MP UCC opposition : भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा यूसीसी के संबंध में सुझाव जुटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रदेशवासियों से सरकार के पोर्टल पर जाकर अपनी राय दर्ज करने और यूसीसी के विरोध में सुझाव देने की अपील की है।
कांग्रेस विधायक मसूद का कहना है कि राज्य में इस तरह के कानून की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है और इसे लाने के पीछे राजनीतिक उद्देश्य अधिक दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित आयोग विभिन्न जिलों में जाकर लोगों की राय ले रहा है, इसलिए नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
लिव-इन रिलेशनशिप के प्रावधानों पर जताई आपत्ति
आरिफ मसूद ने यूसीसी से जुड़े संभावित प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके माध्यम से लिव-इन रिलेशनशिप को वैधता और प्रोत्साहन देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की मूल संरचना विवाह संस्था पर आधारित है और ऐसे किसी भी प्रावधान को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए जो पारिवारिक व्यवस्था को कमजोर करे।
मसूद के अनुसार सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए कानून बनाए जाने चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करें और अपनी राय सरकार तक पहुंचाएं।
वीडियो में बताए जवाबों के आधार पर सुझाव देने की अपील
कांग्रेस विधायक ने नागरिकों से कहा कि वे उनके वीडियो में बताए गए बिंदुओं और जवाबों को आधार बनाकर सरकार के पोर्टल पर अपने सुझाव दर्ज करें। उन्होंने दावा किया कि यदि बड़ी संख्या में लोग अपनी राय दर्ज करेंगे तो सरकार को जनता की वास्तविक भावना का पता चलेगा। मसूद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है और यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अधिक से अधिक लोगों को भागीदारी करनी चाहिए।
सभी समुदायों से मांगा समर्थन
आरिफ मसूद ने अपनी अपील को किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने मुस्लिम समाज के साथ-साथ सिख, ईसाई, बौद्ध, आदिवासी और अन्य हिंदू समुदायों से भी इस मुद्दे पर अपनी राय दर्ज करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि यूसीसी का प्रभाव विभिन्न समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। इसलिए सभी वर्गों को सुझाव प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए ताकि व्यापक दृष्टिकोण सरकार तक पहुंच सके।
आदिवासी समुदाय को लेकर उठाए सवाल
अपने बयान में मसूद ने आदिवासी समाज का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समुदायों को अलग श्रेणी में रखा जाता है तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब अलग-अलग वर्गों के लिए अलग प्रावधान बनाए जाएंगे तो समानता का सिद्धांत किस प्रकार लागू होगा। उनके इस बयान के बाद यूसीसी की परिभाषा और उसके स्वरूप को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
सुझाव प्रक्रिया के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
प्रदेश में यूसीसी को लेकर सुझाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा इसे सामाजिक सुधार और समान कानून व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस के कुछ नेता और विभिन्न सामाजिक संगठन इसके कई पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं।
MLA आरिफ मसूद का यह अभियान यूसीसी को लेकर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है। फिलहाल सरकार द्वारा गठित आयोग विभिन्न वर्गों से सुझाव एकत्र कर रहा है और आने वाले समय में इन सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।