MP Cabinet Decision : इंदौर मेट्रो का बजट 12,900 करोड़ हुआ! आज रात 12 बजे तक ट्रांसफर संभव, MP कैबिनेट के बड़े फैसले

MP Cabinet Decision : भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। बैठक में सबसे बड़ा निर्णय राज्य कर्मचारियों के तबादलों को लेकर लिया गया। सरकार ने तबादला अवधि को 24 घंटे के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। अब प्रदेश में कर्मचारियों के तबादले आज रात 12 बजे तक किए जा सकेंगे। इससे उन विभागों को अतिरिक्त समय मिल जाएगा, जहां तबादलों की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। बता दें कि 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में तबादला नीति को मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 मई को आदेश जारी कर 15 जून तक तबादले करने के निर्देश दिए थे। अब सरकार ने प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए इसकी अवधि बढ़ा दी है। इंदौर मेट्रो परियोजना की बढ़ी लागत को मंजूरी कैबिनेट बैठक में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संशोधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। पहले इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 7,500 करोड़ रुपए निर्धारित की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 12,900 करोड़ रुपए कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि निर्माण लागत, तकनीकी आवश्यकताओं और परियोजना विस्तार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संशोधित लागत को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा विभिन्न विभागों की करीब 24 हजार करोड़ रुपए की विकास योजनाओं को भी जारी रखने की मंजूरी प्रदान की गई है, जिससे प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों की गति बनी रहेगी। Nagpur Rape Conversion : एयरफोर्स अफसर की पत्नी से रेप, धर्म परिवर्तन की कोशिश! VIDEO में रोते हुए बोली- मुझे छोड़ दो स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मिली स्वीकृति मोहन कैबिनेट ने स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना और अस्पतालों तथा डायग्नोस्टिक केंद्रों की संख्या बढ़ाना है। सरकार परोपकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष प्रोत्साहन देगी। इन संस्थाओं को आधुनिक उपकरण खरीदने, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने और बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी और लोगों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता कम होगी। अस्पतालों के लिए जमीन और प्रोत्साहन राशि देने की तैयारी बैठक में अस्पतालों के विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। सरकार ने ऐसे ट्रस्टों और संस्थाओं को जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया है, जो अस्पतालों का संचालन करने की क्षमता रखते हैं। इसके लिए पांच मंत्रियों की एक समिति गठित की जाएगी, जो जमीन आवंटन के मानदंड और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं पर सुझाव देगी। Telegram Ban : NEET Re-Exam से पहले Telegram पर अस्थायी रोक, जानिए कब तक रहेगा प्रतिबंध समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार अस्पताल निर्माण के लिए आवश्यक मशीनों और उपकरणों की खरीद पर भी प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। इससे निजी और परोपकारी संस्थाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस सरकार का दावा है कि नई स्वास्थ्य नीति के जरिए प्रदेश में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों का नेटवर्क मजबूत किया जाएगा। इससे मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और अधिक संख्या में एमबीबीएस डॉक्टर तैयार किए जा सकेंगे। मरीजों का बड़े शहरों की ओर पलायन कम होगा और ग्रामीण तथा अर्धशहरी क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस योजना को ‘मध्य प्रदेश परोपकारी संस्थाओं के लिए मेगा स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026’ नाम दिया गया है। कैबिनेट ने रीवा, देवास और गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी भागीदारी के माध्यम से विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। Cough Syrup Rules Changed : अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले नियम विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कैबिनेट के फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बड़े निवेश की दिशा में आगे बढ़ रही है। एक ओर इंदौर मेट्रो जैसी बड़ी परियोजनाओं को गति दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए नई नीतियां लागू की जा रही हैं। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी और विकास परियोजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी।
Nagpur Rape Conversion : एयरफोर्स अफसर की पत्नी से रेप, धर्म परिवर्तन की कोशिश! VIDEO में रोते हुए बोली- मुझे छोड़ दो

