Parliament Special Session : नई दिल्ली। महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर संसद में सियासी हलचल तेज हो गई है। लोकसभा में आज से इस अहम मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज दोपहर करीब 3 बजे सदन में इस बिल पर अपनी बात रख सकते हैं, जबकि चर्चा का जवाब गृह मंत्री अमित शाह देंगे।
18 घंटे की चर्चा के बाद होगी वोटिंग
लोकसभा में इस विधेयक पर 16 और 17 अप्रैल को कुल 18 घंटे चर्चा का समय तय किया गया है, जिसके बाद 17 अप्रैल को शाम 4 बजे वोटिंग कराई जाएगी। इसके बाद 18 अप्रैल को राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा और मतदान होगा, जहां 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
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207 सांसदों ने किया समर्थन
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश कर दिया गया है. विधेयक को पेश करने के दौरान हुई वोटिंग में 207 सांसदों ने बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि 126 सांसदों ने इसका विरोध किया। बहुमत मिलने के साथ ही सरकार विधेयक को सदन में पेश कराने में सफल रही। अब आगे इस पर विस्तृत चर्चा और पारित कराने की प्रक्रिया होगी।
क्या है बिल में प्रस्ताव
सरकार का यह विधेयक महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा है। इसके साथ ही सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
संशोधित प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 की जा सकती हैं, जिसमें 815 सीटें राज्यों और 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इनमें से करीब 272 से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम
चर्चा की शुरुआत करते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल (Arjun Ram Meghwal) ने कहा कि संविधान संसद को संशोधन का अधिकार देता है और यह विधेयक महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन और महिला आरक्षण से किसी भी राज्य की मौजूदा सीटों या राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कटौती नहीं होगी।
विपक्ष के सवाल और आपत्ति
वहीं विपक्ष ने इन विधेयकों का विरोध करते हुए सरकार पर जल्दबाजी और राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई दलों ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है।
सपा नेता अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने जनगणना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले जनगणना कराई जानी चाहिए, उसके बाद ही आरक्षण लागू किया जाए।
जाति जनगणना और आरक्षण पर सरकार का जवाब
इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि जनगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके साथ जाति आधारित गणना भी कराई जाएगी। उन्होंने साफ किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और इस तरह की मांगों का कोई आधार नहीं है।
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राज्यसभा में शपथ और कार्यवाही स्थगित
इस बीच, संसद के विशेष सत्र के दौरान राज्यसभा में 16 नव-निर्वाचित सांसदों ने शपथ भी ली। इनमें अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi) समेत कई नेता शामिल रहे। शपथ ग्रहण के बाद सदन की कार्यवाही को अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
अब सबकी नजर वोटिंग और पीएम के संबोधन पर
महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) को लेकर संसद में सियासी माहौल गर्म है। सत्ता पक्ष इसे ऐतिहासिक और महिलाओं के लिए बड़ा अवसर बता रहा है, जबकि विपक्ष इसके कुछ प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है।
अब सभी की नजरें 17 अप्रैल को होने वाली वोटिंग और प्रधानमंत्री के संभावित संबोधन पर टिकी हुई हैं, जो इस बहस की दिशा तय कर सकता है।
इन तीन बिलों पर लोकसभा में चर्चा
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: लोकसभा सीटें 850 करने का प्रस्ताव है। राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेश से 35 सीटें हो सकती हैं।
परिसीमन (संशोधन) विधेयक, 2026: परिसीमन के लिए ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में बदलाव किया जाएगा। ताकि 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाए।
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026: यह विधेयक पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन करता है, ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण बिल लागू हो सकें।
