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INDIA Alliance Meeting : खड़गे का बड़ा हमला – NEET घोटाले पर शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, वरना…INDIA ब्लॉक CJI को लिखेगा चिट्ठी

INDIA Alliance Meeting

INDIA Alliance Meeting : नई दिल्ली। दिल्ली में सोमवार को INDIA ब्लॉक की 7वीं महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 25 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। यह बैठक लगभग दो साल बाद हुई, जिसमें देश की राजनीति से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, सुप्रिया सुले और कपिल सिब्बल समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। वहीं उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन वर्चुअल माध्यम से जुड़े। 5 प्रमुख मुद्दों पर सभी दलों में सहमति बैठक के बाद खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि करीब दो घंटे से अधिक चली इस बैठक में 5 प्रमुख मुद्दों पर सभी दलों के बीच सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चिंता जताई गई है। MP Investment and Export : मप्र बना वैश्विक निवेश का नया हब, CM बोले- लैटिन अमेरिकी देशों के साथ व्यापार में 19% की बढ़ोतरी NEET और CBSE परीक्षाओं में गड़बड़ी खड़गे ने आरोप लगाया कि NEET और CBSE परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है और इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए गए हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। CJI को लिखेंगे पत्र विपक्षी गठबंधन ने तय किया है कि इस मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखा जाएगा। इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की जाएगी। MP Congress Crisis : मीनाक्षी नटराजन ने भरा नामांकन, विरोध में वरिष्ठ नेता ने छोड़ी पार्टी; क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच सियासत गरमाई हर दो महीने में बैठक होगी बैठक में यह भी तय हुआ कि INDIA ब्लॉक हर दो महीने में बैठक करेगा और संसद के मानसून सत्र के दौरान रोज सुबह समन्वय बैठक होगी। अगली बड़ी बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में होगी। वहीं राजनीतिक तनाव के बीच दिल्ली में पोस्टर विवाद भी सामने आया, जहां राहुल गांधी के खिलाफ लगे कुछ पोस्टर यूथ कांग्रेस द्वारा फाड़ दिए गए। INDIA ब्लॉक से पिछले कुछ वर्षों में JDU, AAP और DMK जैसी बड़ी पार्टियां अलग हो चुकी हैं, जिससे गठबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इसके बावजूद नेताओं का कहना है कि वे विपक्षी एकता को मजबूत करने की कोशिश जारी रखेंगे।

MP Investment and Export : मप्र बना वैश्विक निवेश का नया हब, CM बोले- लैटिन अमेरिकी देशों के साथ व्यापार में 19% की बढ़ोतरी

CM Mohan Yadav on MP UCC

MP Investment and Export : मध्य प्रदेश। इंदौर में आयोजित ‘मध्य प्रदेश (भारत)-LAC व्यापार एवं निवेश फोरम 2026’ में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों के राजदूतों, उद्योगपतियों और निवेशकों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश को निवेश और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ राज्य बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेशकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार की पारदर्शी और उद्योग हितैषी नीतियों के कारण देश और विदेश की कंपनियां मध्य प्रदेश में निवेश करने के लिए रुचि दिखा रही हैं। MP Congress Crisis : मीनाक्षी नटराजन ने भरा नामांकन, विरोध में वरिष्ठ नेता ने छोड़ी पार्टी; क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच सियासत गरमाई उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश से लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों को होने वाले निर्यात में 19 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही निर्यात का आंकड़ा बढ़कर 3,835 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह प्रदेश की मजबूत औद्योगिक क्षमता और वैश्विक बाजार में बढ़ती पहचान का प्रमाण है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य में निवेश को आसान बनाने के लिए कई बड़े सुधार किए गए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) के तहत लागू किए गए जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से 108 पुराने और जटिल नियमों को समाप्त या सरल बनाया गया है। इससे उद्योगों को अनुमति और संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं में काफी सुविधा मिली है। Bengal Politics : ममता के 21 सांसद छोड़ेगें TMC! सुखेंदु शेखर रे ने दिया इस्तीफ़ा, CM शुभेंदु के साथ BJP बंगाल प्रभारी से मुलाकात उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि मध्य प्रदेश में बेहतर बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। सरकार का लक्ष्य राज्य को निवेश, व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंध मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे।

Mahesh Kevat Nomination : BJP उम्मीदवार महेश केवट ने भरा नामांकन, सीएम मोहन यादव बोले- तीनों सीट आएंगी भाजपा के खाते में