Nagpur Rape Conversion : नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में भारतीय वायुसेना (IAF) के एक अधिकारी की पत्नी द्वारा रेप, ब्लैकमेलिंग, जबरन वसूली और कथित धर्मांतरण के आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर मुख्य आरोपी अयाज ताज मदारे समेत अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। फिलहाल मामले की सच्चाई का पता जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। स्कूल क्लासमेट के जरिए हुआ संपर्क पुलिस के अनुसार पीड़िता प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है, जबकि उसके पति भारतीय वायुसेना में कार्यरत हैं और दूसरे शहर में तैनात हैं। शिकायत में कहा गया है कि फरवरी 2025 में स्कूल का पुराना परिचित अयाज ताज मदारे प्लॉट खरीदने के बहाने उसके संपर्क में आया। महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसे वर्धा रोड स्थित एक होटल में बुलाया, जहां कथित तौर पर नशीला पदार्थ मिलाकर पेय पदार्थ दिया गया। महिला का दावा है कि बेहोशी की स्थिति में उसके साथ दुष्कर्म किया गया और आपत्तिजनक फोटो तथा वीडियो बनाए गए। Telegram Ban : NEET Re-Exam से पहले Telegram पर अस्थायी रोक, जानिए कब तक रहेगा प्रतिबंध वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने का आरोप एफआईआर में दर्ज आरोपों के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर फोटो और वीडियो का इस्तेमाल कर महिला को ब्लैकमेल किया। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने कई बार यौन शोषण किया और उससे लाखों रुपये भी वसूले। महिला का आरोप है कि उसे लगातार धमकियां दी गईं और वीडियो सार्वजनिक करने की बात कहकर दबाव बनाया गया। पुलिस इन आरोपों की पुष्टि के लिए डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जबरन धर्मांतरण और निकाह कराने का आरोप महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। शिकायत के अनुसार 31 मई को उसे नागपुर के पास एक स्थान पर ले जाया गया, जहां कुछ अन्य लोगों से मुलाकात कराई गई। पीड़िता का दावा है कि वहां उससे कथित तौर पर धार्मिक प्रक्रिया पूरी कराई गई और जबरन “कबूल है” कहलवाया गया। महिला ने आरोप लगाया कि उसे बताया गया कि उसका धर्मांतरण और निकाह पूरा हो चुका है। पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है। Jhabua Cow Slaughter : झाबुआ के मेघनगर में फिर गौहत्या से आक्रोश, जामनिया वन क्षेत्र में मिले अवशेष, भारी पुलिस बल तैनात पति के लौटने पर सामने आई पूरी घटना शिकायत के अनुसार महिला ने लंबे समय तक इस घटना की जानकारी किसी को नहीं दी। 12 जून को जब उसके पति ड्यूटी से घर लौटे, तब उसने पूरी घटना बताई। इसके बाद दोनों ने सोनेगांव पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने महिला के बयान दर्ज करने के साथ ही मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। कई धाराओं में दर्ज हुआ केस पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म, बार-बार यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग, जबरन वसूली, कथित जबरन धर्मांतरण तथा संबंधित अन्य कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। Ghatakhedi NDPS Case : NDPS कार्रवाई पर बड़ा खुलासा! मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत 100 लोगों पर राजस्थान में FIR दर्ज साथ ही महाराष्ट्र अंधश्रद्धा एवं काला जादू विरोधी कानून के प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Telegram Ban : NEET Re-Exam से पहले Telegram पर अस्थायी रोक, जानिए कब तक रहेगा प्रतिबंध

Telegram Ban : नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 के री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत यह आदेश जारी किया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर उठाए गए इस कदम का उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी कथित धोखाधड़ी, फर्जी पेपर लीक दावों और संगठित नकल गिरोहों की गतिविधियों पर रोक लगाना बताया गया है। यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक लागू रहेगा। टेलीग्राम की कुछ सुविधाओं पर भी लगी रोक सरकार ने केवल प्लेटफॉर्म की पहुंच सीमित करने का ही निर्णय नहीं लिया है, बल्कि टेलीग्राम को भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के लिए मैसेज एडिट फीचर अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश भी दिए हैं। यह व्यवस्था 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। अधिकारियों का मानना है कि मैसेज एडिट फीचर का दुरुपयोग कर पुराने संदेशों में बदलाव करके फर्जी पेपर लीक या गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से जांच और सबूतों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। Jhabua Cow Slaughter : झाबुआ के मेघनगर में फिर गौहत्या से आक्रोश, जामनिया वन क्षेत्र में मिले अवशेष, भारी पुलिस बल तैनात टेलीग्राम पर क्यों उठे सवाल? पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कथित