OBC Reservation Hearing : जबलपुर। मध्यप्रदेश में लंबे समय से चर्चा का विषय बने OBC 27% आरक्षण मामले पर आज जबलपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले को सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य की कई भर्तियां और नियुक्तियां इस फैसले से प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए लाखों युवाओं और पिछड़ा वर्ग समाज की नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं।
विशेष बेंच करेगी सुनवाई
जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की विशेष बेंच करेगी। सुनवाई सुबह 11 बजे से शुरू होगी। अदालत में आज OBC आरक्षण से जुड़ी कुल 86 याचिकाओं पर विचार किया जाएगा। इतने बड़े स्तर पर एक साथ सुनवाई होने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
पहले विरोध पक्ष के वकीलों को सुना जाएगा
सुनवाई की शुरुआत OBC 27% आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं से होगी। सबसे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अदालत में अपना पक्ष रखेंगे। विपक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी, अंशुमान सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अमन लेखी दलीलें पेश करेंगे। माना जा रहा है कि आरक्षण सीमा, संवैधानिक प्रावधान और पूर्व फैसलों का हवाला दिया जा सकता है।
फिर सरकार और समर्थक पक्ष रखेंगे जवाब
विरोध पक्ष की दलीलों के बाद राज्य सरकार और OBC आरक्षण के समर्थन में याचिका दायर करने वालों को सुना जाएगा। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और एएसजी के.एम. नटराजन अदालत में पक्ष रखेंगे। वहीं OBC आरक्षण के समर्थन में दायर याचिकाकर्ताओं की ओर से वरुण ठाकुर और शशांक रतनू अपनी दलीलें पेश करेंगे। सरकार की कोशिश रहेगी कि 27% आरक्षण को न्यायसंगत और संवैधानिक बताया जाए।
सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट पहुंचा मामला
यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था। 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय से जुड़े 86 मामलों को हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया था, ताकि सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो सके। इसके बाद से आज की सुनवाई को निर्णायक चरण माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी हलचल
OBC आरक्षण का मुद्दा मध्यप्रदेश की राजनीति में भी बेहद संवेदनशील है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी रणनीति बनाए हुए हैं। ऐसे में हाईकोर्ट की सुनवाई का असर सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में सियासी माहौल पर भी इसका असर दिख सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत आज क्या रुख अपनाती है।