Mahesh Kevat Nomination

Mahesh Kevat Nomination : भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार महेश केवट ने सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव , प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत पार्टी के कई विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। महेश केवट के नामांकन के साथ ही तीसरी सीट का चुनाव प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया है। सीएम मोहन यादव ने जताया जीत का भरोसा नामांकन के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि भाजपा अपने तीसरे उम्मीदवार को भी जीत दिलाने में सफल होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल वादे नहीं करती, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर दिखाती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि समाज के ऐसे वर्गों को भी प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है, जिनकी भागीदारी पहले उच्च सदन में अपेक्षाकृत कम रही है। उन्होंने महेश केवट की उम्मीदवारी को सामाजिक समावेशन और प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। Bengal Politics : ममता के 21 सांसद छोड़ेगें TMC! सुखेंदु शेखर रे ने दिया इस्तीफ़ा, CM शुभेंदु के साथ BJP बंगाल प्रभारी से मुलाकात महेश केवट को मिला सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश भाजपा का मानना है कि पिछड़े वर्ग से आने वाले महेश केवट को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने समाज के हर वर्ग को अवसर देने की अपनी नीति को आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ केवल नारा नहीं, बल्कि भाजपा की कार्यशैली का आधार है। पार्टी का उद्देश्य हर वर्ग को लोकतांत्रिक संस्थाओं में सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देना है। पहले ही नामांकन कर चुके हैं दो उम्मीदवार इससे पहले भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुघ (Tarun Chugh) और रजनीश अग्रवाल (Rajneesh Agrawal) राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर चुके हैं। महेश केवट तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। भाजपा विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों को भोपाल में रहने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि चुनावी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। MP Congress Crisis : मीनाक्षी नटराजन ने भरा नामांकन, विरोध में वरिष्ठ नेता ने छोड़ी पार्टी; क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच सियासत गरमाई निर्मला सप्रे की मुलाकात से बढ़ी राजनीतिक चर्चा राज्यसभा चुनाव के बीच बीना विधायक निर्मला सप्रे (Nirmala Sapre) की मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन राज्यसभा चुनाव के समीकरणों को देखते हुए इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीसरी सीट का पूरा गणित समझिए मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान में कुल 228 प्रभावी विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा का गणित कुल विधायक: 164 दो सीटें जीतने के लिए आवश्यक वोट: 116 शेष वोट: 48 इस प्रकार तीसरी सीट पर अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए भाजपा के पास फिलहाल 48 वोट हैं। जीत के लिए उसे कुल 58 वोट चाहिए, यानी 10 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। MP Politics : राज्यसभा चुनाव से पहले MP में सियासी हलचल, महेश केवट की एंट्री से कांग्रेस की बढ़ी टेंशन कांग्रेस की स्थिति क्या है? कांग्रेस के पास प्रभावी रूप से 63 वोट माने जा रहे हैं। विजयपुर विधायक के मतदान न कर पाने और कुछ अन्य राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस का दावा है कि उसके पास पर्याप्त समर्थन है। यदि भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक का समर्थन कांग्रेस को मिलता है, तो उसका आंकड़ा 64 तक पहुंच सकता है। ऐसे में कांग्रेस के पास जीत के लिए जरूरी 58 वोटों से 6 वोट अधिक होंगे। बीजेपी तीसरी सीट कैसे जीत सकती है? तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को अपने 48 वोटों के अलावा कम से कम 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। यह समर्थन उसे विपक्षी विधायकों की क्रॉस वोटिंग या अन्य दलों के सहयोग से मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुछ विधायक पार्टी लाइन से अलग मतदान करते हैं या कोई अतिरिक्त समर्थन भाजपा को मिलता है, तो तीसरी सीट का परिणाम पूरी तरह बदल सकता है। UPDATE : ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच पर उठे सवाल, केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक कैसे पहुंचे? CBI जोड़ रही कड़ियां क्रॉस वोटिंग पर टिकी हैं निगाहें राज्यसभा चुनाव में गुप्त मतदान नहीं होता, लेकिन क्रॉस वोटिंग की संभावनाएं हमेशा चर्चा में रहती हैं। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में दोनों दलों की रणनीति और सहयोगी दलों का रुख चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकता है।

MP Congress Crisis : मीनाक्षी नटराजन ने भरा नामांकन, विरोध में वरिष्ठ नेता ने छोड़ी पार्टी; क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच सियासत गरमाई

