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MP Wind System : MP में डिजिटल मौसम क्रांति! 23634 पंचायत में रेन गेज और 444 तहसील में लगेंगे वेदर स्टेशन

MP Wind System

MP Wind System : भोपाल। मध्य प्रदेश में खेती-किसानी और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रही है। राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश की सभी 23,634 ग्राम पंचायतों और 444 तहसीलों को आधुनिक मौसम उपकरणों से जोड़ने का फैसला लिया है। इस पहल से अब हर 15 मिनट में मौसम और बारिश का सटीक डेटा सीधे सरकार तक पहुंचेगा।

हर पंचायत में रेन गेज, हर तहसील में वेदर स्टेशन

सरकार की योजना के अनुसार, सभी ग्राम पंचायतों में ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) और हर तहसील में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) लगाए जाएंगे। इसके लिए कृषि विभाग ने निविदा जारी कर कार्यान्वयन भागीदारों से आवेदन मांगे हैं। यह सिस्टम ‘विंड्स’ (WINDS) प्लेटफॉर्म के जरिए डेटा को रियल-टाइम में अपडेट करेगा।

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हर 15 मिनट में मिलेगा सटीक मौसम डेटा

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर 15 मिनट में बारिश, तापमान, हवा की गति और नमी जैसी जानकारियां रिकॉर्ड कर सीधे केंद्रीय सर्वर पर भेजेगा। इससे सूखा, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक घटनाओं की सटीक और समय पर जानकारी मिल सकेगी।

परियोजना पर 100 से 120 करोड़ का खर्च

इस परियोजना पर करीब 100 से 120 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। एक रेन गेज की लागत 35,000 से 40,000 रुपए और वेदर स्टेशन की लागत 1.5 लाख से 2 लाख रुपए तक होगी। केंद्र सरकार इस योजना में 50 प्रतिशत राशि ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ के तहत देगी, जबकि बाकी खर्च राज्य सरकार और एजेंसियां मिलकर उठाएंगी।

क्यों जरूरी था यह सिस्टम

अभी तक मौसम की जानकारी जिला या ब्लॉक स्तर तक ही सीमित रहती थी, जिससे गांव स्तर पर सटीक स्थिति का पता नहीं चल पाता था। कई बार एक ही तहसील में कहीं सूखा तो कहीं भारी बारिश होती है, लेकिन सही डेटा के अभाव में इसका आकलन नहीं हो पाता था। इससे किसानों को फसल बीमा के दावों में परेशानी होती थी।

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फसल बीमा में मिलेगी बड़ी राहत

इस नए सिस्टम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के नुकसान का सटीक आकलन संभव होगा। अब गांव स्तर के डेटा के आधार पर बीमा क्लेम तय होंगे, जिससे किसानों को समय पर और सही मुआवजा मिल सकेगा।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम

यह पूरा सिस्टम सौर ऊर्जा से संचालित होगा और इसमें आधुनिक सेंसर व सिम कार्ड आधारित टेलीमेट्री तकनीक का उपयोग होगा। सभी उपकरण वायरलेस माध्यम से डेटा सीधे WINDS के सर्वर पर भेजेंगे, जिससे किसी मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी और डेटा पूरी तरह पारदर्शी रहेगा।

किसानों और आम जनता को फायदा

इस योजना से किसानों को अपने क्षेत्र के अनुसार मौसम की सटीक सलाह मिलेगी, जिससे वे बुवाई और सिंचाई का सही समय तय कर सकेंगे। वहीं, आम लोगों को आकाशीय बिजली, तेज बारिश या बाढ़ जैसी आपदाओं की पहले से चेतावनी मिल सकेगी।

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भोपाल सहित कई जिलों में बड़े पैमाने पर स्थापना

भोपाल जिले में 3 तहसीलों और 231 ग्राम पंचायतों, रायसेन में 12 तहसीलों और 533 पंचायतों, राजगढ़ में 9 तहसीलों और 634 पंचायतों, सीहोर में 10 तहसीलों और 543 पंचायतों तथा विदिशा में 12 तहसीलों और 591 पंचायतों में ये उपकरण लगाए जाएंगे।

संभागवार तहसील और ग्राम पंचायतें जिनमें वर्षामापी यंत्र स्थापित होंगे

नर्मदापुरम संभाग

बैतूल जिला
तहसील की संख्या: 11
ग्राम पंचायतों की संख्या: 566
हरदा जिला
तहसील की संख्या: 6
ग्राम पंचायतों की संख्या: 226
नर्मदापुरम जिला
तहसील की संख्या: 10
ग्राम पंचायतों की संख्या: 440

चंबल संभाग

भिंड जिला
तहसील की संख्या: 10
ग्राम पंचायतों की संख्या: 447
मुरैना जिला
तहसील की संख्या: 8
ग्राम पंचायतों की संख्या: 493
श्योपुर जिला
तहसील की संख्या: 5
ग्राम पंचायतों की संख्या: 240

