MP हाईकोर्ट का फैसला: TET छूट की मांग पर अफसरों को सख्त निर्देश
मध्य प्रदेश में शिक्षाकर्मियों की TET छूट पर हाईकोर्ट ने 60 दिनों में फैसला लेने को कहा है। वर्ग-2 और 3 के पुराने कर्मियों को अब भी पक्की राहत का इंतजार है।

मध्य प्रदेश के पुराने शिक्षाकर्मियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET से राहत देने वाले मामले में अब एक नया मोड़ सा आ गया है, और हाईकोर्ट ने राज्य शासन से साफ कहा है कि इस पर एक तय समय के अंदर अपना अंतिम निर्णय ले लें । कोर्ट का कहना था कि 2001 से पहले नौकरी पकड़ने वाले वर्ग-2 और वर्ग-3 के जो भी पेंडिंग आवेदन पड़े हैं उन पर 60 दिनों के भीतर कुछ न कुछ प्रक्रिया शुरू कर दी जाए । हालांकि फिलहाल , पक्की राहत… जैसी कि लोग समझ रहे हैं, वैसी अभी तय नहीं हुई है।
जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने सुनाया आदेश
जानकारी के मुताबिक ये आदेश 12 अक्टूबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जारी किया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने ये बात भी कही कि जो भी सक्षम अधिकारी हैं वे संबंधित कर्मियों की अर्जियों पर कानून के दायरे में रहकर ही विचार करें । साथ ही अदालत ने कहा कि जो भी फैसला होगा उसके पीछे का कारण लिखित रूप में दिया जाए, ताकि याचिका दायर करने वाले लोगों को ठीक से पता चल सके ।
अनिल तोमर समेत कई लोगों ने लगाई गुहार
आपको बता दें कि अनिल कुमार तोमर और उनके साथियों ने कोर्ट में ये गुहार रखी थी। उनकी मांग ये थी कि 3 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त हुए शिक्षाकर्मी वर्ग-2 और वर्ग-3 को TET पास करने की शर्त से बाहर किया जाए । इसी याचिका में 1997 से 1999 के बीच भर्ती हुए लोगों का भी जिक्र था । साथ ही पुरानी अदालती मिसालों का सहारा लेते हुए कहा गया कि प्रमोशन के वक्त भी इस परीक्षा से छूट दी जाए।
सर्टिफाइड कॉपी मिलने के बाद शुरू होगी उल्टी गिनती
सुनवाई दौरान वकीलों का कहना था कि अधिकारियों के पास पहले से ही इस संबंध में कागज जमा हैं, पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी वजह से कोर्ट से एक समय-सीमा तय करने की मांग की गई। सरकारी पक्ष ने भी 60 दिनों वाली शर्त पर कोई खास आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट की प्रमाणित कॉपी जब भी मिलती है, उसके बाद वहां से दो महीने का टाइम गिना जाएगा।
फिलहाल पूरी तरह छूट नहीं दी गई है
सबसे बड़ी बात यही है कि इस फैसले का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि सभी मास्टरों को TET से पूरी तरह आजादी मिल गई । अदालत ने मुख्य रूप से इतना दबाव बनाया है कि पेंडिंग फाइलों पर कार्रवाई हो। अब देखना होगा कि संबंधित अफसर, इन मांगों को मानते हैं या फिर खारिज कर देते हैं। इसी आदेश के साथ कोर्ट ने इस केस को आगे के लिए बंद कर दिया है।