Meenakshi Natarajan nomination

MP Congress Crisis : भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। बीजेपी द्वारा तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारे जाने के बाद कांग्रेस खेमे में भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। क्रॉस वोटिंग की अटकलों के बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी है। इसी बीच पार्टी की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन दाखिल किया, लेकिन उनके नाम पर पार्टी के भीतर विरोध भी सामने आ गया। नामांकन के दौरान कांग्रेस ने दिखाई पूरी ताकत सोमवार को मीनाक्षी नटराजन ने विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे। नामांकन के दौरान कांग्रेस नेतृत्व अतिरिक्त सतर्क नजर आया और पूरी प्रक्रिया पर करीबी नजर रखी गई। Bengal Politics : ममता के 21 सांसद छोड़ेगें TMC! सुखेंदु शेखर रे ने दिया इस्तीफ़ा, CM शुभेंदु के साथ BJP बंगाल प्रभारी से मुलाकात एक-एक विधायक पर रखी गई नजर नामांकन दाखिल करने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने किसी भी तरह की चूक से बचने की कोशिश की। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्वयं मोर्चा संभाला और विधायकों को एक-एक कर रिटर्निंग ऑफिसर के पास भेजा। राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी की गंभीरता इस दौरान साफ दिखाई दी। नामांकन के बाद मीनाक्षी नटराजन का बड़ा दावा नामांकन पत्र जमा करने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह केवल चुनाव नहीं बल्कि विचारधाराओं की लड़ाई है। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरी है। उम्मीदवारी के विरोध में वरिष्ठ नेता का इस्तीफा राज्यसभा उम्मीदवार घोषित होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आने लगी हैं। भोपाल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी का विरोध करते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और हुजूर विधानसभा सीट से पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनके इस्तीफे ने कांग्रेस के अंदर चल रही नाराजगी की चर्चाओं को और हवा दे दी है। Satna Theft Case : लाखों की चोरी के बाद शोरूम मे ही सो गया बदमाश, सुबह खुली आंख तो सामने थी पुलिस बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि तीसरी राज्यसभा सीट के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है, फिर भी उम्मीदवार उतारा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं पर कांग्रेस का जवाब राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज हैं, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व लगातार यह दावा कर रहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस का कोई विधायक पार्टी लाइन से अलग नहीं जाएगा और सभी मिलकर चुनाव लड़ेंगे। UPDATE : ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच पर उठे सवाल, केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक कैसे पहुंचे? CBI जोड़ रही कड़ियां ‘हर हाल में राज्यसभा भेजेंगे’ जीतू पटवारी ने विश्वास जताया कि कांग्रेस अपने उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने में सफल रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में है और सभी विधायक एकजुट होकर मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में खड़े हैं।

Bengal Politics : ममता के 21 सांसद छोड़ेगें TMC! सुखेंदु शेखर रे ने दिया इस्तीफ़ा, CM शुभेंदु के साथ BJP बंगाल प्रभारी से मुलाकात

Bengal Politics

Bengal Politics : कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कदम के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग करते हुए पत्र लिखा है। वहीं कई सांसदों की एक अहम बैठक ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। सांसद पद और पार्टी दोनों से दिया इस्तीफा सुखेंदु शेखर रे ने सोमवार को राज्यसभा सांसद पद के साथ-साथ पार्टी से भी दूरी बना ली। अपने इस्तीफे में उन्होंने राज्य की मौजूदा स्थिति और पार्टी के कामकाज को लेकर कई सवाल उठाए। उनका कार्यकाल अभी 2029 तक था, लेकिन इस्तीफे के बाद उनकी सीट खाली हो गई है। Bengal Politics : ममता के 21 सांसद छोड़ेगें TMC! सुखेंदु शेखर रे ने दिया इस्तीफ़ा, CM शुभेंदु के साथ BJP बंगाल प्रभारी से मुलाकात किन सांसदों ने किया बागी गुट का समर्थन? लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में 20 सांसदों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। इनमें अरूप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, जगदीश बसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, बापी हल्दार, असित मल और सुखेंदु शेखर रॉय समेत कई सांसदों के नाम सामने आए हैं। बागी गुट ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना नेता मान्यता देने की भी मांग की है। दिल्ली में हुई बैठक से बढ़ी चर्चा इस्तीफे के कुछ घंटों बाद दिल्ली में कई सांसदों की बैठक हुई। इस बैठक में सुखेंदु शेखर रे भी मौजूद रहे। बैठक में शामिल नेताओं के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गईं। हालांकि इसमें शामिल सांसदों की पूरी संख्या और उनका सदनवार ब्योरा स्पष्ट नहीं हो सका। पार्टी में बढ़ रही थी नाराजगी’ इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर रे ने कहा कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का माहौल था। उनका आरोप था कि कई नेताओं को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर नहीं मिल रहा था और महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी राय भी नहीं ली जाती थी। Satna Theft Case : लाखों की चोरी के बाद शोरूम मे ही सो गया बदमाश, सुबह खुली आंख तो सामने थी पुलिस इस्तीफे में उठाए कई बड़े सवाल अपने त्यागपत्र में उन्होंने शासन व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जिक्र किया। साथ ही चुनावी नतीजों को भी पार्टी के लिए एक बड़ा संदेश बताया। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव परिणामों के बाद आत्ममंथन की जरूरत थी। बागी खेमे ने भी किया समर्थन सुखेंदु शेखर रे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके कई मुद्दे सही हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर जो बातें लंबे समय से उठ रही थीं, अब वे खुलकर सामने आने लगी हैं। पहले भी सामने आ चुकी है नाराजगी सुखेंदु शेखर रे से पहले सांसद काकोली घोष भी पार्टी के पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं। उनके इस्तीफे के बाद भी संगठन के भीतर असंतोष को लेकर चर्चाएं हुई थीं। अब लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रमों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। MP Congress Crisis : मीनाक्षी नटराजन ने भरा नामांकन, विरोध में वरिष्ठ नेता ने छोड़ी पार्टी; क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच सियासत गरमाई विधायकों के अलग रुख ने बढ़ाई चिंता इससे पहले बड़ी संख्या में विधायकों के अलग रुख अपनाने की खबरों ने भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ाई थीं। बागी विधायकों ने अपना अलग नेतृत्व चुनते हुए विधानसभा में समर्थन पत्र भी सौंपा था। इस घटनाक्रम के बाद अब सांसदों के स्तर पर बढ़ती हलचल ने बंगाल की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