पेपर लीक, फर्जी दावे और साइबर धोखाधड़ी के मामलों में Telegram का नाम सामने आता रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ समूह प्लेटफॉर्म की बड़ी ग्रुप क्षमता, ऑटोमेशन टूल्स और मैसेज एडिटिंग जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर छात्रों को गुमराह करते थे। हालांकि टेलीग्राम का उपयोग लाखों लोग वैध और सामान्य संचार के लिए भी करते हैं लेकिन सरकार का कहना है कि इस बार कार्रवाई विशेष रूप से परीक्षा सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई है। Ghatakhedi NDPS Case : NDPS कार्रवाई पर बड़ा खुलासा! मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत 100 लोगों पर राजस्थान में FIR दर्ज NTA ने फैसले का किया स्वागत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम NEET-UG 2026 री-एग्जाम की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद करेगा। एजेंसी के अनुसार पहले कई फर्जी चैनलों और समूहों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी लेकिन संगठित नेटवर्क सक्रिय बने हुए थे। ऐसे में यह समयबद्ध प्रतिबंध अंतिम विकल्प के रूप में लागू किया गया। NTA ने छात्रों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से ही परीक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त करें। MP UCC opposition : मप्र में UCC पर सियासत तेज! आरिफ मसूद ने लोगों से कहा- फॉर्म भरकर दर्ज कराएं अपना विरोध 22 जून के बाद बहाल होगी सेवा सरकार ने स्पष्ट किया है कि Telegram पर लगाया गया प्रतिबंध स्थायी नहीं है। वर्तमान आदेश के अनुसार प्लेटफॉर्म पर पहुंच 22 जून 2026 तक सीमित रहेगी। इसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। वहीं मैसेज एडिटिंग फीचर पर लगी रोक 30 जून तक जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य केवल परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना है। NTA STATEMENT REGARDING THE ACTION ON TELEGRAM PLATFORM IN INDIA 1. The National Testing Agency (NTA) welcomes the directions issued today in respect of the Telegram platform in India. The directions, issued on recommendations of NTA are calibrated and bounded in time: (a) a… — National Testing Agency (@NTA_Exams) June 16, 2026
Jhabua Cow Slaughter : झाबुआ के मेघनगर में फिर गौहत्या से आक्रोश, जामनिया वन क्षेत्र में मिले अवशेष, भारी पुलिस बल तैनात

Jhabua Cow Slaughter : मध्य प्रदेश। झाबुआ के मेघनगर थाना क्षेत्र स्थित जामनिया गांव में कथित गोहत्या की सूचना के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गए हैं। शुक्रवार को रंभापुर वन क्षेत्र के जामनिया कंपार्टमेंट में झाड़ियों के बीच गोवंश के अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई। सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल से मांस, धारदार हथियार, बर्तन और अन्य सामग्री जब्त की गई। अधिकारियों ने साक्ष्य एकत्र कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है और विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कई आरोपियों को बनाया नामजद मेघनगर पुलिस ने मामले में तीन नामजद आरोपियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सुनील डामोर, खाजू डामोर और मन्नु दाहमा को आरोपी बनाया गया है। प्रशासन ने बताया कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आरोपी की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। Cough Syrup Rules Changed : अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले नियम वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू घटना के बाद प्रशासन ने वन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। शनिवार को राजस्व, वन विभाग और पुलिस की टीम जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। वन भूमि की सीमाएं निर्धारित की गईं और कई स्थानों से अतिक्रमण हटाकर कंटूर ट्रेंच बनाए गए। अधिकारियों के अनुसार जिन लोगों को वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे दिए गए थे, उनके दस्तावेजों और भूमि उपयोग की भी जांच की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हिंदू संगठनों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग घटना के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। संगठनों ने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सोमवार को कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले में कठोर कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो वे व्यापक आंदोलन शुरू कर सकते हैं। