Aayudh

TCS Conversion Case : बुर्का नहीं पहनतीं इसलिए होता है रेप… TCS नासिक कांड की पीड़िता ने सुनाई आपबीती

TCS Religious Conversion

TCS Conversion Case : महाराष्ट्र। महिलाओं के साथ रेप इसलिए होता है क्योंकि वे बुर्का नहीं पहनतीं हैं… यह बयान देश की बड़ी आईटी कंपनी TCS के नासिक ऑफिस में काम करने वाली महिला कर्मचारी का है। यहां काम करने वाली महिला कर्मचारी ने अपने पांच सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न, अश्लील टिप्पणी, पीछा करने और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि जून 2025 से मार्च 2026 तक लगातार उसे परेशान किया गया। यहां तक कि हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक बातें भी कहीं। नई नौकरी और अकेलेपन का उठाया फायदा महिला ने बताया कि उसने 20 जून 2025 को TCS के नासिक ऑफिस में एसोसिएट पद पर नौकरी शुरू की थी। शादी को सिर्फ एक महीना हुआ था और उसके पति बाहर रहते थे, इसलिए वह अकेली रहती थी। महिला का आरोप है कि सहकर्मियों ने इसी स्थिति का फायदा उठाया और उसे कमजोर समझकर परेशान करना शुरू कर दिया। Nashik NGO Conversion : नागपुर में नासिक TCS जैसा केस! NGO की आड़ में धर्मांतरण का खेल, महिलाएं निशाने पर टीम लीडर पर छेड़छाड़ के आरोप पीड़िता ने टीम लीडर रजा मेमन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला के अनुसार, वह बार-बार ट्रेनिंग रूम में आता था और निजी जीवन को लेकर सवाल पूछता था। उसने कई बार पति और शादी को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। महिला ने आरोप लगाया कि एक दिन वह साड़ी पहनकर ऑफिस पहुंची तो आरोपी ने उसका पल्लू पकड़ लिया। दूसरे सहकर्मियों पर भी गंभीर आरोप महिला ने अपने ट्रेनर शाहरुख कुरेशी पर भी आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप लगाया है। वहीं, आसिफ अंसारी पर सबसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़िता का कहना है कि आरोपी बार-बार पास आकर बैठता था, बिना अनुमति छूता था और अश्लील बातें करता था। महिला ने कहा कि उसने धार्मिक टिप्पणियां भी कीं, जिससे उसकी भावनाएं आहत हुईं। Nashik TCS Conversion : फरार आरोपी निदा खान ने मांगी अग्रिम जमानत, बोली- मैं प्रेग्नेंट हूँ… करियर खराब होने के डर से नहीं कर पाई शिकायत पीड़िता ने बताया कि वह नई नौकरी में थी और शिकायत करने से डरती थी। उसे लगता था कि अगर उसने आवाज उठाई तो नौकरी चली जाएगी। इसी वजह से वह लंबे समय तक चुप रही और आरोपियों ने इसका फायदा उठाया। पुलिस में दर्ज हुई शिकायत अब महिला ने पांचों आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में यौन उत्पीड़न, पीछा करना, छेड़छाड़, अश्लील टिप्पणी और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसी धाराएं शामिल की गई हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। TCS Religious Conversion : नासिक TCS मामले में बड़ा अपडेट, HR हेड धर्मांतरण का बनाती थी दबाव कार्यस्थल सुरक्षा पर उठे सवाल इस घटना के बाद एक बार फिर बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कार्यस्थल पर गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। अब सभी की नजर पुलिस जांच और कंपनी की कार्रवाई पर टिकी है।

Digital Campaign Expenditure : BJP ने डिजिटल कैंपेन में 40 करोड़ से ज्यादा किया खर्च, जानिये कांग्रेस-TMC ने कितना लगाया पैसा