Satna Theft Case : लाखों की चोरी के बाद शोरूम मे ही सो गया बदमाश, सुबह खुली आंख तो सामने थी पुलिस

Satna Theft Case

Satna Theft Case : मध्य प्रदेश। सतना में चोरी की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स गोदाम में सेंध लगाकर लाखों रुपये का सामान चोरी करने पहुंचे बदमाशों में से एक चोर AC की ठंडी हवा में ऐसा सोया कि सुबह गोदाम मालिक ने उसे वहीं खर्राटे मारते हुए पकड़ लिया। छत से घुसे, लाखों का सामान लेकर निकले शनिवार रात खेरमाई रोड स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स गोदाम को निशाना बनाया गया। चोरों ने छत पर लगे AC के आउटडोर यूनिट को हटाया और अंदर प्रवेश कर गए। इसके बाद गैंग ने मिलकर टीवी, AC और कूलर समेत लाखों रुपये का सामान पार कर दिया। Jahangir Khan Arrested : देश छोड़कर भाग रहे थे TMC नेता जहांगीर खान, STF ने नेपाल बॉर्डर पर ही दबोचा काम के बीच आई नींद, साथी छोड़कर भागे चोरी के दौरान गैंग का एक सदस्य इतना थक गया कि गोदाम के अंदर ही सो गया। बाकी साथी चोरी का सामान लेकर निकल गए, लेकिन उसे जगाना भी जरूरी नहीं समझा। नतीजा यह हुआ कि चोर पूरी रात वहीं आराम फरमाता रहा। सुबह शटर खुला तो उड़ गए मालिक के होश रविवार सुबह गोदाम मालिक जब दुकान खोलने पहुंचा तो अंदर का नजारा देखकर हैरान रह गया। सामान बिखरा पड़ा था और लाखों रुपये का माल गायब था। इसी बीच उसे किसी के खर्राटे लेने की आवाज सुनाई दी। INDI Alliance Meeting : NDA को घेरने की रणनीति पर INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक आज, 23 दलों के नेता दिल्ली में जुटेंगे बिखरे सामान के बीच आराम से सो रहा था चोर मालिक ने अंदर जाकर देखा तो एक अनजान युवक फर्श पर गहरी नींद में सो रहा था। चोरी के बाद जहां बाकी बदमाश फरार हो चुके थे, वहीं उनका साथी गोदाम को ही अपना बेडरूम समझकर सोया हुआ था। पुलिस ने जगाया, तब खुली आंख मालिक ने तुरंत आसपास के लोगों को बुलाया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने सो रहे युवक को उठाया। बताया जा रहा है कि वह इतनी गहरी नींद में था कि उसे समझ ही नहीं आया कि वह गोदाम में है या पुलिस की गिरफ्त में। MP Monsoon Update : मानसून काउंटडाउन शुरु! 18 तक मप्र में एंट्री, जानिए आज कैसा रहेगा मौसम चोरी की वारदात की जांच शुरू पुलिस अब फरार बदमाशों की तलाश में जुटी है। वहीं गोदाम से चोरी हुए टीवी, AC और कूलर की कीमत का आकलन किया जा रहा है। यह घटना शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

MP Politics : राज्यसभा चुनाव से पहले MP में सियासी हलचल, महेश केवट की एंट्री से कांग्रेस की बढ़ी टेंशन

