Lenskart Controversy : मुंबई। आईवियर रिटेल कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) इन दिनों अपने ड्रेस कोड विवाद और एक वायरल वीडियो के चलते चर्चा में है। पहले कंपनी के कथित ड्रेस कोड को लेकर धार्मिक प्रतीकों पर भेदभाव के आरोप लगे, फिर शोरूम में तिलक लगाने का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला और गरमा गया। कंपनी ने अब सफाई जारी कर अपनी पॉलिसी स्पष्ट की है।
क्या था पूरा ड्रेस कोड विवाद?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सोशल मीडिया पर एक कथित ड्रेस कोड डॉक्यूमेंट वायरल हुआ। इसमें कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी की बात कही गई थी।
वहीं हिजाब और पगड़ी की अनुमति दी गई थी, जिससे अलग-अलग धार्मिक प्रतीकों के साथ असमान व्यवहार के आरोप लगे। डॉक्यूमेंट में यह भी कहा गया था कि सिंदूर सीमित मात्रा में लगाया जाए और हिजाब का रंग काला होना चाहिए। इन निर्देशों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ी।
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कर्मचारियों ने लगाए गंभीर आरोप
पुणे के कुछ पूर्व कर्मचारियों ने दावा किया कि धार्मिक प्रतीकों को लेकर उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। एक पूर्व मैनेजर के अनुसार, कलावा पहनने पर ऑडिट अंक काटे गए।
वहीं दूसरे कर्मचारी ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को उठाने के बाद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और बाद में नौकरी पर भी असर पड़ा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।
कंपनी की सफाई और नई गाइडलाइन
विवाद बढ़ने के बाद लेंसकार्ट ने आधिकारिक बयान जारी किया। कंपनी ने कहा कि वायरल दस्तावेज एक पुरानी ट्रेनिंग फाइल थी, न कि आधिकारिक HR पॉलिसी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, कड़ा, हिजाब, पगड़ी जैसे सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान किया जाता है।
साथ ही कहा गया कि कर्मचारी अपनी आस्था और पहचान के साथ काम पर आ सकते हैं। लेंसकार्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी को ठेस पहुंची है तो उसे खेद है और अब नई स्टाइल गाइड को पारदर्शी तरीके से लागू किया जा रहा है।
CEO का बयान: गलती मानी, जिम्मेदारी ली
कंपनी के संस्थापक और CEO पीयूष बंसल (Peyush Bansal) ने कहा कि विवादित लाइन पहले ही हटा दी गई थी। उन्होंने माना कि इसे समय रहते पहचान नहीं पाए, जिसकी जिम्मेदारी वे लेते हैं। उन्होंने दोहराया कि कंपनी सभी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करती है।
तिलक वीडियो ने बढ़ाया विवाद
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें नाज़िया इलाही खान (Nazia Elahi Khan) एक लेंसकार्ट शोरूम में जाकर कर्मचारियों को तिलक लगाती नजर आईं। इस वीडियो ने पूरे विवाद को और हवा दे दी। वीडियो के सामने आने के बाद कार्यस्थल पर धार्मिक गतिविधियों की सीमा को लेकर बहस तेज हो गई।
विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पूर्व महापौर आशु वर्मा सोमवार दोपहर को आरडीसी स्थित लेंसकार्ट के शोरूम पर पहुंचे। उन्होंने यहां मौजूद प्रबंधक और कर्मचारियों को इकट्ठा कर दो टूक कहा कि लेंसकार्ट प्रबंधन के हिंदू कर्मचारियों पर तिलक लगाकर, कलावा बांधकर या अन्य कोई धार्मिक प्रतीकों के साथ प्रतिष्ठान और कार्यालय पर प्रतिबंध लगाकर सनातनियों को छेड़ने का काम किया है। यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
कंपनी ने विवादित ड्रेस कोड किया रद्द
बढ़ते विरोध के बीच कंपनी ने विवादित ड्रेस कोड को रद्द करने की बात कही। कंपनी ने दोहराया कि वह पेशेवर माहौल के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करती है और आगे भी नीतियों की समीक्षा जारी रखेगी।