Bengal Politics : कोलकाता। पश्चिम बंगाल राज्यपाल आर एन रवि ने विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर पिछले कई दिनों से संवैधानिक और राजनीतिक बहस चल रही थी। अब विधानसभा भंग होने के बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है लेकिन क्या राज्यपाल किसी मुख्यमंत्री को हटा सकते हैं। क्या कहता है संविधान? आइये इसे विस्तार से जानते हैं…
पहले जानिये राज्यपाल आर एन रवि द्वारा जारी किये गए आदेश में क्या कहा
राज्यपाल ने जारी किया आधिकारिक आदेश
राज्यपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 की उपधारा 2 के खंड (बी) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए 7 मई 2026 से पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया जाता है। इस फैसले के बाद मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया है और राज्य में नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।
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चुनाव परिणाम के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने भारी बहुमत हासिल किया। पार्टी ने 207 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में सरकार बनाने का रास्ता तैयार किया। वहीं तृणमूल कांग्रेस को सिर्फ 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। सबसे बड़ी चर्चा ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट से हार को लेकर रही, जहां बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया।
ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से किया इनकार
चुनाव नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी जनादेश से नहीं बल्कि साजिश के जरिए हारी है। ममता ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराया गया।
संवैधानिक संकट पर शुरू हुई बहस
ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के बाद राज्य में संवैधानिक स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने कहा कि ऐसी स्थिति में राज्यपाल मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस्तीफा नहीं दिया जाता तो अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू करने की संभावना बन सकती थी।
पूर्व चुनाव आयुक्त ने क्या कहा
एस. वाई. कुरैशी के अनुसार, विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा था। इसके बाद विधानसभा और सरकार दोनों स्वतः समाप्त मानी जातीं। उन्होंने कहा कि संविधान में ऐसी स्थिति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया नहीं दी गई है, जब कोई मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार कर दे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा का विश्वास खोने के बाद सरकार लंबे समय तक पद पर नहीं रह सकती।
क्या राज्यपाल मुख्यमंत्री को हटा सकते हैं?
संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और मंत्री राज्यपाल की इच्छा तक पद पर बने रहते हैं। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब राज्यपाल को मनमाने तरीके से मुख्यमंत्री हटाने का अधिकार नहीं है। संवैधानिक विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार तभी तक पद पर रह सकती है जब तक उसे विधानसभा का विश्वास हासिल हो।
संविधान विशेषज्ञों की राय
लीगल स्कॉलर फैजान मुस्तफा ने कहा कि संविधान सभा में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी। कई सदस्यों ने यह चिंता जताई थी कि राज्यपाल के विवेकाधिकार का दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने बताया कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही वह स्वतः भंग मानी जाती है और सरकार का कार्यकाल भी समाप्त हो जाता है।
बीजेपी ने ममता के बयान को बताया हमला
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के फैसले को “संवैधानिक ईशनिंदा” बताया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और संवैधानिक परंपराओं पर हमला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है और अब नई सरकार का गठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
विपक्षी दल ममता के समर्थन में उतरे
ममता बनर्जी के समर्थन में कई विपक्षी नेता सामने आए हैं। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया। वहीं समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोलकाता जाकर ममता से मुलाकात की और दावा किया कि चुनाव में बेईमानी हुई है।
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नई सरकार के गठन की तैयारी तेज
बीजेपी नेताओं के अनुसार, नई सरकार का शपथ ग्रहण शनिवार को हो सकता है। विधानसभा भंग होने के बाद अब नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। राज्य की राजनीति में यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है।