Digital Campaign Expenditure

Digital Campaign Expenditure : नई दिल्ली। देश में चुनावी राजनीति अब सिर्फ रैलियों, रोड शो, पोस्टर और टीवी विज्ञापनों तक सीमित नहीं रह गई है। अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी चुनाव प्रचार का बड़ा हथियार बन चुके हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म पर पार्टियां जमकर प्रचार कर रही हैं। हालिया आंकड़ों से साफ है कि इस डिजिटल जंग में भारतीय जनता पार्टी सबसे आगे नजर आ रही है। BJP ने 40 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गूगल एड्स ट्रांसपेरेंसी सेंटर और मेटा एड लाइब्रेरी के आंकड़ों के अनुसार, 25 जनवरी से 24 अप्रैल के बीच चुनाव वाले चार राज्यों में BJP ने डिजिटल प्रचार पर 40 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए। यह रकम अन्य दलों की तुलना में काफी ज्यादा है। इससे साफ है कि भाजपा चुनाव प्रचार में ऑनलाइन रणनीति पर बड़ा दांव खेल रही है। अपने ही कानून में फंस जाते Raghav Chadha? जानिये क्या है 4 साल पुराना बिल जो आज बना चर्चा का विषय 50 हजार से ज्यादा विज्ञापन चलाए बताया गया है कि BJP ने गूगल और मेटा दोनों प्लेटफॉर्म्स पर करीब 50 हजार विज्ञापन चलाए। इनमें सबसे ज्यादा फोकस पश्चिम बंगाल पर रहा, जबकि दूसरे नंबर पर असम रहा। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी इन राज्यों में वोटरों तक सीधे मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए पहुंचने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस काफी पीछे दिखी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का डिजिटल प्रचार खर्च इस दौरान 5 करोड़ रुपये से भी कम रहा। कांग्रेस की मौजूदगी मुख्य रूप से मेटा प्लेटफॉर्म पर दिखी, खासकर केरल और असम में। हालांकि गूगल प्लेटफॉर्म पर उसका खर्च बहुत कम रहा। पश्चिम बंगाल जैसे बड़े चुनावी राज्य के लिए कांग्रेस की ओर से कोई खास डिजिटल अभियान नजर नहीं आया। Bengal Elections 2026 : कैंपेन खत्म होते ही PM मोदी का ममता बनर्जी को चैलेंज! बंगाल में किसकी होगी जीत की हंसी? बंगाल में TMC, तमिलनाडु में क्षेत्रीय दल सक्रिय पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने मेटा प्लेटफॉर्म पर लगभग 1.8 करोड़ रुपये खर्च किए। हालांकि गूगल पर उसकी सक्रियता कम रही। वहीं तमिलनाडु में DMK और AIADMK ने क्रमशः करीब 0.9 करोड़ और 0.7 करोड़ रुपये मेटा पर खर्च किए। इन दलों की गूगल पर मौजूदगी लगभग न के बराबर रही। डिजिटल प्रचार क्यों बन रहा बड़ा हथियार? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए पार्टियां कम समय में लाखों लोगों तक पहुंच सकती हैं। अलग-अलग वर्गों, उम्र और इलाकों के हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। यही वजह है कि अब पार्टियां डिजिटल प्रचार पर लगातार ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं। AAP Punjab Crisis : पंजाब में AAP पर मंडराया सियासी संकट? 7 सांसदों के जाने के बाद MLA टूट की अटकलें तेज अब बदल चुकी चुनावी रणनीति एक समय था जब चुनावी ताकत भीड़ और बैनरों से मापी जाती थी, लेकिन अब मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाले विज्ञापन भी जीत-हार तय करने लगे हैं। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि BJP इस नए दौर की राजनीति में सबसे आक्रामक रणनीति अपना रही है, जबकि बाकी दल अभी भी काफी पीछे नजर आ रहे हैं।

अपने ही कानून में फंस जाते Raghav Chadha? जानिये क्या है 4 साल पुराना बिल जो आज बना चर्चा का विषय

