CG Conversions Expose : बस्तर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों से सामने आई एक विस्तृत पड़ताल ने राज्य के कई हिस्सों की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार जशपुर, अंबिकापुर, रायगढ़ और बस्तर जैसे क्षेत्रों में गांव-गांव में धार्मिक पहचान तेजी से बदल रही है। कई जगहों पर हालात ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और मान्यताओं की जगह नए धार्मिक प्रभाव मजबूत होते दिख रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक ढांचे और जीवनशैली में भी बड़ा परिवर्तन दर्शा रहा है।
परंपराओं में दिख रहा बड़ा बदलाव
रिपोर्ट के अनुसार, कई गांवों में मंदिरों की संख्या बेहद कम या न के बराबर है, जबकि चर्चों की संख्या अधिक है। इसके साथ ही पारंपरिक रीति-रिवाजों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले दाह संस्कार किया जाता था, अब वहां दफनाने की प्रथा अपनाई जा रही है और कब्रों पर क्रॉस बनाए जा रहे हैं। यह बदलाव सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मिशनरी गतिविधियां और सामाजिक पहुंच
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गरीब, बीमार और समाज से उपेक्षित वर्ग मिशनरी गतिविधियों के केंद्र में हैं। गांवों में कई जगह पास्टर नियुक्त किए गए हैं, जो लोगों के बीच जाकर धार्मिक प्रचार करते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए भी लोगों तक पहुंच बनाई जा रही है, जिससे उनका भरोसा जीता जा सके और सामाजिक जुड़ाव बढ़ाया जा सके।
NGO और फॉरेन फंडिंग पर उठे सवाल
केंद्र सरकार के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत राज्य में 146 एनजीओ पंजीकृत हैं, जिनमें से करीब 50 मिशनरी संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनका कार्यक्षेत्र धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा है। हालांकि, इन संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंडिंग और उसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
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जांच में सामने आई फंडिंग की कड़ियां
जांच एजेंसियों की कार्रवाई में यह भी सामने आया कि विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल चर्च निर्माण और पास्टरों की नियुक्ति में किया जा रहा है। बताया गया कि विदेशों से करोड़ों रुपये की राशि भारत लाई गई, जिसे स्थानीय स्तर पर उपयोग किया गया। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जांच कर रहा है और इसकी गहराई से पड़ताल जारी है।
सरकार का सख्त रुख और नया कानून
इन घटनाओं के बीच राज्य सरकार ने धर्मांतरण के मामलों को नियंत्रित करने के लिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 लाने की पहल की है। इस विधेयक का उद्देश्य बलपूर्वक, प्रलोभन या धोखे से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।
सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर बहस जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। जहां एक ओर विकास और सुविधाओं की कमी है, वहीं दूसरी ओर बाहरी सहायता के जरिए लोगों तक पहुंच बनाई जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में इस विषय पर व्यापक बहस और निष्पक्ष जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।