Petrol and Diesel Prices : नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद भारत में फिलहाल ईंधन के दाम स्थिर रखे गए हैं, जिससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं।
46 दिनों में 27 डॉलर महंगा हुआ कच्चा तेल
पिछले कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 27 फरवरी को कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था, जो महज 20 दिनों में 19 मार्च को बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
हालांकि बाद में कीमतों में कुछ गिरावट आई और 14 अप्रैल को यह 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इस तरह 46 दिनों में कच्चे तेल की कीमत में कुल 27 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कंपनियों को रोजाना हजारों करोड़ का नुकसान
कच्चे तेल की महंगाई का सीधा असर तेल कंपनियों पर पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर करीब 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए का नुकसान हो रहा है।
पिछले महीने के उच्चतम स्तर पर यह नुकसान करीब 2,400 करोड़ रुपए प्रतिदिन तक पहुंच गया था। एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती के बाद भी कंपनियां हर दिन करीब 1,600 करोड़ रुपए का घाटा झेल रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से पेट्रोल-डीजल पर लगभग 6 रुपए प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।
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आयात पर निर्भरता बढ़ा रही चिंता
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब 45% मिडिल ईस्ट और 35% रूस से आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
कच्चे तेल की महंगाई से देश का चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ सकता है। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
एक्साइज ड्यूटी में लगातार कमी
सरकार के राजस्व में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का योगदान भी घटा है। वित्त वर्ष 2017 में यह 22% था, जो अब घटकर 8% रह गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी हटा भी दे, तब भी तेल कंपनियों का मौजूदा घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़े दाम
अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत अगस्त 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जा चुके हैं।
फिलहाल भारत में कीमतें स्थिर हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में आम लोगों को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।