Hindu Burial Customs : देश। सनातन (हिंदू) धर्म में मृत्यु के बाद व्यक्ति के शरीर का अग्नि संस्कार (दाह संस्कार) करना सबसे सामान्य और प्रचलित परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मानव शरीर पांच महान तत्वों अग्नि, जल, पृथ्वी, आकाश और वायु से मिलकर बना होता है। अग्नि संस्कार से शरीर इन पांचों तत्वों में विलीन हो जाता है और आत्मा को मुक्ति मिलती है। लेकिन शास्त्रों में कुछ विशेष परिस्थितियों में अग्नि संस्कार के बजाय दफनाने (समाधि देने) का प्रावधान भी दिया गया है।
बच्चों को दफनाने का कारण
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, जिन बच्चों की उम्र 14 साल से कम होती है, उनका अग्नि संस्कार नहीं किया जाता। उन्हें दफनाया जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि छोटे बच्चों का मन बहुत शुद्ध और निष्पाप होता है।
उन पर कोई बड़ा पाप या कर्म नहीं होता। माना जाता है कि उनकी आत्मा मृत्यु के बाद सीधे स्वर्ग लोक चली जाती है और उन्हें मोक्ष मिल जाता है। इसलिए अग्नि की जरूरत नहीं पड़ती।
Vastu Tips : सुख-समृद्धि और ग्रोथ के लिए अपनाएं ये आसान वास्तु उपाय, दूर होगी घर की नकारात्मकता
गर्भवती महिलाओं को दफनाने की वजह
हिंदू धर्म में गर्भवती महिलाओं की मृत्यु होने पर उनके शव को जलाने के बजाय दफनाया जाता है। इस दौरान महिला एक पवित्र शिशु को जन्म देने वाली होती है। शिशु अभी तक किसी पाप या पुण्य से नहीं जुड़ा होता इसलिए मां और अजन्मे शिशु दोनों को दफनाया जाता है।
शास्त्रों में इसे बेहद पवित्र अवस्था माना गया है। दूसरी वजह यह भी है कि शिशु के मरने के बाद उसे जलाया नहीं जाता, उसी प्रकार अजन्मे शिशु को अंतिम संस्कार में मां के साथ ही दफन किया जाता है।
Financial Growth Vastu Tips : आर्थिक तंगी से हैं परेशान, इन वास्तु टिप्स से घर में होगी धनवर्षा
साधु-संतों और संन्यासियों का नियम
साधु-संतों और संन्यासियों का दाह संस्कार नहीं किया जाता। उन्हें समाधि दी जाती है। कारण यह है कि वे जीवनकाल में ही मोह-माया से मुक्ति प्राप्त कर चुके होते हैं। वे पहले से ही पवित्र अवस्था में होते हैं, इसलिए उनका शरीर अग्नि के बजाय मिट्टी में विलीन किया जाता है।
सनातन धर्म में अग्नि संस्कार मुख्य परंपरा है, लेकिन बच्चों, गर्भवती महिलाओं और साधु-संतों के मामले में दफनाने की विशेष व्यवस्था है। ये नियम शुद्धता, पवित्रता और आत्मा की मुक्ति की अवधारणा पर आधारित हैं। हालांकि, ये सब धार्मिक मान्यताएं हैं और विभिन्न सम्प्रदायों में थोड़े भिन्नताएं हो सकती हैं।
डिस्क्लेमर- यह खबर मान्यताओं पर आधारित है aayudh media इसकी पुष्टि नहीं करता।