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। MP UCC opposition : मप्र में UCC पर सियासत तेज! आरिफ मसूद ने लोगों से कहा- फॉर्म भरकर दर्ज कराएं अपना विरोध प्रशासन और वन विभाग ने क्या कहा? मेघनगर एसडीएम अवंधती प्रधान ने बताया कि मौके से मिले पशु अवशेषों की जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने पशुओं की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी, कोटवार और पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। वहीं वन विभाग की ओर से बताया गया है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और यदि वन भूमि के दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। छह महीने में दूसरी बड़ी घटना से बढ़ी चिंता जिले में यह छह महीने के भीतर गोवंश से जुड़ा दूसरा बड़ा मामला है। इससे पहले दिसंबर 2025 में सजेली नानिया क्षेत्र में भी बड़ी मात्रा में गोवंश के अवशेष मिलने के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। उस घटना के बाद भी प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने और निगरानी बढ़ाने की कार्रवाई की थी। MP Cabinet Meeting : मोहन कैबिनेट की अहम बैठक आज, स्वास्थ्य नीति 2026 समेत कई बड़े प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर जामनिया की ताजा घटना के बाद एक बार फिर वन क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
Cough Syrup Rules Changed : अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले नियम

Cough Syrup Rules Changed : नई दिल्ली। देशभर में कफ सिरप की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए कफ सिरप और अन्य औषधीय सिरप की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर रोक लगा दी है। अब ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं खरीदी जा सकेंगी। केंद्र सरकार ने 9 जून 2026 को अधिसूचना जारी कर Drugs (Fifth Amendment) Rules, 2026 लागू कर दिए हैं। इस फैसले के बाद देशभर की फार्मेसियों और मेडिकल स्टोर्स को नए नियमों का पालन करना होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सुझाव और आपत्तियों के बाद लागू हुआ संशोधन केंद्र सरकार ने इस संशोधन का प्रारूप 30 दिसंबर 2025 को जारी किया था। इसके बाद आम नागरिकों, चिकित्सा विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई थीं। प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद सरकार ने अंतिम संशोधन को मंजूरी देते हुए अधिसूचित कर दिया। नए नियम लागू होने के साथ ही कफ सिरप को ओवर-द-काउंटर दवाओं की सूची से बाहर कर दिया गया है। इससे अब इन दवाओं की बिक्री पर पहले की तुलना में अधिक निगरानी और नियंत्रण रहेगा। MP UCC opposition : मप्र में UCC पर सियासत तेज! आरिफ मसूद ने लोगों से कहा- फॉर्म भरकर दर्ज कराएं अपना विरोध बच्चों की मौतों के बाद बढ़ी थी सख्ती की मांग स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव हर्ष मंगला के अनुसार यह निर्णय मध्य प्रदेश और राजस्थान में दूषित कफ सिरप पीने से बच्चों की मौतों के बाद सामने आई चिंताओं के मद्देनजर लिया गया है। इन घटनाओं ने दवाओं की गुणवत्ता और उनकी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद विशेषज्ञों और स्वास्थ्य संगठनों ने सिरप आधारित दवाओं के निर्माण, वितरण और बिक्री पर कड़े नियम लागू करने की मांग की थी। सरकार का मानना है कि नए नियमों से दवाओं के दुरुपयोग और गुणवत्ता संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी। अब डॉक्टर की पर्ची दिखाना होगा अनिवार्य नए नियमों के तहत कफ सिरप सहित सभी संबंधित औषधीय सिरप खरीदने के लिए उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन दिखाना होगा। मेडिकल स्टोर संचालक बिना वैध डॉक्टर की पर्ची के ऐसी दवाएं नहीं बेच सकेंगे। Ghatakhedi NDPS Case : NDPS कार्रवाई पर बड़ा खुलासा! मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत 100 लोगों पर राजस्थान में FIR दर्ज इससे दवाओं की अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगेगी और मरीजों को उचित चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही दवा उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिरप आधारित दवाओं का उपयोग केवल आवश्यकता और चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाए। ड्रग्स रूल्स में क्या बदलाव हुआ? सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 की Schedule K में शामिल दवाओं की सूची से “Syrups” शब्द को हटा दिया है। पहले इस श्रेणी की कुछ दवाएं बिना प्रिस्क्रिप्शन के खरीदी जा सकती थीं, लेकिन संशोधन के बाद अब यह सुविधा समाप्त हो गई है। MP Cabinet Meeting : मोहन कैबिनेट की अहम बैठक आज, स्वास्थ्य नीति 2026 समेत कई बड़े प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर इसके परिणामस्वरूप सिरप आधारित दवाएं OTC श्रेणी से बाहर हो गई हैं और उन पर सख्त नियामकीय नियंत्रण लागू हो गया है। यह बदलाव दवा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Union Ministry of Health and Family Welfare issues notification which brings into effect that all ‘Syrups’, including cough syrups will no longer be available over the counter. A prescription by a doctor will be required for the purchase of ‘Syrups’. pic.twitter.com/k0jsP25EqJ — ANI (@ANI) June 16, 2026