Raghav Chadha

Raghav Chadha : नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के ऐलान के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार वजह सिर्फ उनका दल बदलना नहीं, बल्कि उनका 4 साल पुराना एक विधेयक है। कहा जा रहा है कि अगर राघव चड्ढा का वही प्रस्ताव आज कानून बन गया होता, तो शायद वह खुद इस तरह पार्टी नहीं बदल पाते। अब राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या चड्ढा अपने ही बनाए नियमों में फंस जाते?’ आइये जानते हैं क्या था वो बिल… 7 सांसदों के साथ बदला पाला हाल ही में राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ मिलकर BJP में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने इसके लिए दल-बदल कानून के मौजूदा दो-तिहाई नियम का सहारा लिया। राज्यसभा में AAP के 10 सांसद हैं और 7 सांसदों का एक साथ जाना इस नियम के तहत वैध माना जा सकता है। इसी वजह से उनकी सदस्यता पर तत्काल खतरा नहीं माना जा रहा। Hormuz Strait Deal : होर्मुज खोलने की डील या नई चाल? ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा प्रस्ताव, दुनिया की नजर ट्रंप पर अब पुराना बिल क्यों चर्चा में है? राजनीतिक चर्चा इसलिए तेज हो गई है क्योंकि अगस्त 2022 में राज्यसभा पहुंचने के कुछ ही महीनों बाद राघव चड्ढा ने एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था। इस बिल में उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून को और सख्त बनाने की मांग की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि नेताओं की खरीद-फरोख्त और सत्ता बचाने-बनाने के खेल से लोकतंत्र कमजोर होता है। अगर बिल पास हो जाता तो क्या होता? यदि राघव चड्ढा का वह बिल कानून बन गया होता, तो पार्टी विलय के लिए दो-तिहाई नहीं बल्कि तीन-चौथाई यानी 3/4 सांसदों का समर्थन जरूरी होता। इसका मतलब यह है कि 10 सांसदों वाली पार्टी में 7 नहीं, बल्कि कम से कम 8 सांसदों का साथ चाहिए होता। ऐसे में मौजूदा हालात में उनका BJP में जाना आसान नहीं होता। AAP Punjab Crisis : पंजाब में AAP पर मंडराया सियासी संकट? 7 सांसदों के जाने के बाद MLA टूट की अटकलें तेज 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक का प्रस्ताव राघव चड्ढा ने अपने बिल में यह भी सुझाव दिया था कि जो सांसद या विधायक चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलता है, उसे अगले 6 साल तक कोई चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। अगर यह नियम लागू होता, तो दल बदलने वाले नेताओं पर बड़ा असर पड़ता। अब विपक्ष इसी बात को लेकर चड्ढा पर तंज कस रहा है। रिसॉर्ट पॉलिटिक्स रोकने की भी मांग की थी चड्ढा ने अपने बिल में होटल और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार गिराने या बचाने के लिए विधायकों-सांसदों को छिपाने की राजनीति खत्म होनी चाहिए। प्रस्ताव था कि समर्थन वापस लेने के 7 दिन के भीतर जनप्रतिनिधियों को सदन अध्यक्ष के सामने पेश होना होगा, नहीं तो अयोग्य घोषित किया जाए। अब सियासत में उठ रहे सवाल आज जब राघव चड्ढा खुद उसी दो-तिहाई नियम का इस्तेमाल कर BJP में शामिल हुए हैं, तो विरोधी दल इसे राजनीतिक विडंबना बता रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि जो नेता कल तक दल-बदल कानून सख्त करने की बात कर रहे थे, वही आज उसी पुराने नियम का फायदा क्यों उठा रहे हैं। MP Human Trafficking : 6 दिन की बच्ची को बार-बार बेचा! 2 साल की उम्र में सुनसान हाईवे पर फेंका, दिल दहला देने वाली कहानी आगे क्या? राघव चड्ढा का 2022 वाला बिल आज भी लंबित बताया जा रहा है। लेकिन उनका मौजूदा फैसला राजनीति में नई बहस छेड़ चुका है। अब देखने वाली बात यह होगी कि BJP में उनकी नई भूमिका क्या होती है और क्या यह मामला आगे भी सियासी मुद्दा बना रहता है।

Hormuz Strait Deal : होर्मुज खोलने की डील या नई चाल? ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा प्रस्ताव, दुनिया की नजर ट्रंप पर

