Saubhagya Singh : भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन बचाने और अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने की अपील के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही उनके सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार अगले आदेश तक निरस्त कर दिए गए हैं। सरकार की इस कार्रवाई को शक्ति प्रदर्शन और फिजूल ईंधन खर्च के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है।
700 वाहनों का काफिला बना कार्रवाई की वजह
जानकारी के अनुसार, सौभाग्य सिंह ने पदभार ग्रहण करने के दौरान उज्जैन से भोपाल तक करीब 700 वाहनों का विशाल काफिला निकाला था। इस दौरान कई स्थानों पर लंबा जाम भी देखने को मिला।
सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में इस वाहन रैली की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला सरकार तक पहुंचा। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिस जारी कर दिया।
निगम कार्यालय में प्रवेश और बैठकों पर रोक
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि अंतिम निर्णय होने तक सौभाग्य सिंह निगम कार्यालय या परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्हें निगम की बैठकों में भाग लेने, प्रशासनिक और वित्तीय फैसले लेने तथा कर्मचारियों को निर्देश देने से भी रोक दिया गया है। साथ ही निगम के वाहनों और अन्य सुविधाओं के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार ने इसे शासन की मितव्ययिता नीति और सामूहिक जिम्मेदारी के खिलाफ बताया है।
पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ी सख्ती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में कई मंचों से ईंधन बचाने और अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचने की अपील कर चुके हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई बड़े नेताओं ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम कर दी है।
ऐसे समय में भाजपा नेताओं की भव्य वाहन रैलियों को सरकार और संगठन दोनों ने गंभीरता से लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस तरह के मामलों में और भी सख्ती देखने को मिल सकती है।
BJP किसान मोर्चा अध्यक्ष की नियुक्ति भी रद्द
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भिंड में भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष सज्जन सिंह यादव की नियुक्ति भी महज 18 दिन में निरस्त कर दी गई। पार्टी संगठन अब नेताओं और पदाधिकारियों के सार्वजनिक आयोजनों पर नजर बनाए हुए है। सरकार और संगठन दोनों यह संदेश देना चाहते हैं कि संसाधनों के अनावश्यक उपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दूसरे नेताओं के काफिलों पर भी उठे सवाल
सिर्फ सौभाग्य सिंह ही नहीं, बल्कि अन्य नेताओं के काफिलों को लेकर भी सवाल उठे हैं। मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी लंबे काफिले के साथ खंडवा में नजर आए थे। वहीं भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी लगभग 200 गाड़ियों के काफिले के साथ बगीचा सरकार मंदिर पहुंचे थे।
इसके अलावा मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह और खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष राकेश सिंह जादौन भी चर्चा में रहे। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि वे सीमित लोगों के साथ पहुंचे थे और समर्थकों के वाहनों की जानकारी उन्हें नहीं थी।
डिंडौरी में कारपूलिंग और ईंधन बचत पर जोर
डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अब एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारियों को अलग-अलग वाहनों की बजाय कारपूलिंग करना अनिवार्य होगा। छोटी दूरी के कामों के लिए पैदल चलने, साइकिल और ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-ऑफिस सिस्टम पर जोर दिया गया है। हर महीने सरकारी वाहनों के ईंधन खर्च की समीक्षा होगी और अनावश्यक खर्च पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
ऊर्जा संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान भी शुरू
प्रशासन अब सिर्फ सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहना चाहता। स्कूलों और पंचायतों में भी ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े स्तर पर ईंधन की बचत की जा सकती है और इससे आर्थिक बोझ भी कम होगा।