UPDATE : भोपाल। एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में है। एजेंसी मामले से जुड़ी हर कड़ी को जोड़ने और मौत की असली वजह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। इस बीच शुरुआती पुलिस जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों से संकेत मिले हैं कि जांच से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य समय से पहले आरोपियों तक पहुंच गए थे। इसी वजह से मामले में नई बहस शुरू हो गई है कि कहीं जांच प्रक्रिया में लापरवाही या जानकारी लीक होने जैसी स्थिति तो नहीं हुई।
अग्रिम जमानत से पहले आरोपियों तक पहुंची अहम जानकारी
मामले में ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की ओर से हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों ने कई सवाल खड़े किए हैं। दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आरोपियों तक पहले ही पहुंच गई थी।
यही कारण माना जा रहा है कि गिरिबाला सिंह समय रहते अग्रिम जमानत हासिल करने में सफल रहीं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति आधिकारिक रूप से आरोपी नहीं है, तब भी उसे जांच से जुड़े गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध होना जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
शुरुआती जांच में संदिग्धों को लेकर उठे सवाल
मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, शुरुआत में ही गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया जाना चाहिए था। हालांकि जांच के शुरुआती चरण में ऐसा नहीं किया गया।
इससे जांच की दिशा और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले में यह भी कहा जा रहा है कि यदि शुरुआती स्तर पर सभी संभावित पहलुओं पर गंभीरता से काम किया जाता, तो जांच की स्थिति अलग हो सकती थी।
फंदे की रस्सी की जब्ती प्रक्रिया पर भी विवाद
13 मई 2026 को सुबह सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने घटनास्थल से फंदे की रस्सी जब्त की थी। लेकिन दस्तावेजों में यह स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है कि रस्सी की पहचान किसने की और किन परिस्थितियों में उसे जब्त किया गया।
ट्विशा के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे का आरोप है कि महत्वपूर्ण साक्ष्य को तुरंत फोरेंसिक जांच के लिए भेजने के बजाय कुछ समय तक पुलिस अधिकारी की निजी गाड़ी में रखा गया। बाद में इसे जांच के लिए भेजा गया। इस दावे ने साक्ष्यों की सुरक्षा और उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच दस्तावेज आरोपियों तक पहुंचने के आरोप
कानूनी दस्तावेजों में कहा गया है कि रस्सी की जब्ती से संबंधित रिकॉर्ड केस डायरी का हिस्सा था। उस समय गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह आधिकारिक रूप से आरोपी नहीं थे। ऐसे में उन्हें इस दस्तावेज तक पहुंचने का कानूनी अधिकार नहीं था।
इसके बावजूद यह दस्तावेज अग्रिम जमानत याचिका के साथ अदालत में प्रस्तुत किया गया। इस आधार पर आरोप लगाया गया है कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज समय से पहले आरोपियों तक पहुंच रहे थे। हालांकि इस विषय पर जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
एक ही दिन बने कई जब्ती दस्तावेजों ने बढ़ाई शंकाएं
मामले में यह भी सामने आया है कि जिस दिन फंदे की रस्सी से जुड़ा जब्ती पंचनामा तैयार हुआ, उसी दिन तीन अन्य जब्ती दस्तावेज भी बनाए गए थे। इनमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह का उल्लेख दर्ज बताया गया है।
इसी आधार पर जांच प्रक्रिया में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने का दावा किया जा रहा है। अब जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं किसी स्तर पर प्रक्रियागत चूक तो नहीं हुई।
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CBI ने मनोचिकित्सक से की पूछताछ
मामले की जांच कर रही CBI ने अब ट्विशा शर्मा का इलाज करने वाले मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से पूछताछ की है। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि ट्विशा का वास्तव में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज चल रहा था या नहीं। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इलाज की प्रकृति क्या थी और उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रस्तुत किए गए दस्तावेज कितने प्रामाणिक हैं।
मानसिक बीमारी के दावे की जांच में जुटी एजेंसी
गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में पेश दस्तावेजों में दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक तनाव और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से गुजर रही थीं। इसी आधार पर कुछ मेडिकल रिकॉर्ड भी अदालत में जमा किए गए थे।
अब CBI इन रिकॉर्ड्स की सच्चाई की जांच कर रही है। एजेंसी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक हैं या उनका इस्तेमाल किसी कानूनी रणनीति के तहत किया गया था।
CBI ने डॉक्टर से पूछे कई अहम सवाल
सूत्रों के अनुसार, CBI ने डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से पूछा कि ट्विशा कब-कब इलाज के लिए आई थीं, उन्हें किस तरह की परेशानियां थीं और काउंसलिंग के दौरान उन्होंने किन मुद्दों पर चर्चा की थी। एजेंसी यह भी समझने का प्रयास कर रही है कि उनकी मानसिक स्थिति को लेकर जो दावे किए गए हैं, वे चिकित्सा रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं। हालांकि डॉक्टर ने मरीज की गोपनीयता का हवाला देते हुए व्यक्तिगत बातचीत का खुलासा करने से इनकार किया है।
वीआईपी ट्रीटमेंट के आरोप भी सामने आए
मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को जेल में विशेष सुविधाएं दिए जाने के आरोप भी सामने आए थे। इसके बाद जेल प्रशासन ने दोनों को अस्पताल वार्ड से सामान्य बैरक में स्थानांतरित कर दिया।
कोर्ट के निर्देशों के बाद गिरिबाला सिंह की सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है। जेल परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या भी बढ़ाई गई है।
CBI की जांच में कई नए पहलुओं की पड़ताल जारी
फिलहाल CBI मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स, दस्तावेजी प्रमाण और जांच प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि ट्विशा शर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या जांच के शुरुआती चरण में किसी प्रकार की लापरवाही या प्रक्रियागत त्रुटि हुई थी। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।