Ceasefire Update : वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। ट्रम्प के अनुसार दोनों देशों के बीच शांति समझौता अब काफी करीब है और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि ईरानी मीडिया ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे निराधार बताया है।
डील से हालात सामान्य होने की उम्मीद
ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर यह समझौता हो जाता है, तो तेल की सप्लाई फिर से सामान्य हो जाएगी और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर समझौता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होता है, तो वह वहां की यात्रा भी कर सकते हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया की नजर
यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा और परमाणु हथियार दोनों बनाए जा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी IAEA के मुताबिक ईरान के पास 5 से 6 टन के बीच एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। फिलहाल 120 से 130 किलोग्राम यूरेनियम को 60% तक शुद्ध किया जा चुका है, जिसे ‘नियर वेपन ग्रेड’ माना जाता है। यदि इसे 90% तक एनरिच कर लिया जाए, तो इससे परमाणु बम बनाया जा सकता है।
यूरेनियम एनरिचमेंट का स्तर और उपयोग
3-5% तक एनरिच्ड यूरेनियम का इस्तेमाल न्यूक्लियर पावर प्लांट में बिजली बनाने के लिए किया जाता है। 20% तक एनरिचमेंट को हाई लेवल माना जाता है, लेकिन इससे हथियार नहीं बनते। 60% एनरिचमेंट को खतरनाक स्तर माना जाता है, जबकि 90% या उससे ज्यादा होने पर इसे वेपन ग्रेड कहा जाता है।
इजराइल-लेबनान में 10 दिन का युद्धविराम लागू
इसी बीच इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर लागू हो गया है। यह युद्धविराम भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 3:30 बजे से शुरू हुआ। ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के बाद यह सहमति बनवाई।
सीजफायर की शर्तें और चुनौतियां
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार रहेगा, लेकिन वह लेबनान पर जमीन, हवा या समुद्र से हमला नहीं करेगा। वहीं लेबनान सरकार पर दबाव है कि वह हिजबुल्लाह को इजराइल पर हमले से रोके, हालांकि संगठन पर उसका सीधा नियंत्रण नहीं है।
सीजफायर के बाद लेबनान में लौटने लगे लोग
सीजफायर लागू होने के बाद लेबनान के सिडोन शहर में लोग अपने घरों को लौटने लगे हैं। सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी गईं और लोगों ने झंडे लहराकर इस राहत का स्वागत किया। इस संघर्ष के कारण दक्षिणी लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए थे।
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अमेरिकी सेना हाई अलर्ट पर, सैन्य तैयारियां तेज
संयुक्त राज्य अमेरिका मध्य कमान (United States Central Command) ने बताया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है। क्षेत्र में F-16 लड़ाकू विमान और बड़ी संख्या में सैनिक तैनात हैं। अमेरिका ने ईरान की नाकेबंदी के लिए 12 युद्धपोत, 100 विमान और 10,000 से अधिक सैनिक तैनात किए हैं।
ईरान की सैन्य क्षमता अब भी बरकरार
अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी के अनुसार, हमलों के बावजूद ईरान के पास अब भी हजारों मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं। एजेंसी प्रमुख जेम्स एडम्स ने बताया कि ईरान समर्थित समूह अमेरिकी ठिकानों पर सैकड़ों हमले कर चुके हैं।
चीन की भूमिका पर भी नजर
रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया संघर्ष के दौरान चीन ईरान को एडवांस रडार सिस्टम देने पर विचार कर रहा था। इससे ईरान की निगरानी और रक्षा क्षमता मजबूत हो सकती थी।
ट्रम्प ने सैन्य कार्रवाई को बताया जरूरी
ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि यह एक जरूरी कदम था। उन्होंने कहा कि अगर यह कार्रवाई नहीं की जाती, तो हालात और बिगड़ सकते थे।
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मोदी से बातचीत का जिक्र
ट्रम्प ने पीएम नरेंद्र मोदी को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि हाल ही में दोनों के बीच फोन पर अच्छी बातचीत हुई। इस दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखने पर चर्चा हुई।
ईरानी मीडिया ने किया पलटवार
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने ट्रम्प के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति हवाई किले बना रहे हैं। उन्होंने एक कहावत के जरिए यह संदेश दिया कि ट्रम्प ऐसी उम्मीदें जता रहे हैं जिनका जमीनी आधार नहीं है।
आगे क्या होगा?
ट्रम्प ने संकेत दिया कि ईरान के साथ अगली आमने-सामने की बातचीत जल्द हो सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो संघर्ष फिर से शुरू हो सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस संभावित डील और मिडिल ईस्ट के हालात पर टिकी हुई है।