Digital Campaign Expenditure : नई दिल्ली। देश में चुनावी राजनीति अब सिर्फ रैलियों, रोड शो, पोस्टर और टीवी विज्ञापनों तक सीमित नहीं रह गई है। अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी चुनाव प्रचार का बड़ा हथियार बन चुके हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म पर पार्टियां जमकर प्रचार कर रही हैं। हालिया आंकड़ों से साफ है कि इस डिजिटल जंग में भारतीय जनता पार्टी सबसे आगे नजर आ रही है।
BJP ने 40 करोड़ से ज्यादा खर्च किए
गूगल एड्स ट्रांसपेरेंसी सेंटर और मेटा एड लाइब्रेरी के आंकड़ों के अनुसार, 25 जनवरी से 24 अप्रैल के बीच चुनाव वाले चार राज्यों में BJP ने डिजिटल प्रचार पर 40 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए। यह रकम अन्य दलों की तुलना में काफी ज्यादा है। इससे साफ है कि भाजपा चुनाव प्रचार में ऑनलाइन रणनीति पर बड़ा दांव खेल रही है।
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50 हजार से ज्यादा विज्ञापन चलाए
बताया गया है कि BJP ने गूगल और मेटा दोनों प्लेटफॉर्म्स पर करीब 50 हजार विज्ञापन चलाए। इनमें सबसे ज्यादा फोकस पश्चिम बंगाल पर रहा, जबकि दूसरे नंबर पर असम रहा। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी इन राज्यों में वोटरों तक सीधे मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए पहुंचने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस काफी पीछे दिखी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का डिजिटल प्रचार खर्च इस दौरान 5 करोड़ रुपये से भी कम रहा। कांग्रेस की मौजूदगी मुख्य रूप से मेटा प्लेटफॉर्म पर दिखी, खासकर केरल और असम में। हालांकि गूगल प्लेटफॉर्म पर उसका खर्च बहुत कम रहा। पश्चिम बंगाल जैसे बड़े चुनावी राज्य के लिए कांग्रेस की ओर से कोई खास डिजिटल अभियान नजर नहीं आया।
बंगाल में TMC, तमिलनाडु में क्षेत्रीय दल सक्रिय
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने मेटा प्लेटफॉर्म पर लगभग 1.8 करोड़ रुपये खर्च किए। हालांकि गूगल पर उसकी सक्रियता कम रही। वहीं तमिलनाडु में DMK और AIADMK ने क्रमशः करीब 0.9 करोड़ और 0.7 करोड़ रुपये मेटा पर खर्च किए। इन दलों की गूगल पर मौजूदगी लगभग न के बराबर रही।
डिजिटल प्रचार क्यों बन रहा बड़ा हथियार?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए पार्टियां कम समय में लाखों लोगों तक पहुंच सकती हैं। अलग-अलग वर्गों, उम्र और इलाकों के हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। यही वजह है कि अब पार्टियां डिजिटल प्रचार पर लगातार ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं।
अब बदल चुकी चुनावी रणनीति
एक समय था जब चुनावी ताकत भीड़ और बैनरों से मापी जाती थी, लेकिन अब मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाले विज्ञापन भी जीत-हार तय करने लगे हैं। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि BJP इस नए दौर की राजनीति में सबसे आक्रामक रणनीति अपना रही है, जबकि बाकी दल अभी भी काफी पीछे नजर आ रहे हैं।