Nashik TCS Case : नई दिल्ली। महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए कथित धर्म परिवर्तन मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। यह मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) तक पहुंच गया है, जहां एक नई याचिका दाखिल कर जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन को गंभीर सुरक्षा खतरा बताया गया है।
पहले से चल रहे मामले में नई अर्जी
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला पहले से ही लंबित है। इसी मामले में अब नासिक के TCS (Tata Consultancy Services) से जुड़े विवाद को लेकर नई याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता वकील ने अदालत में कहा कि यह मामला संगठित स्तर पर हो रहे धर्म परिवर्तन का उदाहरण है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
याचिका में कहा गया है कि जबरदस्ती या धोखे से धर्म परिवर्तन सिर्फ धार्मिक मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। इसमें दावा किया गया है कि अगर यह काम किसी संगठित अभियान के तहत होता है, तो इसे “आतंकवादी कृत्य” के रूप में देखा जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के मामलों के पीछे विदेशी फंडिंग हो सकती है, जिसका उद्देश्य देश के धार्मिक जनसंख्या संतुलन को प्रभावित करना और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करना है।
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धार्मिक स्वतंत्रता पर भी उठे सवाल
याचिका में कहा गया है कि संविधान सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता के अधीन है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को जबरन या धोखे से धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अदालत से की गई प्रमुख मांगें
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से दो प्रमुख मांगें की गई हैं। पहली, केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए जाएं कि वे जबरन या धोखे से होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाएं। दूसरी, ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों (स्पेशल कोर्ट) का गठन किया जाए, ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो सके।
देशभर में बढ़ी चर्चा
नासिक से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद से ही यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई के बाद आगे की दिशा तय होगी, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।