Hormuz Strait Deal

Hormuz Strait Deal : तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच सीधी जंग फिलहाल थमी हुई जरूर है, लेकिन हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। युद्धविराम जैसी स्थिति के बीच अब ईरान ने एक बड़ा प्रस्ताव देकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज की खाड़ी को जहाजों के लिए फिर से खोलने को तैयार है, लेकिन इसके बदले अमेरिका को उस पर लगी आर्थिक पाबंदियां हटानी होंगी। इस प्रस्ताव के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि होर्मुज सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। अमेरिका तक पहुंचा प्रस्ताव सूत्रों के मुताबिक ईरान ने अपना यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है। इसमें कहा गया है कि यदि अमेरिका आर्थिक नाकेबंदी हटाए और युद्ध जैसे हालात खत्म करे तो ईरान होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही बहाल कर देगा। हालांकि ईरान ने साथ ही यह भी साफ कर दिया कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत अभी नहीं होगी, वह बाद में होगी। यानी पहले प्रतिबंध हटाओ, फिर समुद्री रास्ता खोलेंगे और बाद में परमाणु मुद्दे पर चर्चा करेंगे। US-Iran Peace Talks : अमेरिकी अधिकारियों का पाकिस्तान दौरा कैंसल, ट्रंप बोले-18 घंटे प्लेन में बैठकर बेकार बातें नहीं करेंगे ट्रंप की पहली शर्त: परमाणु हथियार नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान की तरफ से “पहले से बेहतर प्रस्ताव” आया है। लेकिन उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ट्रंप का कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार किसी भी हालत में नहीं होने चाहिए। यही वजह है कि फिलहाल अमेरिका इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा। माना जा रहा है कि ट्रंप पहले परमाणु आश्वासन चाहते हैं, उसके बाद ही आर्थिक राहत पर विचार करेंगे। तेल की कीमतों ने बढ़ाई दुनिया की चिंता होर्मुज की खाड़ी बंद होने का असर पूरी दुनिया झेल रही है। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल, खाद्य सामग्री, परिवहन और महंगाई पर पड़ा है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि महंगे तेल से आम जनता पर बोझ बढ़ता है। अमेरिका में भी बढ़ती महंगाई ट्रंप सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बन रही है। Iran-US Peace Talks : अमेरिका-ईरान बातचीत का दूसरा दौर! सीधी मुलाकात से ईरान का इनकार ईरान की कूटनीति तेज ईरान के विदेश मंत्री अराघची इस पूरे संकट के बीच लगातार सक्रिय हैं। वह दो बार पाकिस्तान जा चुके हैं, ओमान का दौरा कर चुके हैं और कतर व सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर चुके हैं। सोमवार को उन्होंने रूस जाकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात भी की। ईरान कोशिश कर रहा है कि क्षेत्रीय देशों का समर्थन जुटाकर अमेरिका पर दबाव बनाया जाए। साथ ही ओमान से भी वह नई समुद्री व्यवस्था पर सहमति चाहता है। रूस खुलकर साथ लेकिन कितनी मदद करेगा? रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के प्रति समर्थन जताया है और कहा कि ईरानी जनता बहादुरी से लड़ रही है। उन्होंने मध्य पूर्व में शांति लाने की बात भी कही है। हालांकि यह अब तक साफ नहीं है कि रूस इस संकट में ईरान को कितनी ठोस मदद देगा। फिर भी रूस का नैतिक समर्थन अमेरिका के लिए एक रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है। Dhirendra Shastri : 4 बच्चे पैदा करें और एक RSS को समर्पित कर दें.. धीरेंद्र शास्त्री का बयान लेबनान और इजरायल मोर्चे पर भी तनाव जारी ईरान-अमेरिका तनाव के साथ-साथ लेबनान में भी हालात सामान्य नहीं हैं। वहां इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम तीन हफ्तों के लिए बढ़ाया गया है। लेकिन क्षेत्र में कई मोर्चों पर तनाव बना रहने से शांति की संभावना अभी कमजोर नजर आ रही है। होर्मुज इतना अहम क्यों है? होर्मुज की खाड़ी दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यह फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार है, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत जैसे देश अपना तेल इसी रास्ते से दुनिया तक पहुंचाते हैं। ईरान इस जलमार्ग के किनारे स्थित है, इसलिए उसके पास इसे प्रभावित करने की रणनीतिक क्षमता है। यही वजह है कि इस रास्ते पर तनाव का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ता है। 8th Pay Commission : 18 हजार से अब 72,000 रुपये होगी सैलरी! 8वें वेतन आयोग को लेकर आया बड़ा अपडेट अब सबकी नजर ट्रंप के अगले कदम पर ईरान ने चाल चल दी है, अब फैसला अमेरिका के पाले में है। यदि ट्रंप इस प्रस्ताव को मानते हैं तो तेल बाजार को राहत मिल सकती है और दुनिया में तनाव घट सकता है। लेकिन यदि अमेरिका ने सख्ती बरकरार रखी, तो आने वाले दिनों में हालात फिर बिगड़ सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजर व्हाइट हाउस पर टिकी है।

OBC Reservation Hearing : जबलपुर हाईकोर्ट में आज OBC 27% आरक्षण पर सुनवाई, 86 याचिकाओं पर नजरें टिकीं

