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Dewas Blast Update : देवास फैक्ट्री ब्लास्ट में 5 मौतें और 2 मजदूर लापता, पूरी फैक्ट्री बने बिना ही शुरू हुआ बारूद का काम

Dewas Blast Update

Dewas Blast Update : मध्य प्रदेश। देवास के टोंक कलां क्षेत्र में हुई पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट की घटना के बाद अब दो मजदूरों के लापता होने की खबर सामने आई है। घायल मजदूरों ने बताया कि उनके साथी राजू और बाबुल विस्फोट के बाद से दिखाई नहीं दिए हैं। दोनों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं जांच रिपोर्ट्स में सामने आया कि, फैक्ट्री पूरी बने बिना ही उसमें बारूद बनाने का काम शुरू कर दिया गया था। बता दें कि, इस दर्दनाक हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है। मृतकों के शव परिजनों को सौंप दिए गए। फिलहाल प्रशासन और पुलिस दोनों की तलाश में जुटे हुए हैं।

खाना खाते समय हुई आखिरी बातचीत

देवास जिला अस्पताल में भर्ती घायल मजदूर शशि कुमार ने बताया कि ब्लास्ट से कुछ देर पहले वह राजू और बाबुल के साथ खाना खा रहे थे। बातचीत के बाद दोनों फैक्ट्री की ओर चले गए, लेकिन धमाके के बाद वे कहीं नजर नहीं आए।

शशि कुमार के मुताबिक, हादसे के बाद दोनों के मोबाइल भी बंद आ रहे हैं। उनके परिवारों से संपर्क किया गया और अलग-अलग अस्पतालों में भी जानकारी जुटाई गई, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला।

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बिहार के रहने वाले थे ज्यादातर मजदूर

घायल मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री में काम करने वाले अधिकतर मजदूर बिहार के अरहरिया जिले के रहने वाले थे। कोई दो महीने पहले तो कोई चार महीने पहले रोजगार की तलाश में देवास आया था। लापता मजदूर राजू और बाबुल भी बिहार के अरहरिया जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। हादसे की खबर के बाद गांव में भी चिंता और डर का माहौल बना हुआ है।

अब तक 5 मजदूरों की मौत

इस भीषण हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत हो चुकी है। मृतकों में चार मजदूर बिहार के रहने वाले थे, जबकि एक मजदूर उत्तर प्रदेश के लखनऊ का निवासी था। मृतकों की पहचान सुमित, धीरज, अमर, गुड्डू और सनी के रूप में हुई है। वहीं हादसे में घायल कई मजदूरों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है। देवास जिला अस्पताल में 11 मजदूर भर्ती हैं, जबकि गंभीर घायलों को अमलतास अस्पताल में रखा गया है।

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जांच में बड़ा खुलासा

श्रम विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक फैक्ट्री का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था, लेकिन इसके बावजूद वहां पटाखों का निर्माण शुरू कर दिया गया था।

जहां सुरक्षा मानकों की जांच और टेस्टिंग होनी चाहिए थी, वहां तेजी से बारूद का काम चल रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी की।

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मैग्नीशियम पाउडर से हुआ धमाका?

श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि तकनीकी जांच में आशंका जताई गई है कि मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने से केमिकल रिएक्शन हुआ, जिससे जोरदार धमाका हुआ।

एक दूसरी संभावना यह भी बताई गई कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज पैदा हुआ, जिससे “सेल्फ इग्निशन” यानी स्वतः आग लगने की स्थिति बनी। फिलहाल विशेषज्ञ टीम मौके से सबूत जुटाकर विस्तृत जांच कर रही है।

सीएम ने की घायलों से मुलाकात

हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री मोहन यादव नई दिल्ली से सीधे इंदौर पहुंचे। उन्होंने चोइथराम अस्पताल और एमवाय अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली और साफ निर्देश दिए कि इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को प्रभावित परिवारों की मदद जल्द पहुंचाने के लिए भी कहा गया है।

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इसके अलावा राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। साथ ही सभी घायलों का मुफ्त इलाज कराने की बात भी कही गई है।

फैक्ट्री के पास विस्फोटक लाइसेंस था, लेकिन जरूरी अनुमति नहीं

रिपोर्ट में सामने आया कि फैक्ट्री प्रबंधन के पास कलेक्टर द्वारा जारी विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी रजिस्ट्रेशन और अन्य कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी। बिना सुरक्षा मानकों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए फैक्ट्री में खतरनाक तरीके से बारूद का काम किया जा रहा था।

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