SC on Bhojshala Case : नई दिल्ली। धार स्थित भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम समुदाय के लिए हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने हेतु भोजशाला परिसर के पास एक उपयुक्त खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए। साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को स्पष्ट निर्देश दिए कि न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाएगा। यह सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हुई, जिसमें भोजशाला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना गया था।
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अंतरिम राहत से इनकार
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने फिलहाल मुस्लिम पक्ष को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यानी हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई।
हालांकि, अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और संकेत दिया कि मामले की विस्तृत सुनवाई अगले कुछ सप्ताह में की जाएगी। सुनवाई के बाद भोजशाला संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार परिसर में नियमित पूजा-अर्चना जारी रहेगी।
दोनों पक्षों ने अदालत में रखे अपने-अपने तर्क
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले से वर्षों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था बदल गई है। उन्होंने पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय से परिसर में शुक्रवार को नमाज अदा की जाती रही है।
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य रही और प्रशासन ने शांति बनाए रखी।
अगली सुनवाई पर टिकी रहेंगी सभी की नजरें
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अंतिम सुनवाई में ऐतिहासिक रिकॉर्ड, ASI की रिपोर्ट और दोनों पक्षों के कानूनी तर्कों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। फिलहाल अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने के साथ सीमित अंतरिम निर्देश दिए हैं। अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई पर सभी पक्षों और प्रदेश की नजरें टिकी हैं।