Mahesh Kevat

MP Politics : भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। बीजेपी ने मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। इस फैसले के बाद तीसरी सीट पर मुकाबला तय माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। तीसरी सीट पर अब होगा सीधा मुकाबला मुख्यमंत्री निवास में देर रात तक चली बैठक के बाद बीजेपी ने महेश केवट के नाम पर मुहर लगाई। इसके साथ ही साफ हो गया कि राज्यसभा की तीसरी सीट पर निर्विरोध चुनाव नहीं होगा, बल्कि वोटिंग के जरिए फैसला होगा। MP RS Election 2026 : मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला रोचक! BJP- कांग्रेस की सीधी टक्कर महेश केवट के नाम पर क्यों बनी सहमति? उम्मीदवार चयन के दौरान ओबीसी, एससी-एसटी और आदिवासी वर्ग के कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन अंत में पिछड़ा वर्ग से आने वाले महेश केवट पर सहमति बनी। वे वर्तमान में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। कांग्रेस के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल? राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, लेकिन विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर हाईकोर्ट की रोक है। वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि वे बीजेपी के साथ हैं। ऐसे में कांग्रेस की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं दिख रही। MP RS Nomination : BJP उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल और तरुण चुघ ने भरा नामांकन, CM मोहन यादव रहे मौजूद बीजेपी के पास कितनी है अतिरिक्त ताकत? बीजेपी के 164 विधायक हैं। दो सीटें जीतने के बाद भी उसके पास 48 वोट अतिरिक्त बचते हैं। अगर निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार का समर्थन मिलता है तो यह आंकड़ा 50 तक पहुंच सकता है। ऐसे में तीसरी सीट के लिए बीजेपी को सिर्फ 8 और वोटों की जरूरत होगी। बाड़बंदी तक पहुंच सकता है मामला बीजेपी की रणनीति को देखते हुए कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़बंदी कर सकती है। जरूरत पड़ने पर उन्हें दूसरे राज्य में भी भेजा जा सकता है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का दावा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और क्रॉस वोटिंग की कोई संभावना नहीं है। MP Politics : मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव में बढ़ी कांग्रेस की मुश्किलें, मीनाक्षी नटराजन के नाम पर उठे सवाल कौन हैं महेश केवट? निवाड़ी जिले के ओरछा से आने वाले महेश केवट को हाल ही में 6 मई को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। वे बीजेपी में जिला उपाध्यक्ष, जिला मंत्री और राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य जैसी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं।

Jahangir Khan Arrested : देश छोड़कर भाग रहे थे TMC नेता जहांगीर खान, STF ने नेपाल बॉर्डर पर ही दबोचा