MP UCC opposition : मप्र में UCC पर सियासत तेज! आरिफ मसूद ने लोगों से कहा- फॉर्म भरकर दर्ज कराएं अपना विरोध

MP UCC opposition : भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा यूसीसी के संबंध में सुझाव जुटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रदेशवासियों से सरकार के पोर्टल पर जाकर अपनी राय दर्ज करने और यूसीसी के विरोध में सुझाव देने की अपील की है। कांग्रेस विधायक मसूद का कहना है कि राज्य में इस तरह के कानून की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है और इसे लाने के पीछे राजनीतिक उद्देश्य अधिक दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित आयोग विभिन्न जिलों में जाकर लोगों की राय ले रहा है, इसलिए नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। लिव-इन रिलेशनशिप के प्रावधानों पर जताई आपत्ति आरिफ मसूद ने यूसीसी से जुड़े संभावित प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके माध्यम से लिव-इन रिलेशनशिप को वैधता और प्रोत्साहन देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की मूल संरचना विवाह संस्था पर आधारित है और ऐसे किसी भी प्रावधान को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए जो पारिवारिक व्यवस्था को कमजोर करे। मसूद के अनुसार सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए कानून बनाए जाने चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करें और अपनी राय सरकार तक पहुंचाएं। Ghatakhedi NDPS Case : NDPS कार्रवाई पर बड़ा खुलासा! मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत 100 लोगों पर राजस्थान में FIR दर्ज वीडियो में बताए जवाबों के आधार पर सुझाव देने की अपील कांग्रेस विधायक ने नागरिकों से कहा कि वे उनके वीडियो में बताए गए बिंदुओं और जवाबों को आधार बनाकर सरकार के पोर्टल पर अपने सुझाव दर्ज करें। उन्होंने दावा किया कि यदि बड़ी संख्या में लोग अपनी राय दर्ज करेंगे तो सरकार को जनता की वास्तविक भावना का पता चलेगा। मसूद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है और यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अधिक से अधिक लोगों को भागीदारी करनी चाहिए। सभी समुदायों से मांगा समर्थन आरिफ मसूद ने अपनी अपील को किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने मुस्लिम समाज के साथ-साथ सिख, ईसाई, बौद्ध, आदिवासी और अन्य हिंदू समुदायों से भी इस मुद्दे पर अपनी राय दर्ज करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यूसीसी का प्रभाव विभिन्न समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। इसलिए सभी वर्गों को सुझाव प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए ताकि व्यापक दृष्टिकोण सरकार तक पहुंच सके। Ceasefire Update : अमेरिका- ईरान शांति समझौते पर नया विवाद, ट्रंप ने 300 अरब डॉलर फंड की खबरों को बताया झूठ आदिवासी समुदाय को लेकर उठाए सवाल अपने बयान में मसूद ने आदिवासी समाज का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समुदायों को अलग श्रेणी में रखा जाता है तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता नहीं कहा जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अलग-अलग वर्गों के लिए अलग प्रावधान बनाए जाएंगे तो समानता का सिद्धांत किस प्रकार लागू होगा। उनके इस बयान के बाद यूसीसी की परिभाषा और उसके स्वरूप को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सुझाव प्रक्रिया के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल प्रदेश में यूसीसी को लेकर सुझाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा इसे सामाजिक सुधार और समान कानून व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस के कुछ नेता और विभिन्न सामाजिक संगठन इसके कई पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं। Abhijeet Deepke Attack : जयपुर में प्रदर्शन के दौरान CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर हमला, थप्पड़बाजी का वीडियो वायरल MLA आरिफ मसूद का यह अभियान यूसीसी को लेकर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है। फिलहाल सरकार द्वारा गठित आयोग विभिन्न वर्गों से सुझाव एकत्र कर रहा है और आने वाले समय में इन सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
Ghatakhedi NDPS Case : NDPS कार्रवाई पर बड़ा खुलासा! मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत 100 लोगों पर राजस्थान में FIR दर्ज