OBC Reservation Hearing : जबलपुर। मध्यप्रदेश में लंबे समय से चर्चा का विषय बने OBC 27% आरक्षण मामले पर आज जबलपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले को सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य की कई भर्तियां और नियुक्तियां इस फैसले से प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए लाखों युवाओं और पिछड़ा वर्ग समाज की नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं। विशेष बेंच करेगी सुनवाई जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की विशेष बेंच करेगी। सुनवाई सुबह 11 बजे से शुरू होगी। अदालत में आज OBC आरक्षण से जुड़ी कुल 86 याचिकाओं पर विचार किया जाएगा। इतने बड़े स्तर पर एक साथ सुनवाई होने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। Vikas Hirve Suicide Case : पत्नी स्नेहा सोलंकी और ससुराल वालों पर कार्रवाई की मांग, सड़कों पर उतरे लोग पहले विरोध पक्ष के वकीलों को सुना जाएगा सुनवाई की शुरुआत OBC 27% आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं से होगी। सबसे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अदालत में अपना पक्ष रखेंगे। विपक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी, अंशुमान सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अमन लेखी दलीलें पेश करेंगे। माना जा रहा है कि आरक्षण सीमा, संवैधानिक प्रावधान और पूर्व फैसलों का हवाला दिया जा सकता है। फिर सरकार और समर्थक पक्ष रखेंगे जवाब विरोध पक्ष की दलीलों के बाद राज्य सरकार और OBC आरक्षण के समर्थन में याचिका दायर करने वालों को सुना जाएगा। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और एएसजी के.एम. नटराजन अदालत में पक्ष रखेंगे। वहीं OBC आरक्षण के समर्थन में दायर याचिकाकर्ताओं की ओर से वरुण ठाकुर और शशांक रतनू अपनी दलीलें पेश करेंगे। सरकार की कोशिश रहेगी कि 27% आरक्षण को न्यायसंगत और संवैधानिक बताया जाए। Scindia Home Remedy : AC छोड़ें प्याज साथ रखें… तेज गर्मी में लू लगने से बचने के लिए केंद्रीय मंत्री सिंधिया का देसी नुस्खा सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट पहुंचा मामला यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था। 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय से जुड़े 86 मामलों को हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया था, ताकि सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो सके। इसके बाद से आज की सुनवाई को निर्णायक चरण माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी हलचल OBC आरक्षण का मुद्दा मध्यप्रदेश की राजनीति में भी बेहद संवेदनशील है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी रणनीति बनाए हुए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट की सुनवाई का असर सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में सियासी माहौल पर भी इसका असर दिख सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत आज क्या रुख अपनाती है।

Vikas Hirve Suicide Case : पत्नी स्नेहा सोलंकी और ससुराल वालों पर कार्रवाई की मांग, सड़कों पर उतरे लोग

Vikas Hirve Suicide Case

Vikas Hirve Suicide Case : मध्य प्रदेश। भोपाल में विकास हिरवे आत्महत्या मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। मामले में न्याय की मांग को लेकर परिजन, समाजजन और समर्थक सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने पत्नी स्नेहा सोलंकी और उसके परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद शहर में लोगों के बीच नाराजगी और आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है। मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर उठाया कदम परिजनों का आरोप है कि विकास हिरवे लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना का सामना कर रहे थे। इसी तनाव और परेशानियों से तंग आकर उन्होंने आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाया। परिवार का कहना है कि अगर समय रहते मामले को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद विकास की जान बचाई जा सकती थी। Scindia Home Remedy : AC छोड़ें प्याज साथ रखें… तेज गर्मी में लू लगने से बचने के लिए केंद्रीय मंत्री सिंधिया का देसी नुस्खा आत्महत्या से पहले बनाया भावुक वीडियो बताया जा रहा है कि विकास हिरवे ने आत्महत्या से पहले एक मार्मिक वीडियो भी बनाया था। इस वीडियो में उन्होंने अपनी पत्नी स्नेहा सोलंकी द्वारा प्रताड़ना का जिक्र किया। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। लोग इसे गंभीर साक्ष्य मानते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। पत्नी और परिवार पर कार्रवाई की मांग प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका आरोप है कि विकास को लगातार मानसिक रूप से परेशान किया गया, जिसकी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि पत्नी स्नेहा सोलंकी और उसके परिवार की भूमिका की गहराई से जांच हो। MP Human Trafficking : 6 दिन की बच्ची को बार-बार बेचा! 2 साल की उम्र में सुनसान हाईवे पर फेंका, दिल दहला देने वाली कहानी पुलिस को सौंपा ज्ञापन विकास हिरवे के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर न्यायिक जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्हें निष्पक्ष जांच पर भरोसा है और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।