Wheat Procurement Slot Booking Date : भोपाल। मध्यप्रदेश में रबी सीजन के दौरान गेहूं उपार्जन की रफ्तार तेज बनी हुई है। किसानों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुकिंग की समय-सीमा 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दी है। इसका फायदा उन किसानों को मिलेगा, जो अभी तक किसी कारणवश अपना स्लॉट बुक नहीं करा सके हैं।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ समय पर मिल सके। अब तक लाखों किसान उपार्जन प्रक्रिया से जुड़ चुके हैं और भुगतान भी सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाया जा रहा है।
अब तक 57 लाख क्विंटल से अधिक गेहूं की खरीदी
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मुताबिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से कुल 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में किसानों को 355 करोड़ 3 लाख रुपये से अधिक की राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल रखा गया है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
30 अप्रैल तक स्लॉट बुकिंग की सुविधा जारी
राज्य में गेहूं विक्रय को सुचारु बनाए रखने के लिए स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था लागू की गई है। अब तक 4 लाख 22 हजार 848 किसानों द्वारा 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक कराए जा चुके हैं।
किसान 30 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं। प्रदेश में कुल 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां कार्यालयीन दिवसों में खरीदी की जा रही है।
उपार्जन केंद्रों की क्षमता बढ़ाई
किसानों की बढ़ती संख्या और उपज को देखते हुए सरकार ने उपार्जन केंद्रों की दैनिक खरीदी क्षमता में इजाफा किया है। पहले जहां प्रति केंद्र प्रतिदिन 1000 क्विंटल गेहूं की स्लॉट बुकिंग होती थी, उसे बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दिया गया है।
इसका उद्देश्य यह है कि केंद्र की क्षमता के अनुसार तौल हो सके और ज्यादा से ज्यादा किसानों से समय पर खरीदी की जा सके।
केंद्रों पर किसानों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं
सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा का भी ध्यान रखा है। जिन जिलों में गेहूं खरीदी शुरू हो चुकी है, वहां केंद्रों पर छायादार बैठने की व्यवस्था, पीने का साफ पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
इसके साथ ही बारदाने, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता जांच उपकरण और गेहूं की सफाई के लिए पंखा व छनना जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।
MSP और बोनस मिलाकर 2625 रुपये प्रति क्विंटल
रबी विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलाकर किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था पहले से कर ली गई है।
भंडारण और परिवहन की पुख्ता व्यवस्था
उपार्जित गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए जूट बारदाने के साथ-साथ पीपी/एचडीपी बैग और जूट के भर्ती बारदानों का उपयोग किया जा रहा है। अब तक 30 लाख 10 हजार 480 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि भंडारण क्षमता को देखते हुए किसी भी स्तर पर गेहूं खराब होने की स्थिति नहीं आएगी।
Rahul Gandhi FIR : राहुल गांधी पर FIR दर्ज करने का आदेश, दोहरी नागरिकता केस में बढ़ी मुश्किलें
पंजीयन में नया रिकॉर्ड, लक्ष्य भी बढ़ा
इस वर्ष प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 लाख 60 हजार ज्यादा है। बीते रबी सीजन में करीब 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ था।
इस बार सरकार ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार का भरोसा है कि किसानों के सक्रिय सहयोग से यह लक्ष्य भी हासिल कर लिया जाएगा।