Jahangir Khan Arrested

Jahangir Khan Arrested : कोलकाता। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व उम्मीदवार जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार जहांगीर खान नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था। STF ने उसे भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक से हिरासत में लिया। हालांकि गिरफ्तारी किस स्थान और किस समय की गई, इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही STF इस मामले में आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी जानकारी सार्वजनिक कर सकती है। चुनाव के बाद से लापता था जहांगीर खान जानकारी के अनुसार, फलता विधानसभा सीट से TMC उम्मीदवार रहे जहांगीर खान हालिया चुनाव के बाद से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रहा था। पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार उसकी तलाश कर रही थीं। उसके खिलाफ कई गंभीर मामलों में जांच चल रही थी, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी हुई थी। लंबे समय से फरार चल रहे जहांगीर की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। Bengal Bomb Blast : बंगाल बम धमाका मामले में पूर्व विधायक साओकोट मोल्ला गिरफ्तार, लंबे समय से थी तलाश सात मामलों में वांछित था TMC नेता पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जहांगीर खान के खिलाफ कुल सात मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास, जबरन वसूली, दंगा भड़काने और अन्य गंभीर आपराधिक आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन मामलों में पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसकी गिरफ्तारी जरूरी थी। कई मामलों में वह जांच एजेंसियों के समन और नोटिस के बावजूद सामने नहीं आया था। टेक्निकल सर्विलांस से मिली बड़ी सफलता STF ने जहांगीर खान तक पहुंचने के लिए आधुनिक तकनीकी निगरानी का सहारा लिया। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों ने उसके एक करीबी सहयोगी के मोबाइल फोन की गतिविधियों को ट्रैक किया। इसी दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर टीम जहांगीर खान के संभावित ठिकाने तक पहुंच सकी। इसके बाद एक विशेष अभियान चलाकर उसे सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। UPDATE : ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच पर उठे सवाल, केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक कैसे पहुंचे? CBI जोड़ रही कड़ियां मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जांच के घेरे में जहांगीर खान का नाम केवल आपराधिक मामलों तक सीमित नहीं है। उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज है, जिसकी जांच Enforcement Directorate (ईडी) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन और कथित अवैध संपत्तियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी को कई मामलों की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट से मिली थी अंतरिम राहत जहांगीर खान को पहले गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई थी। कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) ने उसे कुछ समय के लिए राहत प्रदान की थी। हालांकि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद अदालत ने इस सुरक्षा को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया था और जांच एजेंसियों ने उसे पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए थे। MP Sewage Excavation : सीवेज खुदाई ने बिगाड़ी भोपाल की हालत, इंजीनियर बोले- 3 दिन में सड़कें न सुधरीं तो छोड़ देंगे काम चुनाव प्रचार के दौरान भी रहा था चर्चा में हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान जहांगीर खान राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा था। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में उसने अचानक चुनावी मैदान से पीछे हटने का ऐलान कर दिया था। उसके इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद से उसकी गतिविधियों को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं। IPS अधिकारी को धमकी देने के मामले में भी आया था सुर्खियों में चुनाव के दौरान जहांगीर खान एक विवादित बयान को लेकर भी चर्चा में आया था। उस पर एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को धमकी देने का आरोप लगा था। इसी दौरान उसने लोकप्रिय फिल्म के एक चर्चित संवाद की तर्ज पर बयान देकर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया था। इस घटना के बाद उसके खिलाफ आलोचना भी हुई और मामला सुर्खियों में बना रहा। MP Monsoon Update : मानसून काउंटडाउन शुरु! 18 तक मप्र में एंट्री, जानिए आज कैसा रहेगा मौसम फलता सीट पर भाजपा उम्मीदवार को मिली थी जीत फलता विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को सफलता नहीं मिली थी। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के दौरान पैदा हुए विवादों और उम्मीदवार से जुड़े आरोपों का असर चुनावी परिणामों पर भी देखने को मिला। अब आगे क्या होगा? गिरफ्तारी के बाद जहांगीर खान से विभिन्न मामलों में पूछताछ की जाएगी। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां उसके खिलाफ दर्ज मामलों, वित्तीय लेन-देन और फरारी के दौरान उसकी गतिविधियों की जांच करेंगी। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

UPDATE : ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच पर उठे सवाल, केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक कैसे पहुंचे? CBI जोड़ रही कड़ियां