ग्वालियर संभाग

अशोकनगर जिला
तहसील की संख्या: 8
ग्राम पंचायतों की संख्या: 377
दतिया जिला
तहसील की संख्या: 6
ग्राम पंचायतों की संख्या: 290
गुना जिला
तहसील की संख्या: 8
ग्राम पंचायतों की संख्या: 441
ग्वालियर जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 316
शिवपुरी जिला
तहसील की संख्या: 11
ग्राम पंचायतों की संख्या: 620

सागर संभाग

छतरपुर जिला
तहसील की संख्या: 13
ग्राम पंचायतों की संख्या: 562
दमोह जिला
तहसील की संख्या: 8
ग्राम पंचायतों की संख्या: 481
निवाड़ी जिला
तहसील की संख्या: 3
ग्राम पंचायतों की संख्या: 136
पन्ना जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 395
सागर जिला
तहसील की संख्या: 14
ग्राम पंचायतों की संख्या: 811
टीकमगढ़ जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 324

जबलपुर संभाग

बालाघाट जिला
तहसील की संख्या: 12
ग्राम पंचायतों की संख्या: 696
छिंदवाड़ा जिला
तहसील की संख्या: 12
ग्राम पंचायतों की संख्या: 680
पांडुर्णा जिला
तहसील की संख्या: 2
ग्राम पंचायतों की संख्या: 131
डिंडोरी जिला
तहसील की संख्या: 3
ग्राम पंचायतों की संख्या: 368
जबलपुर जिला
तहसील की संख्या: 12
ग्राम पंचायतों की संख्या: 553
कटनी जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 410
मंडला जिला
तहसील की संख्या: 6
ग्राम पंचायतों की संख्या: 496
नरसिंहपुर जिला
तहसील की संख्या: 6
ग्राम पंचायतों की संख्या: 460
सिवनी जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 650

शहडोल संभाग

अनूपपुर जिला
तहसील की संख्या: 4
ग्राम पंचायतों की संख्या: 286
शहडोल जिला
तहसील की संख्या: 6
ग्राम पंचायतों की संख्या: 397
उमरिया जिला
तहसील की संख्या: 7
ग्राम पंचायतों की संख्या: 242

रीवा संभाग

रीवा जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 572
मऊगंज जिला
तहसील की संख्या: 3
ग्राम पंचायतों की संख्या: 257
सतना जिला
तहसील की संख्या: 8
ग्राम पंचायतों की संख्या: 451
मैहर जिला
तहसील की संख्या: 3
ग्राम पंचायतों की संख्या: 278
सीधी जिला
तहसील की संख्या: 8
ग्राम पंचायतों की संख्या: 402
सिंगरौली जिला
तहसील की संख्या: 8
ग्राम पंचायतों की संख्या: 331

इंदौर संभाग

अलीराजपुर जिला
तहसील की संख्या: 5
ग्राम पंचायतों की संख्या: 288
बड़वानी जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 418
बुरहानपुर जिला
तहसील की संख्या: 5
ग्राम पंचायतों की संख्या: 167
धार जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 765
इंदौर जिला
तहसील की संख्या: 10
ग्राम पंचायतों की संख्या: 358
झाबुआ जिला
तहसील की संख्या: 6
ग्राम पंचायतों की संख्या: 382
खंडवा जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 453
खरगोन जिला
तहसील की संख्या: 11
ग्राम पंचायतों की संख्या: 602

उज्जैन संभाग

आगर मालवा जिला
तहसील की संख्या: 5
ग्राम पंचायतों की संख्या: 237
देवास जिला
तहसील की संख्या: 10
ग्राम पंचायतों की संख्या: 505
मंदसौर जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 470
नीमच जिला
तहसील की संख्या: 7
ग्राम पंचायतों की संख्या: 246
रतलाम जिला
तहसील की संख्या: 9
ग्राम पंचायतों की संख्या: 422
शाजापुर जिला
तहसील की संख्या: 7
ग्राम पंचायतों की संख्या: 354
उज्जैन जिला
तहसील की संख्या: 12
ग्राम पंचायतों की संख्या: 610

6 से 9 महीने में पूरा होगा काम

सरकार ने इस परियोजना को तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अप्रैल 2026 में निविदा जारी होने के बाद, चयनित एजेंसियों को 6 से 9 महीने के भीतर सभी स्थानों पर उपकरण स्थापित करने होंगे। इसके बाद 5 साल तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी उन्हीं एजेंसियों की होगी।

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डिजिटल डेटा से बदलेगी खेती की तस्वीर

यह योजना मध्य प्रदेश में कृषि और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली है। रियल-टाइम डेटा के जरिए न केवल किसानों को फायदा होगा, बल्कि सरकार भी समय पर सही निर्णय ले सकेगी, जिससे नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

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