Dewas Factory Blast : मध्य प्रदेश। देवास के टोंककला इलाके में गुरुवार सुबह हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। सुबह करीब 11:30 बजे हुए धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के मकानों की दीवारें तक हिल गईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार हादसे में 8 से 10 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि कलेक्टर ने फिलहाल चार मौतों की पुष्टि की है। एक दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
घटनास्थल पर पहुंचा प्रशासनिक अमला
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह, देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह और उज्जैन DIG नवनीत भसीन मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
अधिकारियों ने घायलों को तत्काल बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। घटनास्थल की घेराबंदी कर दी गई है ताकि फॉरेंसिक टीम और जांच एजेंसियां सबूत जुटा सकें। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि रिहायशी इलाके के भीतर इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखने की अनुमति कैसे दी गई।
सड़क पर बिखरे शवों के टुकड़े, लोगों में दहशत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका बेहद भयावह था। विस्फोट के बाद सड़क पर मांस के चिथड़े और शरीर के टुकड़े बिखरे पड़े थे। कई शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और भगदड़ का माहौल बन गया।
कई घायल मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। कुछ लोग बदहवास हालत में खुद पैदल फैक्ट्री से बाहर निकलते दिखाई दिए। कई घायलों के कपड़े उनकी त्वचा से चिपक गए थे। घायलों को तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है।
फैक्ट्री में बड़ी संख्या में महिलाएं करती थीं काम
स्थानीय लोगों के मुताबिक फैक्ट्री में करीब 200 से ज्यादा महिलाएं काम करती थीं। वहीं कुल मजदूरों की संख्या 400 से 500 के बीच बताई जा रही है। हादसे के बाद तीन महिलाओं के लापता होने की भी सूचना सामने आई है। प्रशासन उनकी तलाश में जुटा हुआ है।
इलाके के लोगों का कहना है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जा रही थी। ग्रामीणों का आरोप है कि खुले में बारूद रखकर पटाखे बनाए जाते थे, जिससे हमेशा हादसे का खतरा बना रहता था।
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ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी गुस्सा देखने को मिला। लोगों नेआरोप लगाया कि फैक्ट्री अवैध तरीके से संचालित हो रही थी। कई बार शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों ने फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का दावा है कि फैक्ट्री को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था।
खुले में बारूद मिलने से बढ़े सवाल
हादसे के बाद घटनास्थल पर भारी मात्रा में खुले में बारूद पड़े होने की बात सामने आई है। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन अब फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा मानकों और विस्फोटक सामग्री के भंडारण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है। फॉरेंसिक टीम विस्फोट के असली कारणों का पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।