हाइलाइट्स
- 25 मई से पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ।
- दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंचा।
- ईंधन महंगा होने से फल, सब्जियां और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंचा।
Diesel and Petrol Price Hike : नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने 25 मई से पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू कर दी है। नई कीमतें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। अब इसका असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखाई देगा। बाजार में महंगाई बढ़ने की संभावना तेज हो गई है और आने वाले दिनों में कई जरूरी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।
महानगरों में पेट्रोल की नई कीमतें (रुपये/लीटर):
दिल्ली
नया दाम: ₹102.12
बढ़ोतरी: +2.61
कोलकाता
नया दाम: ₹113.51
बढ़ोतरी: +2.87
मुंबई
नया दाम: ₹111.21
बढ़ोतरी: +2.72
चेन्नई
नया दाम: ₹107.77
बढ़ोतरी: +2.46
डीजल कीमतें (रुपये/लीटर):
दिल्ली
नया दाम: ₹95.20
बढ़ोतरी: +2.71
कोलकाता
नया दाम: ₹99.82
बढ़ोतरी: +2.80
मुंबई
नया दाम: ₹97.83
बढ़ोतरी: +2.81
चेन्नई
नया दाम: ₹99.55
बढ़ोतरी: +2.57
भोपाल में बढी हुई कीमतें-
पेट्रोल – 114.56
पॉवर पेट्रोल – 124.31
डीजल – 99.66
महंगे हो सकते हैं फल और सब्जियां
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर देखने को मिलेगा। ट्रक, टेम्पो और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ सकता है। इससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, दूध और राशन जैसी जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं।
व्यापारी बढ़े हुए ट्रांसपोर्ट खर्च का बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं की लागत भी बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन के दाम लंबे समय तक ऊंचे रहे तो बाजार में महंगाई और तेजी से बढ़ सकती है।
खेती की लागत बढ़ने से किसानों पर बढ़ेगा दबाव
डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर किसानों पर भी पड़ेगा। खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पंपिंग सेट डीजल से चलते हैं। ऐसे में किसानों को खेती के लिए ज्यादा खर्च करना होगा। सिंचाई, जुताई और फसल कटाई की लागत बढ़ने से अनाज और सब्जियों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
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बस और ऑटो किराए में बढ़ोतरी की संभावना
ईंधन महंगा होने के बाद सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। बस, ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए परिचालन खर्च बढ़ जाएगा। कई राज्यों में स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
रोजाना सफर करने वाले लोगों का मासिक बजट इससे प्रभावित होगा। निजी वाहन चलाने वालों को भी अब ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। शहरों में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों पर इसका सीधा आर्थिक असर दिखाई दे सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका विवाद के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
पहले जहां कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का सीधा असर देश के ईंधन दामों पर पड़ता है।
कैसे तय होती हैं पेट्रोल और डीजल की कीमतें
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई स्तरों से गुजरने के बाद तय होती हैं। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदा जाता है। इसके बाद रिफाइनिंग की लागत, कंपनियों का मार्जिन और ट्रांसपोर्ट खर्च जोड़ा जाता है। फिर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है। इसके बाद डीलर कमीशन जुड़ता है और आखिर में राज्य सरकारें वैट लगाती हैं।
अलग-अलग राज्यों में वैट की दर अलग होने के कारण शहरों में ईंधन के दाम भी अलग होते हैं। यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग दिखाई देती हैं।
2024 के बाद पहली बार बढ़े ईंधन के दाम
मार्च 2024 के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने जनता को राहत देने के लिए ईंधन पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। उस समय सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में भी कमी की थी ताकि महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था। इसी कारण कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है।
तेल कंपनियों को हो रहा था भारी नुकसान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था।
बढ़ते घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने ईंधन की कीमतें बढ़ाने का निर्णय लिया। अगर आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो पेट्रोल और डीजल के दाम में फिर इजाफा हो सकता है।
पीएम मोदी ने ईंधन बचाने की अपील की थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेलंगाना के एक कार्यक्रम में लोगों से पेट्रोल और डीजल का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के पास तेल के बड़े भंडार नहीं हैं और देश को अपनी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में लोगों को ईंधन की बचत करनी चाहिए। पीएम ने यह भी कहा था कि वैश्विक हालात को देखते हुए आने वाले समय में ऊर्जा संसाधनों का समझदारी से उपयोग करना जरूरी होगा।