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UPDATE : भोपाल। एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में है। एजेंसी मामले से जुड़ी हर कड़ी को जोड़ने और मौत की असली वजह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। इस बीच शुरुआती पुलिस जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों से संकेत मिले हैं कि जांच से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य समय से पहले आरोपियों तक पहुंच गए थे। इसी वजह से मामले में नई बहस शुरू हो गई है कि कहीं जांच प्रक्रिया में लापरवाही या जानकारी लीक होने जैसी स्थिति तो नहीं हुई। अग्रिम जमानत से पहले आरोपियों तक पहुंची अहम जानकारी मामले में ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की ओर से हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों ने कई सवाल खड़े किए हैं। दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आरोपियों तक पहले ही पहुंच गई थी। यही कारण माना जा रहा है कि गिरिबाला सिंह समय रहते अग्रिम जमानत हासिल करने में सफल रहीं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति आधिकारिक रूप से आरोपी नहीं है, तब भी उसे जांच से जुड़े गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध होना जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। INDI Alliance Meeting : NDA को घेरने की रणनीति पर INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक आज, 23 दलों के नेता दिल्ली में जुटेंगे शुरुआती जांच में संदिग्धों को लेकर उठे सवाल मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, शुरुआत में ही गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया जाना चाहिए था। हालांकि जांच के शुरुआती चरण में ऐसा नहीं किया गया। इससे जांच की दिशा और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले में यह भी कहा जा रहा है कि यदि शुरुआती स्तर पर सभी संभावित पहलुओं पर गंभीरता से काम किया जाता, तो जांच की स्थिति अलग हो सकती थी। फंदे की रस्सी की जब्ती प्रक्रिया पर भी विवाद 13 मई 2026 को सुबह सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने घटनास्थल से फंदे की रस्सी जब्त की थी। लेकिन दस्तावेजों में यह स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है कि रस्सी की पहचान किसने की और किन परिस्थितियों में उसे जब्त किया गया। ट्विशा के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे का आरोप है कि महत्वपूर्ण साक्ष्य को तुरंत फोरेंसिक जांच के लिए भेजने के बजाय कुछ समय तक पुलिस अधिकारी की निजी गाड़ी में रखा गया। बाद में इसे जांच के लिए भेजा गया। इस दावे ने साक्ष्यों की सुरक्षा और उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। MP Sewage Excavation : सीवेज खुदाई ने बिगाड़ी भोपाल की हालत, इंजीनियर बोले- 3 दिन में सड़कें न सुधरीं तो छोड़ देंगे काम जांच दस्तावेज आरोपियों तक पहुंचने के आरोप कानूनी दस्तावेजों में कहा गया है कि रस्सी की जब्ती से संबंधित रिकॉर्ड केस डायरी का हिस्सा था। उस समय गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह आधिकारिक रूप से आरोपी नहीं थे। ऐसे में उन्हें इस दस्तावेज तक पहुंचने का कानूनी अधिकार नहीं था। इसके बावजूद यह दस्तावेज अग्रिम जमानत याचिका के साथ अदालत में प्रस्तुत किया गया। इस आधार पर आरोप लगाया गया है कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज समय से पहले आरोपियों तक पहुंच रहे थे। हालांकि इस विषय पर जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। एक ही दिन बने कई जब्ती दस्तावेजों ने बढ़ाई शंकाएं मामले में यह भी सामने आया है कि जिस दिन फंदे की रस्सी से जुड़ा जब्ती पंचनामा तैयार हुआ, उसी दिन तीन अन्य जब्ती दस्तावेज भी बनाए गए थे। इनमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह का उल्लेख दर्ज बताया गया है। इसी आधार पर जांच प्रक्रिया में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने का दावा किया जा रहा है। अब जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं किसी स्तर पर प्रक्रियागत चूक तो नहीं हुई। MP RS Election 2026 : मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला रोचक! BJP- कांग्रेस की सीधी टक्कर CBI ने मनोचिकित्सक से की पूछताछ मामले की जांच कर रही CBI ने अब ट्विशा शर्मा का इलाज करने वाले मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से पूछताछ की है। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि ट्विशा का वास्तव में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज चल रहा था या नहीं। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इलाज की प्रकृति क्या थी और उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रस्तुत किए गए दस्तावेज कितने प्रामाणिक हैं। मानसिक बीमारी के दावे की जांच में जुटी एजेंसी गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में पेश दस्तावेजों में दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक तनाव और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से गुजर रही थीं। इसी आधार पर कुछ मेडिकल रिकॉर्ड भी अदालत में जमा किए गए थे। अब CBI इन रिकॉर्ड्स की सच्चाई की जांच कर रही है। एजेंसी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक हैं या उनका इस्तेमाल किसी कानूनी रणनीति के तहत किया गया था। CBI ने डॉक्टर से पूछे कई अहम सवाल सूत्रों के अनुसार, CBI ने डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से पूछा कि ट्विशा कब-कब इलाज के लिए आई थीं, उन्हें किस तरह की परेशानियां थीं और काउंसलिंग के दौरान उन्होंने किन मुद्दों पर चर्चा की थी। एजेंसी यह भी समझने का प्रयास कर रही है कि उनकी मानसिक स्थिति को लेकर जो दावे किए गए हैं, वे चिकित्सा रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं। हालांकि डॉक्टर ने मरीज की गोपनीयता का हवाला देते हुए व्यक्तिगत बातचीत का खुलासा करने से इनकार किया है। Govt Jobs New Rules : MP में सरकारी नौकरी के नियम बदलने की तैयारी, दो से ज्यादा बच्चे होने पर नहीं मिलेगी नियुक्ति वीआईपी ट्रीटमेंट के आरोप भी सामने आए मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को जेल में विशेष सुविधाएं दिए जाने के आरोप भी सामने आए थे। इसके बाद जेल प्रशासन ने दोनों को अस्पताल वार्ड से सामान्य बैरक में स्थानांतरित कर दिया। कोर्ट के निर्देशों के बाद गिरिबाला सिंह की सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था

INDI Alliance Meeting : NDA को घेरने की रणनीति पर INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक आज, 23 दलों के नेता दिल्ली में जुटेंगे