Ghatakhedi NDPS Case : मध्य प्रदेश। राजस्थान के झालावाड़ में जनवरी 2026 में हुई एक चर्चित NDPS कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। चौमहला कोर्ट के आदेश पर डग थाने में मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के दो थाना प्रभारियों समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामला घाटाखेड़ी गांव में की गई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसे लेकर शुरुआत से ही कई सवाल उठ रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अलावा अन्य कर्मचारियों और शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज इस मामले ने दोनों राज्यों की पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ड्रग्स तस्करी की जांच से शुरू हुआ पूरा मामला मामले की शुरुआत 21 जनवरी 2026 को हुई थी, जब आगर पुलिस ने फैजान नामक युवक को 330 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में आरोपी ने बताया था कि वह यह मादक पदार्थ राजस्थान के घाटाखेड़ी गांव के शाहिर, मुनव्वर और ताहिर से लेकर आया था। इसके बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए 28 जनवरी को बड़ी टीम के साथ गांव में दबिश दी। पुलिस का दावा था कि मौके से मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई थी। इस कार्रवाई के दौरान शाहिर खान और मुनव्वर उर्फ राजा को गिरफ्तार किया गया था। Ceasefire Update : अमेरिका- ईरान शांति समझौते पर नया विवाद, ट्रंप ने 300 अरब डॉलर फंड की खबरों को बताया झूठ कार्रवाई पर उठे कई गंभीर सवाल पुलिस कार्रवाई के बाद कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पूरे मामले पर संदेह गहराता गया। तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो बंदूकें, ग्राइंडर मशीन और ड्रम बरामद होने का दावा किया था, लेकिन जांच के दौरान जब्त सामग्री नई दिखाई देने पर सवाल उठे। इसके अलावा पुलिस ने दावा किया था कि कार्रवाई में राजस्थान पुलिस भी शामिल थी, जबकि जांच में पता चला कि स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी तक नहीं थी। ई-साक्ष्य ऐप के जरिए वीडियोग्राफी किए जाने का दावा भी जांच में गलत पाया गया। जांच में रिकॉर्ड और समय को लेकर सामने आईं विसंगतियां जांच के दौरान पुलिस रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों में भी कई विरोधाभास मिले। दस्तावेजों में गिरफ्तारी और जब्ती की समयावधि दर्ज थी, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों से पता चला कि मध्य प्रदेश पुलिस की टीम बहुत कम समय के लिए गांव में मौजूद थी। जांच में यह भी सामने आया कि इतने कम समय में NDPS अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना संभव नहीं था। तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े कई जरूरी रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिले, जिससे कार्रवाई की वैधता पर सवाल और बढ़ गए। MP Cabinet Meeting : मोहन कैबिनेट की अहम बैठक आज, स्वास्थ्य नीति 2026 समेत कई बड़े प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर परिवार की शिकायत के बाद शुरू हुई न्यायिक प्रक्रिया गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने शुरुआत से ही पुलिस कार्रवाई को फर्जी बताया था। उनका आरोप था कि मध्य प्रदेश पुलिस ने बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए उनके घर में प्रवेश किया और उनके बेटों को झूठे मामले में फंसा दिया। इसके बाद उन्होंने 21 फरवरी 2026 को चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर किया। कोर्ट ने मामले की जांच के आदेश दिए, जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर पर विस्तृत जांच की गई। जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण कमियां और विसंगतियां सामने आईं। जांच रिपोर्ट के आधार पर FIR जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट सहित करीब 100 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। Ram Mandir Donation : राम मंदिर दान विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जनिए FIR और कोर्ट मॉनिटरिंग में क्या उठी मांग अब पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी और रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी। जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं और मामले में नई धाराएं जोड़े जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
Ceasefire Update : अमेरिका- ईरान शांति समझौते पर नया विवाद, ट्रंप ने 300 अरब डॉलर फंड की खबरों को बताया झूठ

Ceasefire Update : वांशिगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित शांति समझौते पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान को कथित तौर पर 300 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता और पुनर्निर्माण फंड दिए जाने की खबरों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि ऐसी कोई वित्तीय डील नहीं हुई है और इस तरह की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। ट्रंप ने फंडिंग की खबरों को किया खारिज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमति जताई है, लेकिन उसे सैकड़ों अरब डॉलर देने की कोई बात नहीं हुई है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा ईरान को भारी आर्थिक पैकेज दिए जाने की खबरें गलत हैं और राजनीतिक रूप से फैलाई जा रही हैं। Ceasefire Deal Update : अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर सहमति! होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा, नई वार्ता का रास्ता साफ 300 मिलियन या 300 बिलियन? आंकड़ों पर भी भ्रम दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने अपनी पोस्ट में 300 मिलियन डॉलर का जिक्र किया, जबकि ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में 300 बिलियन डॉलर (300 अरब डॉलर) के संभावित फंड की चर्चा की गई थी। इसी अंतर ने पूरे मामले को और अधिक उलझा दिया है। