TCS Case Update : महाराष्ट्र। नासिक के चर्चित TCS केस में लंबे समय से फरार चल रही महिला आरोपी निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। करीब 25 दिनों से पुलिस से बच रही निदा खान को छत्रपति संभाजी नगर के नारेगांव इलाके से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसकी पहली तस्वीर भी सामने आई है, जिसके बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और फरारी के दौरान मिली मदद की जांच कर रही है।
संयुक्त ऑपरेशन में मिली बड़ी सफलता
पुलिस सूत्रों के अनुसार, निदा खान पिछले कई दिनों से कैसर कॉलोनी के एक फ्लैट में रह रही थी। इस दौरान उसके साथ चार रिश्तेदार भी मौजूद थे। पुलिस को लगातार उसके ठिकाने बदलने की जानकारी मिल रही थी, लेकिन हर बार वह जांच एजेंसियों से बच निकलती थी। आखिरकार नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजी नगर पुलिस के संयुक्त अभियान में उसे पकड़ लिया गया। पुलिस टीम ने रात करीब 11:30 बजे आरोपी को डिटेन किया।
गिरफ्तारी के बाद कराया गया मेडिकल चेकअप
गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस ने निदा खान का मेडिकल और हेल्थ चेकअप कराया। इसके बाद उसे ट्रांजिट वारंट की प्रक्रिया के लिए संभाजी नगर कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस अब उसे नासिक ले जाने की तैयारी में है, जहां अदालत में उसकी पेशी कराई जाएगी। माना जा रहा है कि पुलिस आरोपी की कस्टडी मांग सकती है ताकि मामले की गहराई से जांच की जा सके।
25 मार्च से फरार थी आरोपी
पुलिस के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद से ही निदा खान जांच एजेंसियों के रडार पर थी। 25 मार्च के बाद से वह लगातार फरार चल रही थी। उसकी तलाश के लिए कई राज्यों में पुलिस टीमों को लगाया गया था। जांच एजेंसियों को शक था कि आरोपी लगातार ठिकाने बदल रही थी और करीबी लोगों की मदद से गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रही थी।
अदालत से नहीं मिली राहत
निदा खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की याचिका भी दायर की थी। हालांकि 2 मई 2026 को नासिक रोड कोर्ट ने उसकी एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज कर दी थी। अदालत के इस फैसले के बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ कई महत्वपूर्ण डिजिटल और परिस्थितिजन्य सबूत मिले हैं।
कोर्ट में क्या-क्या आरोप लगाए गए
नासिक रोड कोर्ट में हुई सुनवाई इस केस का अहम हिस्सा मानी जा रही है। सरकारी पक्ष की ओर से पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अजय मिसर मौजूद रहे, जबकि आरोपी की ओर से वकील राहुल कासलीवाल ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान SIT की तरफ से ACP संदीप मिटके ने अदालत में आरोपी की अग्रिम जमानत का विरोध किया।
सरकारी पक्ष ने दावा किया कि आरोपी ने पीड़िता को धार्मिक गतिविधियों से प्रभावित करने की कोशिश की थी। जांच में कुछ धार्मिक एप डाउनलोड कराने, लिंक भेजने और मोबाइल चैट मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने इन डिजिटल साक्ष्यों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।
मलेशिया कनेक्शन की जांच जारी
जांच एजेंसियां अब मामले के कथित विदेशी कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं। अदालत में मालेगांव और मलेशिया लिंक का जिक्र किया गया था। सरकारी वकील ने दावा किया कि नौकरी और प्रमोशन के नाम पर कुछ गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आशंका जताई गई है। हालांकि अब तक किसी विदेशी नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है।
पीड़िता के बयान और डिजिटल सबूत अहम
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पीड़िता के बयान, मोबाइल मैसेज, डिजिटल चैट और परिवार के सदस्यों के बयान इस केस में अहम सबूत बनकर सामने आए हैं। अदालत में यह भी बताया गया कि पीड़िता का नाम बदलने और कुछ निजी दस्तावेज आरोपी पक्ष के पास होने की बातों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।
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गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
निदा खान की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर इस केस को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। गिरफ्तारी के बाद सामने आई तस्वीर पर भी लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब फरारी के दौरान आरोपी की मदद करने वालों की भी पहचान की जाएगी।
रिश्तेदारों की भूमिका पर भी जांच
पुलिस की नजर अब उन चार रिश्तेदारों पर भी है, जो आरोपी के साथ फ्लैट में रह रहे थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उन्हें आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी थी और क्या उन्होंने जानबूझकर उसे छिपने में मदद की थी। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क को लेकर नए तथ्य सामने आ सकते हैं।