबसे ज्यादा हो रहा है। किसानों को आशंका है कि जमीन के उपयोग में बदलाव से उनकी खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है। वे चाहते हैं कि कृषि भूमि का इस्तेमाल खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। मास्टर प्लान पर मिली आपत्तियों में करीब 60 प्रतिशत कैचमेंट क्षेत्र से जुड़ी हैं। किसानों ने जमीन के नियमों में भेदभाव होने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रहवासियों को निर्माण और ट्रैफिक की चिंता
विरोध केवल किसानों तक सीमित नहीं है। कई कॉलोनियों के रहवासियों ने भी ड्राफ्ट में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और प्रस्तावित सड़कों की चौड़ाई व दिशा से जुड़े नियमों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने बड़े तालाब के कैचमेंट, हरित क्षेत्रों और बाघों की आवाजाही वाले इलाकों में निर्माण से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। समिति की मांग है कि विकास की योजना बनाते समय पर्यावरण, ट्रैफिक, पार्किंग और स्थानीय लोगों की जरूरतों का ध्यान रखा जाए।
छुट्टियों में फंसी आपत्तियों की आखिरी तारीख
मास्टर प्लान का प्रारूप सितंबर 2026 में प्रकाशित किया गया था। आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए 24 अक्टूबर की समय-सीमा बताई गई है। लगातार छुट्टियों के कारण लोगों को आवेदन जमा करने में परेशानी होने की आशंका जताई गई है।
पर्यावरणविद राशिद नूर खान, क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने समय-सीमा को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। इनकी मांग है कि यदि तय तारीख पर कार्यालय बंद रहता है, तो आपत्तियां 27 अक्टूबर तक स्वीकार की जाएं।
अब आपत्तियों की जांच के बाद होगी आगे की प्रक्रिया
आपत्तियां मिलने के बाद विभाग को अलग-अलग मुद्दों के आधार पर उनका अध्ययन करना होगा। इसके बाद सुनवाई का कार्यक्रम तय किया जाएगा। जिन लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं, उन्हें अपने सुझावों के समर्थन में दस्तावेज और संबंधित जानकारी रखने का मौका मिल सकता है।
आपत्तियों के बाद मास्टर प्लान के किन प्रस्तावों में बदलाव किया जाएगा। अंतिम निर्णय से ही स्पष्ट होगा कि किसानों, रहवासियों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है।
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