Bhojshala Verdict : मध्य प्रदेश। धार स्थित विवादित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद मामले में आज बड़ा फैसला आने की संभावना जताई जा रही है। इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब सभी की निगाहें कोर्ट के निर्णय पर टिकी हुई हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सोशल मीडिया के जरिए फैसले की संभावना की जानकारी दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क है।
सभी पक्षों ने शांति बनाए रखने की अपील की
मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से वीडियो जारी कर लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और एडवोकेट विनय जोशी ने कहा कि सभी को न्यायपालिका पर विश्वास रखना चाहिए और जो भी फैसला आए उसे स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने का अनुरोध किया है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर अपुष्ट जानकारी साझा न करें।
धार और इंदौर में पुलिस अलर्ट पर
फैसले को लेकर धार और इंदौर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इंदौर में राजवाड़ा सहित कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं धार जिला प्रशासन भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निगरानी बढ़ा दी गई है और भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। शुक्रवार होने के कारण मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है, क्योंकि मुस्लिम समाज द्वारा भोजशाला परिसर में जुम्मे की नमाज भी अदा की जाती है।
साल 2022 में शुरू हुआ था कानूनी विवाद
यह पूरा मामला साल 2022 में तब शुरू हुआ था, जब रंजना अग्निहोत्री और उनके साथियों ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूजा-अर्चना के पूर्ण अधिकार देने की मांग की गई थी। इसके बाद मामला लगातार अदालत में चल रहा है। साल 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी किया था।
वसंत पंचमी पर पूजा की मिली थी अनुमति
23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर में दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। इसके बाद 6 अप्रैल 2026 से हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली। इस दौरान हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के सामने रखे। ASI ने भी अपनी सर्वे रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किए।
हिंदू पक्ष ने मंदिर होने के दिए तर्क
हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी और आशीष गोयल ने भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताया। कोर्ट में ऐतिहासिक दस्तावेज, शिलालेख, स्तंभ और देवी सरस्वती से जुड़े प्रतीकों का हवाला दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ब्रिटिशकालीन गजेटियर और इतिहासकारों के दस्तावेजों में भोजशाला को विद्या और मां सरस्वती के केंद्र के रूप में वर्णित किया गया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि परिसर में मिले कई स्थापत्य अवशेष इस्लामी काल से पहले के हैं और मंदिर शैली से मेल खाते हैं। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ का हवाला देते हुए कहा कि भोजशाला की संरचना उसमें बताए गए मंदिर निर्माण मानकों से मेल खाती है।
मुस्लिम पक्ष ने ASI सर्वे रिपोर्ट पर उठाए सवाल
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने ASI सर्वे रिपोर्ट और प्रशासनिक तर्कों पर सवाल उठाए। मुस्लिम पक्ष का कहना था कि परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है और वर्तमान व्यवस्था सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए बनी हुई है।
सलमान खुर्शीद ने कहा कि सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई वीडियोग्राफी और तस्वीरें स्पष्ट नहीं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या मामले में रामलला की मूर्ति मौजूद थी, जबकि भोजशाला में ऐसी कोई मूर्ति स्थापित नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है, जबकि यह मामला हाईकोर्ट में रिट याचिका के रूप में लाया गया है।
याचिका में रखी गईं कई प्रमुख मांगें
हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। इनमें भोजशाला परिसर में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार, मुस्लिम समाज की धार्मिक गतिविधियों पर रोक, केंद्र सरकार द्वारा ट्रस्ट गठन और मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की मांग शामिल है। इसके अलावा 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश को निरस्त करने और परिसर में नमाज पर रोक लगाने की मांग भी याचिका में की गई है।
फैसले को लेकर पूरे प्रदेश में बढ़ी उत्सुकता
भोजशाला विवाद लंबे समय से मध्यप्रदेश का एक संवेदनशील और चर्चित मामला बना हुआ है। ऐसे में आज आने वाला फैसला न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील कर रहा है।