INDI Alliance Meeting

INDI Alliance Meeting : नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकजुटता को नई धार देने के उद्देश्य से INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होने जा रही है। करीब दो वर्षों के अंतराल के बाद होने वाली इस बैठक में 23 विपक्षी दलों के शामिल होने का दावा किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र की NDA सरकार की नीतियों के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करना है। हालांकि गठबंधन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक एजेंडा घोषित नहीं किया गया है। राहुल, ममता और अखिलेश यादव समेत कई बड़े नेता होंगे शामिल बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और वामपंथी दलों के वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। विपक्षी दलों के कई अन्य प्रमुख चेहरे भी बैठक में मौजूद रहेंगे। यह बैठक आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। MP Sewage Excavation : सीवेज खुदाई ने बिगाड़ी भोपाल की हालत, इंजीनियर बोले- 3 दिन में सड़कें न सुधरीं तो छोड़ देंगे काम AAP और DMK बैठक से दूर, JMM की भूमिका पर सस्पेंस INDIA गठबंधन की इस बैठक में आम आदमी पार्टी और DMK शामिल नहीं हो रही हैं। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा की भागीदारी को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। CPI(M) ने कांग्रेस के कुछ बयानों पर नाराजगी जताई है, लेकिन पार्टी ने बैठक में शामिल होने का फैसला किया है। इससे साफ है कि गठबंधन के भीतर मतभेद होने के बावजूद विपक्ष एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। ममता की केजरीवाल से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा बैठक से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दिल्ली पहुंच चुके हैं। रविवार को उन्होंने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। हालांकि इस मुलाकात की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे विपक्षी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। बैठक से पहले हुई यह मुलाकात कई नए राजनीतिक संकेत दे रही है। एजेंडा तय नहीं लेकिन कई राज्यों के मुद्दे उठ सकते हैं गठबंधन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक एजेंडा तय नहीं किया गया है। ऐसे में सभी दल अपने-अपने राज्यों और राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को बैठक में उठा सकते हैं। माना जा रहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी, राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और भाजपा के खिलाफ साझा राजनीतिक रणनीति प्रमुख चर्चा का विषय बन सकते हैं। इसके अलावा गठबंधन के संयोजक के नाम पर भी विचार-विमर्श संभव है। MP Monsoon Update : मानसून काउंटडाउन शुरु! 18 तक मप्र में एंट्री, जानिए आज कैसा रहेगा मौसम बंगाल, बिहार, यूपी और केरल के मुद्दों पर हो सकती है चर्चा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस चुनाव के बाद अपने नेताओं पर कथित हमलों का मुद्दा उठाकर सहयोगी दलों का समर्थन मांग सकती है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दे सकती हैं। बिहार में लालू परिवार की सुरक्षा में कटौती और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। वहीं केरल में कांग्रेस और वाम दलों के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। कांग्रेस से नाराज हैं कई सहयोगी दल बैठक से पहले गठबंधन के भीतर कुछ असंतोष भी सामने आया है। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कांग्रेस पर बिना परामर्श फैसला लेने का आरोप लगाया है। वहीं केरल में CPI(M) कांग्रेस नेताओं द्वारा वाम दलों को भाजपा की ‘बी टीम’ बताए जाने से नाराज है। इन मतभेदों के बावजूद विपक्षी दल बैठक में भाग लेकर साझा रणनीति बनाने की कोशिश करेंगे। MP RS Election 2026 : मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला रोचक! BJP- कांग्रेस की सीधी टक्कर तीन साल में गठबंधन से अलग हुईं तीन बड़ी पार्टियां INDIA गठबंधन को पिछले तीन वर्षों में कई झटके लगे हैं। जनता दल यूनाइटेड, आम आदमी पार्टी और DMK गठबंधन से दूरी बना चुकी हैं। जेडीयू ने 2024 में NDA का दामन थाम लिया था। आम आदमी पार्टी ने सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस से मतभेद के बाद जुलाई 2025 में गठबंधन छोड़ दिया। वहीं DMK ने भी कांग्रेस पर राजनीतिक वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए दूरी बना ली। कुछ राज्यों में सफल रहा गठबंधन, कई जगह नहीं मिला फायदा INDIA गठबंधन ने जम्मू-कश्मीर और झारखंड जैसे राज्यों में मिलकर चुनाव लड़ा और सरकार बनाने में सफलता हासिल की। हालांकि महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु और पुडुचेरी में गठबंधन को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। हरियाणा, दिल्ली, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सहयोगी दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे, जिससे विपक्षी वोटों का बिखराव देखने को मिला। राज्यसभा चुनाव से पहले विपक्ष दिखाना चाहता है ताकत 18 जून को 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। ऐसे में विपक्ष इस बैठक के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत और एकजुटता का संदेश देना चाहता है। वर्तमान में राज्यसभा में NDA के पास स्पष्ट बहुमत है, जबकि विपक्ष अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश में है। माना जा रहा है कि बैठक में संसद के आगामी सत्र और राज्यसभा चुनाव को लेकर भी रणनीति बनाई जा सकती है। Hantavirus Update : हंता वायरस के 13 मामले अब तक सामने आए, तीन लोगों की मौत विपक्षी एकता की नई परीक्षा बनेगी यह बैठक राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि INDIA गठबंधन की यह बैठक विपक्षी दलों के लिए एक नई परीक्षा साबित हो सकती है। गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों को दूर कर साझा एजेंडा तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि विपक्ष इस बैठक में एकजुटता का मजबूत संदेश देने में सफल रहता है, तो आगामी चुनावी राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है।