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं हस्ताक्षर दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना है। समझौते से जुड़ी सामने आई जानकारियों के मुताबिक, यदि ईरान कुछ तय शर्तों का पालन करता है तो उस पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज किए गए फंड की रिहाई और पुनर्निर्माण सहायता जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी तक समझौते का आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है। Abhijeet Deepke Attack : जयपुर में प्रदर्शन के दौरान CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर हमला, थप्पड़बाजी का वीडियो वायरल व्हाइट हाउस जल्द जारी करेगा समझौते का विवरण अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने कहा है कि इस सप्ताह समझौते का पूरा टेक्स्ट सार्वजनिक किया जाएगा। उनके मुताबिक, ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक राहत तभी मिलेगी जब वह समझौते की सभी शर्तों का पालन करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शर्तें पूरी किए बिना ईरान को कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। परमाणु कार्यक्रम पर अब भी बनी हुई है अनिश्चितता हालांकि शांति समझौते की घोषणा हो चुकी है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई सवाल अब भी बने हुए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तेहरान भविष्य में अपने परमाणु ढांचे को किस स्तर तक सीमित करने पर सहमत हुआ है और निगरानी की व्यवस्था कैसी होगी। MP Teachers Protest : शिक्षक भर्ती 2025 में पद वृद्धि की मांग, हजारों अभ्यर्थियों ने निकाला अर्धनग्न होकर निकाला मार्च समझौते पर टिकी दुनिया की नजर मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता बेहद अहम माना जा रहा है। लेकिन फंडिंग, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर जारी अस्पष्टता के कारण समझौते को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजरें स्विट्जरलैंड में होने वाले संभावित हस्ताक्षर और समझौते के आधिकारिक दस्तावेज पर टिकी हैं।
MP Cabinet Meeting : मोहन कैबिनेट की अहम बैठक आज, स्वास्थ्य नीति 2026 समेत कई बड़े प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

MP Cabinet Meeting : भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार की अहम कैबिनेट बैठक मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में आयोजित की जाएगी। यह बैठक दोपहर 12 बजे शुरू होगी। सरकार की इस बैठक पर प्रदेश के विभिन्न विभागों और कर्मचारियों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम फैसलों पर अंतिम मुहर लग सकती है। स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026 को मिल सकती है मंजूरी बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रस्तावों पर चर्चा होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026 को कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना और निजी निवेश को बढ़ावा देना है। सरकार का फोकस ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर रहेगा। यदि इस नीति को मंजूरी मिलती है तो स्वास्थ्य क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। Abhijeet Deepke Attack : जयपुर में प्रदर्शन के दौरान CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर हमला, थप्पड़बाजी का वीडियो वायरल ट्रांसफर अवधि बढ़ाने पर हो सकता है फैसला कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। चर्चा है कि ट्रांसफर अवधि को बढ़ाने को लेकर सरकार कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है, जो अभी तक स्थानांतरण प्रक्रिया का लाभ नहीं ले पाए हैं। इस फैसले का असर विभिन्न विभागों के प्रशासनिक कामकाज पर भी पड़ सकता है। Raisen Minor Girl Recovered : 14 साल की नाबालिग को शादी का झांसा देकर भोपाल ले गया मुस्तफा, हिंदू संगठन ने लगाया लव जिहाद का आरोप खाद आपूर्ति और अन्य मुद्दों पर भी होगी चर्चा बैठक में प्रदेश में खाद की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा भी की जा सकती है। किसानों की जरूरतों को देखते हुए सरकार खाद वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर विचार कर सकती है। इसके अलावा कई अन्य विभागीय प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने रखे जा सकते हैं। बैठक के बाद सरकार की ओर से लिए गए फैसलों की आधिकारिक जानकारी जारी की जाएगी।